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ज्ञानचंद गुप्ता को हाईकोर्ट से नोटिस, कोर्ट ने पूछा- इतनी सुविधाएं क्यों?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 04 Oct 2016 01:37 AM IST
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ज्ञानचंद गुप्ता को हाईकोर्ट से नोटिस
- फोटो : File Photo
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पंचकूला के भाजपा विधायक व पार्टी के मुख्य सचेतक ज्ञानचंद गुप्ता को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी किया गया है। मामला प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें मंत्री पद का दर्जा देने का है। हरियाणा में चार मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका के तहत ही याची की तरफ से एक अर्जी दाखिल कर विधायक ज्ञानचंद गुप्ता और प्रदेश के एडवोकेट जनरल को मंत्री पद का दर्जा दिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया था।
मामले पर पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल को नोटिस जारी करने से इंकार कर दिया। हालांकि अदालत ने ज्ञानचंद गुप्ता समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था, लेकिन सोमवार को अर्जी के तकनीकी आधार के मद्देनजर हाईकोर्ट ने विधायक ज्ञानचंद गुप्ता को सीधे तौर पर नोटिस जारी किया। अब मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।
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मामले पर पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल को नोटिस जारी करने से इंकार कर दिया। हालांकि अदालत ने ज्ञानचंद गुप्ता समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था, लेकिन सोमवार को अर्जी के तकनीकी आधार के मद्देनजर हाईकोर्ट ने विधायक ज्ञानचंद गुप्ता को सीधे तौर पर नोटिस जारी किया। अब मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।
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कोर्ट ने कहा- गाड़ी-बंगला सब दे दिया, यह क्या मंत्री से कम हैं?
विधायक ज्ञानचंद गुप्ता
- फोटो : File Photo
अर्जी पर हाईकोर्ट के जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने बताया कि सरकार ने ज्ञानचंद गुप्ता को मंत्री नहीं बनाया है, बल्कि उन्हें केवल मंत्री पद का दर्जा दिया है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि ज्ञानचंद गुप्ता न तो मंत्रिमंडल की बैठक में और न ही शासन से जुड़े किसी तरह के निर्णय लेने के लिए अधिकृत हैं। इस पर जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस लीजा गिल ने सवाल उठाया कि ज्ञानचंद गुप्ता को लाल बत्ती वाली गाड़ी, सरकारी कोठी और सभी सुविधाएं तो आपने दे रखी हैं, यह मंत्री से कम कैसे हैं? खंडपीठ ने कहा कि गुप्ता को यह सारी सुविधाएं आपने मंत्री वाली दे रखी है। ऐसे तो आप अपनी मर्जी से कितने भी लोगों को मंत्री न बनाकर, मंत्री पद का दर्जा देते हुए उन्हें ऐसी सुविधाएं दे सकते हैं और 15 प्रतिशत के नियम से भी बच सकते हैं।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि ज्ञानचंद गुप्ता न तो मंत्रिमंडल की बैठक में और न ही शासन से जुड़े किसी तरह के निर्णय लेने के लिए अधिकृत हैं। इस पर जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस लीजा गिल ने सवाल उठाया कि ज्ञानचंद गुप्ता को लाल बत्ती वाली गाड़ी, सरकारी कोठी और सभी सुविधाएं तो आपने दे रखी हैं, यह मंत्री से कम कैसे हैं? खंडपीठ ने कहा कि गुप्ता को यह सारी सुविधाएं आपने मंत्री वाली दे रखी है। ऐसे तो आप अपनी मर्जी से कितने भी लोगों को मंत्री न बनाकर, मंत्री पद का दर्जा देते हुए उन्हें ऐसी सुविधाएं दे सकते हैं और 15 प्रतिशत के नियम से भी बच सकते हैं।