फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana Assembly Elections 2019, Congress Haryana, Kumari Seilja, Bhupinder Singh Hooda

हरियाणा विस चुनावः अभी भी बिखरी हुई है कांग्रेस, हुड्डा-सैलजा के साथ कदमताल नहीं मिला रहे विरोधी

Fri, 27 Sep 2019 12:33 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 27 Sep 2019 12:33 PM IST
विज्ञापन
Haryana Assembly Elections 2019, Congress Haryana, Kumari Seilja, Bhupinder Singh Hooda
कुमारी सैलजा, भपेंद्र सिंह हुड्डा - फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा में सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही कांग्रेस सत्तारूढ़ भाजपा से चुनावी जंग लड़ने के बजाय अपनी ही लड़ाई में उलझी हुई है। संगठन में बदलाव के बावजूद पार्टी गुटबाजी से बाहर नहीं निकल पाई। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा व चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का साथ देने को विरोधी धड़ा तैयार नहीं है।
विज्ञापन


अब भी पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर, पूर्व सीएलपी किरण चौधरी व पूर्व मंत्री एवं प्रचार समिति के चेयरमैन कैप्टन अजय यादव की राहें जुदा हैं। कुलदीप बिश्नोई ने भी हुड्डा से नजदीकियां बढ़ाई हैं। एआईसीसी मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला तो हुड्डा और सैलजा के साथ एक मंच पर आ गए हैं, लेकिन बाकी नेता अभी दूरी बनाए हुए हैं।
विज्ञापन


तंवर पर हाईकमान की भी एक नहीं चल रही। आचार संहिता लगने से ठीक पहले बदले गए पूर्व प्रदेशाध्यक्ष तंवर सीधे-सीधे हुड्डा पर हमलावर हैं। वह सार्वजनिक मंचों से भी पूर्व सीएम पर कटाक्ष करने का कोई मौका नहीं चूक रहे, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी तंवर को मनाने की कोशिश कर चुकी हैं, बावजूद इसके तंवर की नाराजगी बरकरार है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अगर सभी बड़े नेता एकजुट न हुए तो कांग्रेस को भाजपा से लोहा लेना आसान नहीं होगा। किरण चौधरी भी हुड्डा की कई घोषणाओं को घोषणा पत्र में शामिल करने से इंकार कर चुकी हैं, जिसमें सबसे बड़ी घोषणा चार डिप्टी सीएम की है। इस पर भी हुड्डा और किरण में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

टिकट आवंटन पर भी हंगामे के आसार

कांग्रेस में टिकट आवंटन को लेकर भी बड़े नेताओं में घमासान की स्थिति होगी। हुड्डा 90 में से अधिक से अधिक टिकट अपने समर्थक नेताओं को बांटना चाहेंगे, जबकि तंवर, किरण, सुरजेवाला, बिश्नोई अपने समर्थकों के लिए जोर लगाएंगे। टिकट न मिलने पर विरोधी धड़े से जुड़े टिकट के इच्छुक नेता बगावत भी कर सकते हैं।

तंवर खेमे में काफी नेता ऐसे हैं, जिन्होंने टिकट की आस लगाई हुई है। अब देखना यह है कि तंवर कितनों को टिकट दिला पाते हैं। प्रदेशाध्यक्ष सैलजा हालांकि, हुड्डा को यह कह चुकी हैं कि टिकटों का पैनल ऐसे तरीके से तैयार करें, जिस पर सबकी सहमति बनाई जा सके।

67 से 15 सीटों पर पहुंची पार्टी
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का ग्राफ 2009 के बाद लगातार गिरा है। 2005 में कांग्रेस ने 67 सीटें जीती थीं। 2009 में कम होकर यह 40 रह गईं और 2014 में पार्टी मात्र 15 सीटों पर सिमटी। मुख्य विपक्षी दल बनने से भी पार्टी पिछड़ गई। इनेलो के टूटने के बाद मुख्य विपक्षी दल बनने का मौका मिला और चुनाव आचार संहिता लगने से चंद दिन पहले पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा नेता प्रतिपक्ष बने।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed