दिग्गजों के बेटों ने संभाली विरासत की सियासत
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हरियाणा के गठन से लेकर अब तक राज्य की राजनीति में लालों का बर्चस्व रहा है। इनकी विरासत को लेकर हरियाणा के हर चुनाव में जंग होती रही है। भले ही लाल युग का अंत हो गया है लेकिन विरासत को लेकर जंग बरकरार है। हरियाणा के लालों के परिवार के सदस्य चुनावी दंगल में ताल ठोकेंगे।
इसके अलावा नई पीढ़ी भी खानदान की राजनीतिक विरासत को बचाए रखने के लिए मैदान में जोर आजमाइश कर रही है। हरियाणा गठन के समय से अब तक राजनीति की इस जंग को 48 साल हो चुके हैं। इस बीच अन्य राजनीतिक परिवारों की दूसरी पीढ़ी भी सियासत के मैदान में हुंकार भरने के लिए तैयार है।
वंशवाद की बेल से अछूती नहीं रह गई सियासत में विभिन्न दलों के नेताओं के पुत्र भी इस बार ताल ठोक रहे हैं। इनकी मंशा भी अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को बचाए रखने की है।
कुल मिलाकर इस विधानसभा चुनाव में पहले के चुनाव की अपेक्षा मुकाबले रोचक होंगे। कई ऐसे युवा नेता हैं जो राजनीति की पिच पर नई पारी खेलने का तैयार बैठे हैं। इनमें मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों के पुत्र और पुत्रियां भी शामिल हैं।
लालों का गढ़ हिसार, सिरसा और भिवानी
हिसार, सिरसा और भिवानी हरियाणा के लालों का गढ़ रहा है। हिसार पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल का गढ़ रहा है, जबकि भिवानी पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल और सिरसा पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल का राजनीतिक गढ़ रहा है। इन नेताओं ने इन्हीं क्षेत्रों से हरियाणा की राजनीति में अपना झंडा बुलंद किया है। जिसके बाद देश भर में हरियाणा के तीन लाल मशहूर हुए।
बंसीलाल की पीढ़ी
बंसीलाल की पीढ़ी से आबकारी एवं कराधान मंत्री किरण चौधरी और रणबीर महेंद्रा विरासत की जंग को लेकर मैदान में दिखेंगे। हालांकि किरण चौधरी की पुत्री इस बार लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाईं, लेकिन किरण चौधरी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने को तैयार है।
भजन लाल का परिवार:
पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के परिवार से कुलदीप बिश्नोई उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई और पूर्व उप मुख्यमंत्री चंद्रमोहन मैदान में दिखेंगे। कुलदीप के आदमपुर से चंद्रमोहन कालका या पंचकूला किसी एक विधानसभा से दावेदारी ठोकेंगे। रेणुका बिश्नोई किस सीट से चुनाव लड़ेंगी यह तय होना अभी बाकी है।
ताऊ देवीलाल की विरासत
ताऊ देवीलाल के परिवार से उनके पुत्र पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला अभी उंचाना से विधायक हैं। चौटाला के नाम पर ही अभी पार्टी चुनाव लड़ रही हैं। अजय चौटाला डबवाली से विधायक और अभय चौटाला ऐलनाबाद से विधायक हैं। देवीलाल की चौथी पीढ़ी से दुष्यंत लोकसभा में पहुंच चुके हैं।
कैप्टन अजय के पुत्र भी तैयारी में:
सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय यादव के पुत्र राव चिरंजीव भी चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। कैप्टन खुद चाहते हैं कि उनके पुत्र चुनाव लड़कर विधानसभा तक पहुंचे। चिरंजीव भी अपनी तरफ से पूरी तैयार रख रहे हैं।
फूलचंद मुलाना के पुत्र:
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष फूल चंद मुलाना के पुत्र वरुण मुलाना भी तैयारी में हैं। हुड्डा के करीबी रहे फूलचंद मुलाना लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। अब वे अपने पुत्र को टिकट दिलवाने में कितना जोर लगाएंगे यह देखने की बात होगी।
इन दिग्गजों की पीढ़ी मैदान में
महेंद्र प्रताप के पुत्र
हरियाणा सरकार में मंत्री महेंद्र प्रताप सिंह के पुत्र विजय प्रताप भी चुनाव लड़ेंगे। महेंद्र प्रताप सिंह ने साफ कर दिया है कि इस बार वे नहीं उनका पुत्र मैदान में होगा।
शिवचरण लाल शर्मा के पुत्र:
फरीदाबाद के डिप्टी मेयर मुकेश शर्मा शिवचरण लाल शर्मा के पुत्र हैं। वे भाजपा में शामिल हो चुके हैं और चुनाव की तैयार कर रहे हैं। टिकट मिलने पर यह भी पूरा दम दिखाएंगे।
कृष्णपाल गुर्जर के पुत्र
फरीदाबाद से सांसद बन कर केंद्र में राज्य मंत्री बने कृष्णपाल गुर्जर के पुत्र देवेंद्र गुज्जर भी इस बार पूरी तैयारी में हैं वे भाजपा के टिकट से दावेदार हैं। टिकट मिलने पर देवेंद्र का दम खम भी सामने आएगा।
डा. केबी सिंह के पुत्र:
हरियाणा के मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी डा. केबी सिंह के पुत्र अमित सिहाग भी दावेदारी पेश कर रहे हैं। अमित सिहाग इस समय यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं।
बेटियां भी हैं मैदान में
पूर्व मंत्री की पुत्री
पूर्व मंत्री लक्षमण दास अरोड़ा की पुत्री सुनीता सेतिया भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। वे सिरसा से टिकट की दावेदार हैं।
राव इंद्रजीत की पुत्री दावेदार:
गुड़गांव से सांसद बन केंद्र में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त राव इंद्रजीत की पुत्री आरती यादव भी टिकट की दावेदार हैं।
चट्ठा के पुत्र भी दिखेंगे मैदान में:
हरियाणा सरकार में वित्त मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा के पुत्र मनदीप चट्ठा भी इस बार चुनाव लड़ने के मूड मे हैं। उनकी दावेदारी भी पक्की मानी जा रही है।
टिकट वितरण में दिखेगा दम:
इस बार कई नेता पुत्र और उनकी बेटियां हरियाणा विधानसभा चुनाव में कदमताल मिलाने को तैयार हैं, लेकिन सही स्थिति टिकट वितरण के बाद स्पष्ट होगी। टिकट वितरण में इस समय इन नेताओं की पैरवी तो चल रही है, लेकिन जो टिकट हासिल करने में सफल होंगे, वहीं विरासत के दावेदार होंगे।