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Haryana: सौ करोड़ के सहकारिता घोटाले का आरोपी नरेश गोयल गिरफ्तार, हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने पकड़ा

Wed, 03 Apr 2024 05:00 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 03 Apr 2024 05:00 PM IST
सार

कुछ दिन पहले हरियाणा सरकार ने गोयल की गिरफ्तारी की स्वीकृति दी थी। गोयल की गिरफ्तारी नहीं होने पर विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर उसे बचाने का आरोप लगाया था।

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Haryana ACB arrest Naresh Kumar Goyal on corruption charges
- फोटो : ANI

विस्तार

सहकारिता विभाग में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने विभाग के संयुक्त रजिस्ट्रार व आईसीडीपी (एकीकृत सहकारी विकास परियोजना) के नोडल अधिकारी नरेश गोयल को गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार को एसीबी की टीम को पंचकूला से सफलता मिली। एसीबी की टीमें आरोपी से पूछताछ कर रही हैं। पूछताछ में घोटाले को लेकर और भी खुलासे हो सकते हैं।

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पिछले कई दिनों से एसीबी की टीमें आरोपी की तलाश में छापेमारी कर रही थी। आशंका है कि कहीं नरेश गोयल विदेश फरार न हो जाए, इसके लिए एसीबी की टीम ने एयरपोर्ट भी अलर्ट जारी किया था। नरेश कुमार गोयल पर अपने सह आरोपियों के साथ मिलकर सरकार की करोड़ों रुपये की राशि गबन करने का आरोप है। आरोप है कि उसने घोटाले की मुख्य आरोपी अनु कोशिश समेत अन्य आरोपियों की गबन की राशि को प्रापर्टी में निवेश कराया था। इसके अलावा, नोडल अधिकारी होने के बावजूद कभी भी उनकी ओर से घोटाले के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कुछ नहीं किया गया, बल्कि फर्जी बिलों को धड़ाधड़ तरीके से पास कराते रहे। जांच के दौरान नरेश गोयल की भूमिका सामने आने के बाद एसीबी ने गिरफ्तारीा के लिए सरकार ने 17 ए की परमिशन ली थी।
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2017 से नोडल अधिकारी थे गोयल, दो बार हटाने की सिफारिश पर भी नहीं हुई कार्रवाई
नरेश गोयल 2017 से योजना के नोडल अधिकारी थे। उन्हें बैंक के एमडी होने के साथ-साथ नोडल अधिकारी की अतिरिक्त तौर पर जिम्मेदारी दी गई थी। घोटाला सामने आने के बाद सहकारिता रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से 31 जून, 2023 और 3 अगस्त को गोयल को पद से हटाने की सिफारिश की थी। हालांकि, दोनों बार उच्चस्तरीय अधिकारियों ने इस पर सवाल उठाते हुए फाइल को वापस कर दिया। घोटाला सामने आने पर 5 फरवरी को विभाग ने गोयल को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया था। इनके स्थान पर हाउसफेड के एमडी, संयुक्त रजिस्ट्रार योगेश शर्मा को यह जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही विभाग ने नरेश गोयल को सिफारिश की थी।

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तीन अधिकारी किए जा चुके बर्खास्त
इस मामले में मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद तीन अधिकारियों को सहायक रजिस्ट्रार अनु कौशिश, सहायक रजिस्ट्रार रामकुमार और डिप्टी चीफ ऑडिटर योगेंद्र अग्रवाल को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। 6 फरवरी को तत्कालीन सहकारिता मंत्री बनवारी लाल ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। इनके अलावा, डीआर रोहित गुप्ता, ऑडिट ऑफिसर बलविंदर और कोऑपरेटिव बैंक सोनीपत के जीएम संजय कुमार के साथ साथ छह अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को सरकार पहले ही निलंबित कर चुकी है।

एसीबी का दावा 100 करोड़ रुपये का घोटाला
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने परत दर परत जांच करके दावा किया यह करीब 100 करोड़ रुपये का घोटाला है। इस मामले में अलग-अलग 12 एफआईआर दर्ज हैं। उधर, हरियाणा सरकार ने फैसला लिया कि इस मामले की जांच 1995 से लेकर अब तक की जाएगी। साथ ही बाहरी एजेंसी से विभाग का ऑडिट भी कराया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह साढ़े आठ करोड़ रुपये का घोटाला है।

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