फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Happy Hypoxia is dangerous in Corona Patients

हैप्पी हाइपोक्सिया: कोरोना मरीजों में तेजी से बढ़ रहा ये खतरा, अचानक कम होने लगती है ऑक्सीजन

Tue, 01 Jun 2021 12:09 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 01 Jun 2021 12:09 PM IST
सार

हैप्पी हाइपोक्सिया में संक्रमित मरीज को पहले तो बुखार, खांसी या सांस फूलने की समस्या नहीं होती, लेकिन अचानक ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगता है, जिसे मेंटेन करना मुश्किल हो जाता है। 
 

विज्ञापन
Happy Hypoxia is dangerous in Corona Patients
हैप्पी हाइपोक्सिया में ऑक्सीजन कम होने लगती है। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर में शरीर में अचानक कम होता ऑक्सीजन का स्तर मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। विशेषज्ञ इस स्थिति को हैप्पी हाइपोक्सिया बता रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे मरीजों में संक्रमित होने के बाद भी कोरोना के खास लक्षण दिखाई नहीं देते, हालांकि अचानक उनकी सांस फूलने लगती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम हो जाता है। ऐसी स्थिति मरीज के लिए जानलेवा हो रही है।

विज्ञापन


पीजीआई के कोविड-19 अस्पताल के साथ ही जीएमएसएच 16 व जीएमसीएच-32 में भर्ती होने वाले कोरोना के गंभीर मरीजों में हैप्पी हाइपोक्सिया के मरीजों की संख्या 60 प्रतिशत से ज्यादा है। शरीर में अचानक से कम हुई ऑक्सीजन की मात्रा उन्हें ब्रेन हेमरेज के साथ ही अन्य गंभीर स्थितियों में पहुंचा दे रही है।

विज्ञापन

क्यों कहते हैं हैप्पी हाइपोक्सिया

जीएमएसएच 16 के कोविड के नोडल अधिकारी डॉक्टर हनी साहनी ने बताया कि इस स्थिति में मरीज बिल्कुल सामान्य लोगों की तरह मेंटेन ऑक्सीजन लेवल के साथ खुशहाल जीवन जीता है, इसलिए इसका नाम हैप्पी हाइपोक्सिया रखा गया है।

कोरोना में ज्यादा घातक
कोरोना संक्रमित मरीजों में हैप्पी हाइपोक्सिया का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। डॉ. साहनी ने बताया कि इसमें संक्रमित मरीज को पहले तो बुखार, खांसी या सांस फूलने की समस्या नहीं होती, लेकिन अचानक ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगता है, जिसे मेंटेन करना मुश्किल हो जाता है। इसके कारण किडनी, दिमाग और दिल पर तेजी से असर पड़ता है। 

डॉक्टर हनी का कहना है कि बुजुर्गों की तुलना में कम उम्र के लोगों में इसका खतरा ज्यादा है क्योंकि मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता होने के कारण इन्हें शुरुआती दौर में इसके लक्षणों का पता नहीं चलता और अचानक ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिर जाता है, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है।

होम आइसोलेशन में लगातार जांचते रहें ऑक्सीजन स्तर

पीजीआई में कोविड-19 के बंधन के चेयरमैन प्रोफेसर जीडी पुरी का कहना है कि ऐसी स्थिति से बचाव के लिए जरूरी है कि होम आइसोलेशन में रखे गए मरीज भी कुछ समय के अंतराल पर लगातार शरीर में ऑक्सीजन के स्तर की जांच करते रहें। इस बात का ध्यान रखें कि ऑक्सीजन का स्तर 95 से 100 के बीच रहना चाहिए।

90 से कम आने पर वह तत्काल डॉक्टर को इसकी सूचना दें, क्योंकि ऑक्सीजन के घटने के साथ ही शरीर में कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बढ़ने लगता है। इससे फेफड़े प्रभावित होते हैं और खून में ऑक्सीजन की मात्रा सही तरीके से नहीं पहुंच पाती। इसका असर दिल और मस्तिष्क की कोशिकाओं पर भी पड़ता है। यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।

ऐसे जांचे ऑक्सीजन का स्तर
हैप्पी हाइपोक्सिया की स्थिति से बचाव के लिए शरीर में ऑक्सीजन का स्तर जांचने की प्रक्रिया सीख लें। इसमें एक सांस में 30 तक गिनती गिने। इस दौरान अगर सांस लेने में दिक्कत होती है तो डॉक्टर से संपर्क करें। संक्रमित होने के 6 से 9 दिनों के बीच हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण सामने आते हैं, इसलिए उस दौरान 6 मिनट तक लगातार टहलें और उसके बाद ऑक्सीमीटर से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर जांचे। अगर स्तर 94 से कम आए तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed