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गऊशाला पर हमला, 57 गाय भगाईं
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Mon, 24 Feb 2014 02:07 AM IST
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फेज-1 स्थित गऊशाला में शनिवार/रविवार रात कुछ हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया। इस दौरान हमलावर गऊशाला के पांच गेटों के ताले तोड़कर 57 गाय भगाने में कामयाब रहे। वारदात के समय गऊशाला की बिजली की लाइन काट दी गई, जो रविवार शाम तक भी बहाल नहीं हो पाई थी।
वारदात के तुरंत बाद मौके पर पुलिस भी पहुंच गई। हालांकि आरोपी भागने में कामयाब रहे। गऊशाला के पास से एक लोहे की रॉड, डंडा और एक जोड़ी चप्पल बाथरूम में मिलीं। वारदात की शिकायत थाना फेज-1 पुलिस को दे दी गई है। पुलिस ने मामला दर्ज करने क ी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक रात करीब साढ़े बारह बजे से डेढ़ बजे के बीच में हमलावरों ने वारदात को अंजाम दिया। हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया। इस दौरान पहले गऊशाला की बिजली की लाइन काटी गई। इसके बाद तीन मोटरसाइकिलों पर सवार होकर कुछ युवक गऊशाला के पीछे वाली साइड पहुंचे।
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उन्होंने पहले गऊशाला का मेन गेट का ताला तोड़ा। फिर वह गऊशाला के अंदर घुसे। इसके बाद एक साथ उन्होंने चार अन्य गेटों के ताले तोड़े। इस दौरान पशु डर गए और इधर-उधर भागने लगे। जैसे ही सिक्योरिटी गार्डों को इसका पता चला, उन्होंने तुरंत गेटों को बंद कर दिया और हमलवारों को ललकार कर पकड़ने की कोशिश की। लेकिन हमलावर बैक साइड से कूदकर भागने में कामयाब रहे।
इसी बीच पुलिस को फोन किया गया। मौके पर पीसीआर पार्टी भी पहुंच गई। हालांकि लुटेरों का कोई पता नहीं चला सका। गऊशाला के पीछे से एक लोहे की रॉड, डंडा और अन्य सामान बरामद हुआ है। गऊशाला के प्रधान भूपिंदर शर्मा ने बताया कि उन्हें रात 1.38 पर घटना की सूचना मिली। इसके बाद वह खुद गऊशाला पहुंचे। इस दौरान कई गायों को उन्होंने काबू किया। साथ ही इस बारे में पुलिस एवं निगम कमिश्नर को भी शिकायत दे दी है।
पशु मालिक हो सकते हैं हमलावर ?
गऊशाला के प्रधान भूपिंदर शर्मा ने बताया कि शुक्रवार की रात को उन्होंने लावारिस पशुओं को पकड़ने की मुहिम चलाई थी। इस दौरान मटौर के डंपिंग प्वाइंट, फेज-11, 9, छह और 3-7 के लाइट प्वाइंट से 18 पशुओं को पकड़ा था। उस समय भी कुछ पशु मालिकों ने पशु पकड़ने वाली टीम से बहसबाजी की थी। साथ ही गाड़ी को रोकने की कोशिश की थी। ऐसे में उन्हें संदेह है कि यह सारी वारदात पशु मालिकों द्वारा ही की गई है।
तीन महीने पहले शुरू हुई थी नई गऊशाला
गऊशाला के प्रधान ने बताया कि यह गऊशाला बिल्कुल नई बनी है। तीन महीने से वह गऊशाला चला रहे हैं। इस दौरान 270 के करीब लावारिस पशुओं को उन्होंने पकड़ा था। लेकिन हमले के बाद अब 215 के करीब पशु गऊशाला में रह गए हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा कई बीमार पशुओं का इलाज भी कराया गया है।
पिछली साइड दीवार होती, तो न होती वारदात
गऊशाला के प्रधान ने बताया कि गऊशाला के पीछे वाली साइड में यदि दीवार होती तो यह वारदात न होती। उन्होंने कहा कि पीछे वाली दीवार की ऊंचाई बहुत कम है। इसी का फायदा उठाकर हमलावर गऊशाला में घुसे और भागने में कामयाब रहे। जिक्रयोग है कि इससे पहले पशु पकड़ने वाली टीम पर भी कई बार हमला हो चुका है। यह मामला डीसी तक पहुंच चुका है। लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई।
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वारदात के तुरंत बाद मौके पर पुलिस भी पहुंच गई। हालांकि आरोपी भागने में कामयाब रहे। गऊशाला के पास से एक लोहे की रॉड, डंडा और एक जोड़ी चप्पल बाथरूम में मिलीं। वारदात की शिकायत थाना फेज-1 पुलिस को दे दी गई है। पुलिस ने मामला दर्ज करने क ी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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जानकारी के मुताबिक रात करीब साढ़े बारह बजे से डेढ़ बजे के बीच में हमलावरों ने वारदात को अंजाम दिया। हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया। इस दौरान पहले गऊशाला की बिजली की लाइन काटी गई। इसके बाद तीन मोटरसाइकिलों पर सवार होकर कुछ युवक गऊशाला के पीछे वाली साइड पहुंचे।
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उन्होंने पहले गऊशाला का मेन गेट का ताला तोड़ा। फिर वह गऊशाला के अंदर घुसे। इसके बाद एक साथ उन्होंने चार अन्य गेटों के ताले तोड़े। इस दौरान पशु डर गए और इधर-उधर भागने लगे। जैसे ही सिक्योरिटी गार्डों को इसका पता चला, उन्होंने तुरंत गेटों को बंद कर दिया और हमलवारों को ललकार कर पकड़ने की कोशिश की। लेकिन हमलावर बैक साइड से कूदकर भागने में कामयाब रहे।
इसी बीच पुलिस को फोन किया गया। मौके पर पीसीआर पार्टी भी पहुंच गई। हालांकि लुटेरों का कोई पता नहीं चला सका। गऊशाला के पीछे से एक लोहे की रॉड, डंडा और अन्य सामान बरामद हुआ है। गऊशाला के प्रधान भूपिंदर शर्मा ने बताया कि उन्हें रात 1.38 पर घटना की सूचना मिली। इसके बाद वह खुद गऊशाला पहुंचे। इस दौरान कई गायों को उन्होंने काबू किया। साथ ही इस बारे में पुलिस एवं निगम कमिश्नर को भी शिकायत दे दी है।
पशु मालिक हो सकते हैं हमलावर ?
गऊशाला के प्रधान भूपिंदर शर्मा ने बताया कि शुक्रवार की रात को उन्होंने लावारिस पशुओं को पकड़ने की मुहिम चलाई थी। इस दौरान मटौर के डंपिंग प्वाइंट, फेज-11, 9, छह और 3-7 के लाइट प्वाइंट से 18 पशुओं को पकड़ा था। उस समय भी कुछ पशु मालिकों ने पशु पकड़ने वाली टीम से बहसबाजी की थी। साथ ही गाड़ी को रोकने की कोशिश की थी। ऐसे में उन्हें संदेह है कि यह सारी वारदात पशु मालिकों द्वारा ही की गई है।
तीन महीने पहले शुरू हुई थी नई गऊशाला
गऊशाला के प्रधान ने बताया कि यह गऊशाला बिल्कुल नई बनी है। तीन महीने से वह गऊशाला चला रहे हैं। इस दौरान 270 के करीब लावारिस पशुओं को उन्होंने पकड़ा था। लेकिन हमले के बाद अब 215 के करीब पशु गऊशाला में रह गए हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा कई बीमार पशुओं का इलाज भी कराया गया है।
पिछली साइड दीवार होती, तो न होती वारदात
गऊशाला के प्रधान ने बताया कि गऊशाला के पीछे वाली साइड में यदि दीवार होती तो यह वारदात न होती। उन्होंने कहा कि पीछे वाली दीवार की ऊंचाई बहुत कम है। इसी का फायदा उठाकर हमलावर गऊशाला में घुसे और भागने में कामयाब रहे। जिक्रयोग है कि इससे पहले पशु पकड़ने वाली टीम पर भी कई बार हमला हो चुका है। यह मामला डीसी तक पहुंच चुका है। लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई।