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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणी, बिना सर्टिफिकेट व्हाट्सएप मैसेज को सबूत नहीं माना जा सकता 

Fri, 22 Jan 2021 12:00 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 22 Jan 2021 12:00 PM IST
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Electronic proof is not acceptable without certificate says punjab and haryana high court
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

एनडीपीएस के एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इंडियन एविडेंस एक्ट के सेक्शन 68 बी के तहत यदि सर्टिफिकेट नहीं लिया गया है तो व्हाट्सएप मैसेज या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सबूत स्वीकार्य नहीं है। 

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आरके सिंगला ने हाईकोर्ट याचिका दाखिल कर नियमित जमानत की मांग की थी। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को सूचना मिली थी कि दो कंसाइनमेंट में नशीला पदार्थ भेजा जा रहा है। पुलिस डीटीडीसी कूरियर के पंचकूला कार्यालय पहुंची तो पता चला कि यह कंसाइनमेंट परमजीत कौर भेज रही है। 
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परमजीत कौर को बुलाया गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि इसे वही भेज रही हैं। उसे खोला गया तो इसमें ट्रामाडोल हाईड्रोक्लोराइड की 20 हजार गोलियां मिलीं। दूसरा कंसाइनमेंट फिरोजपुर भेजा गया था और एनसीबी ने वहां जाकर इसे खोला तो उसमें 37 हजार गोलियां मिलीं। पुलिस ने फिरोजपुर से भावेश और पंचकूला से परमजीत कौर को गिरफ्तार किया। 

परमजीत कौर ने बताया कि यह कंसाइनमेंट आरके सिंगला के कहने पर उसने भावेश को भेजा था और उसे नहीं पता था कि इसमें क्या है। एनसीबी ने आरके सिंगला को भी गिरफ्तार कर लिया और तब से वह भी पुलिस हिरासत में है। 


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याची ने कहा कि केवल किसी के बयान के आधार पर उसे इस मामले में नहीं घसीटा जा सकता है। एनसीबी ने कहा कि परमजीत कौर और आरके सिंगला के बीच व्हाट्सएप पर बातचीत हुई है, जिसका रिकार्ड एनसीबी के पास है। 

हाईकोर्ट ने पूछा, क्या इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत इसके लिए सेक्शन 65बी में सर्टिफिकेट मौजूद है। एनसीबी का जवाब न में मिला तो हाईकोर्ट ने कहा कि इन मैसेज की सबूत के रूप में कोई स्वीकार्यता नहीं है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने याची को नियमित जमानत दे दी। हालांकि जमानत के लिए हाईकोर्ट ने उसे 10 लाख रुपये जमा करवाने का आदेश दिया है।

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