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खुले में नहीं रखा जाएगा अनाज, हरियाणा में 250 करोड़ की लागत से बनेंगे 22 नए गोदाम 

Sat, 23 Jan 2021 01:05 PM IST
निवेदिता वर्मा सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 23 Jan 2021 01:05 PM IST
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Haryana : 22 new godowns to be built in state for Grain storage
हरियाणा में अब खुले में अनाज नहीं रखा जाएगा। - फोटो : फाइल फोटो

खुले में रखे जाने वाले अनाज को सुरक्षित रखने के लिए हरियाणा भंडारण निगम करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश में 22 नए गोदाम बनाने जा रहा है। अहम बात ये है कि अमेरिका द्वारा इजाद की गई साइलो स्टोरबिन तकनीक से ये गोदाम बनाए जाएंगे। इसके तहत अनाज कीड़ों, बारिश और गर्मी से सुरक्षित रहेगा। निगम ने इसको लेकर कुछ स्थानों पर काम भी शुरू कर दिया है। संभावना है कि अप्रैल 2022 तक इनका निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इन गोदाम की भंडारण क्षमता 5 लाख मीट्रिक टन होगी। 

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इस समय निगम के पास 111 गोदाम हैं और इनकी क्षमता 19.77 लाख मीट्रिक टन है। निगम की ओर से गोदामों को बनाए जाने को लेकर टेंडर जारी किए जा चुके हैं और दस स्थानों पर तो काम भी शुरू हो गया है। इसके साथ ही निगम जींद और भिवानी में डीएम ऑफिस भी बनाने जा रहा है। इस समय विभाग के पास 11 जिलों में डीएम कार्यालय हैं।
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यहां बनाए जाने हैं गोदाम
जींद और कैथल में दो-दो गोदाम बनाए जाएंगे। इसके अलावा, रोहतक, उचाना, बापौली, पानीपत, चीका, टोहाना, फतेहाबाद, यमुनानगर, सिरसा, रेवाड़ी, सोनीपत, पलवल(होडल), करनाल, हांसी, कैथल में एक-एक गोदाम बनाया जाना है। इनमें से 11 पर काम शुरू हो गया है। इनमें गेहूं, धान, बाजरा, कपास, सरसों समेत अन्य फसलों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

मंडी के पास होंगे गोदाम, पुरानों को किया जाएगा शिफ्ट
गोदामों के बनाए जाने में इस बात का खास ख्याल रखा जा रहा है कि गोदामों का निर्माण अनाज मंडियों के पास हो। निगम पदाधिकारियों का तर्क है कि इससे परिवहन का खर्च बचेगा और अनाज को जल्दी गोदामों तक पहुंचाया जा सकेगा। इसके अलावा ये भी प्रस्ताव तैयार किया गया है कि जो गोदाम पुराने हो गए हैं और आबादी के अंदर आ गए हैं, जहां पर वाहनों के आने जाने में परेशानी होती है, उनको शिफ्ट किया जाएगा। 

क्या है साइलो तकनीक

साइलो स्टोरबिन तकनीक के तहत जब किसान अपनी फसल लेकर आते हैं तो उस अनाज को डंपर के माध्यम से साइलों स्टोरबिन के बेसमेंट में बने पिट पर डाला जाता है। ग्रेविटी के जरिये वह अनाज क्लीनर सेक्शन में चला जाएगा। इसके बाद अनाज मशीन के जरिये स्टोरबिन में बने सुरक्षित पिट में चला जाएगा। जब भी उस अनाज को बाहर निकाला जाएगा तो वह सुरक्षित ही मिलेगा।

खुले में रखा जाता है 50 लाख मीट्रिक टन अनाज
आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में हर साल 50 लाख मीट्रिक टन अनाज ओपन पलेंथ पर रखा जाता है। ये स्थान विभाग द्वारा किराये पर लिए जाते हैं और इसके बदले जमीन के मालिक को 20 से 30 रुपये प्रति एमटी किराया दिया जाता है। अनुमान है कि हर साल लाखों रुपये इसके बदले दिए जाते हैं। दूसरा, खुले आसमान के नीचे अनाज रखने के कारण हर साल हजारों टन अनाज खराब भी हो जाता है और बाद में विभाग इस खराब अनाज को सस्ते दामों में बोली के माध्यम से बेचता है। 

गोदामों से होगी आमदनी : रावत  
हरियाणा भंडारण निगम के चेयरमैन नयनपाल रावत का कहना है कि इस समय निगम का मुनाफा बढ़कर 95 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हमारा लक्ष्य इसे 100 करोड़ के पार ले जाना है। अनाज की सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2022 तक नए आधुनिक गोदाम बनकर तैयार हो जाएंगे और इन गोदामों में हैफेड, डीएफएससी समेत अन्य एजेंसियों का अनाज रखा जाएगा। इनसे हमारा अनुबंध हो चुका है। 

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