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पंजाब के गांव खानकोट का रहने वाला है और जमीन भी है, गुरपतवंत सिंह पन्नू के बारे में 5 खुलासे
Thu, 10 Sep 2020 02:46 PM IST
खुशबू गोयल
अशोक नीर, खानकोट(अमृतसर)
अशोक नीर, खानकोट(अमृतसर)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 10 Sep 2020 02:46 PM IST
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गुरपतवंत सिंह पन्नू
- फोटो : फाइल फोटो
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आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू पंजाब के गांव खानकोट का रहने वाला है और गांव में आज भी उसकी जमीन है। काका जी! मेरे बेटा अब बड़ा वकील बन चुका है। कनाडा में उसकी बड़े-बड़े लोगों से जान पहचान हो गई है। बात उन दिनों की है, जब आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की मां जिंदा था और गांव में ठेके पर दी गई जमीन के पैसे लेने आती थी। यहां के लोगों का कहना है कि वह यहां आकर बताती थी कि उसका बेटा कनाडा में बड़ा वकील बन गया है।
इससे पता चलता है कि पन्नू की मां भी नहीं चाहती थी वह आतंकी कहलाए। पन्नू ने अपनी मां ही नहीं देश के अरमानों को भी चोट पहुंचाई है। अमृतसर-जंडियाला गुरु जीटी रोड में स्थित कस्बा दबूरजी के साथ बहती अपर दोआबा नहर के किनारे के अंतिम छोर में बसा गांव खानकोट इन दिनों सुर्खियों में है। गांव की तरफ जाने वाली तंग सड़क के किनारे बह रही नहर की ओर से आने वाले ठंडी हवा के झोंके राहत देने वाले हैं।
लेकिन इस गांव में पैदा हुए सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के आतंकी गुरपतवंत सिंह की करतूतों को सुनकर ग्रामीण स्तब्ध हैं। उन्हें कुछ समय पहले इस बात की जानकारी मिली है कि देश की अखंडता को तोड़ने की साजिश रचने वाला पन्नू उनके गांव का रहने वाला है। आतंकवाद के दौर में भी इस गांव के आसपास के गांवों में आतंकी घटनाएं हुईं थीं।
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इससे पता चलता है कि पन्नू की मां भी नहीं चाहती थी वह आतंकी कहलाए। पन्नू ने अपनी मां ही नहीं देश के अरमानों को भी चोट पहुंचाई है। अमृतसर-जंडियाला गुरु जीटी रोड में स्थित कस्बा दबूरजी के साथ बहती अपर दोआबा नहर के किनारे के अंतिम छोर में बसा गांव खानकोट इन दिनों सुर्खियों में है। गांव की तरफ जाने वाली तंग सड़क के किनारे बह रही नहर की ओर से आने वाले ठंडी हवा के झोंके राहत देने वाले हैं।
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लेकिन इस गांव में पैदा हुए सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के आतंकी गुरपतवंत सिंह की करतूतों को सुनकर ग्रामीण स्तब्ध हैं। उन्हें कुछ समय पहले इस बात की जानकारी मिली है कि देश की अखंडता को तोड़ने की साजिश रचने वाला पन्नू उनके गांव का रहने वाला है। आतंकवाद के दौर में भी इस गांव के आसपास के गांवों में आतंकी घटनाएं हुईं थीं।
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मां जमीनें देखने के लिए आती थी गांव
वर्षों से गुरपतवंत पन्नू की 46 कनाल जमीन को ठेके पर लेकर खेती कर रहे बिक्रम सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि जब पन्नू की मां जीवित थी, तब वह उससे भी यही दोहराती थी कि गुरपतवंत सिंह पन्नू कनाडा में रह रहा है, वह वहां का बड़ा वकील है। वह गांव में जब भी आती अपनी जमीन को देखने के लिए खेतों तक आ जाती थी।
गांव में उनके कुछ प्लाट भी हैं, जो खली पड़े हैं। बिक्रम ने बताया कि पन्नू की मां की मौत के बाद वह ठेके की राशि उसके भाई मंगवंत सिंह के बैंक खाते में सीधे जमा करवा देता था। वह एक-दो बार ही उसके भाई से मिला है। उसने 46 कनाल जमीन 30 वर्ष के ठेके में ले रखी है और अभी कुछ वर्ष बाकी हैं। बिक्रम सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले दिल्ली से कुछ अधिकारी उनके पास आए थे।
उन्होंने पन्नू की संपत्ति के बारे में पूछा था। उसने उनको बताया कि यह जमीन पन्नू की है और उसने ठेके पर ली है। यह जानकारी लेने के बाद वह चले गए। इस समय उन्होंने 46 कनाल में धान लगाया हुआ है। अभी तक किसी भी अधिकारी ने खेत खाली करने के लिए नहीं कहा है। अगर ऐसा कोई आदेश मिला तो वह धान की कटाई के बाद खेत खाली कर देगा।
गांव में उनके कुछ प्लाट भी हैं, जो खली पड़े हैं। बिक्रम ने बताया कि पन्नू की मां की मौत के बाद वह ठेके की राशि उसके भाई मंगवंत सिंह के बैंक खाते में सीधे जमा करवा देता था। वह एक-दो बार ही उसके भाई से मिला है। उसने 46 कनाल जमीन 30 वर्ष के ठेके में ले रखी है और अभी कुछ वर्ष बाकी हैं। बिक्रम सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले दिल्ली से कुछ अधिकारी उनके पास आए थे।
उन्होंने पन्नू की संपत्ति के बारे में पूछा था। उसने उनको बताया कि यह जमीन पन्नू की है और उसने ठेके पर ली है। यह जानकारी लेने के बाद वह चले गए। इस समय उन्होंने 46 कनाल में धान लगाया हुआ है। अभी तक किसी भी अधिकारी ने खेत खाली करने के लिए नहीं कहा है। अगर ऐसा कोई आदेश मिला तो वह धान की कटाई के बाद खेत खाली कर देगा।
देश विभाजन के बाद लाहौर से खानकोट में आया था परिवार
खानकोट गांव के पूर्व सरपंच गुरदर्शन सिंह (68) और सुखदेव सिंह (66) ने बताया कि उन्होंने अपने जीवनकाल में गुरपतवंत सिंह पन्नू और उसके परिवार के किसी भी सदस्य को गांव में नहीं देखा। आतंकी के पिता महिंदर सिंह विभाजन के समय पाकिस्तान से यहां (खानकोट) पहुंचे थे। महिंदर सिंह मार्कफैड में नौकरी करते थे। गुरपतवंत और उसका भाई मंगवंत सिंह कई साल पहले विदेश जा चुके हैं। उन्हें जानकारी मिली थी कि आतंकी गुरपतवंत ने अपनी जमीन को काफी समय पहले ठेके पर दे दिया था।
पूर्व सरपंच गुरदर्शन सिंह और समाज सेवक सुभाष सहगल ने बताया कि आतंकी गुरपतवंत सिंह के जाल में पंजाब के युवा किसी कीमत पर नहीं फंसेंगे। वह छोटे-छोटे लालच देकर युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहा है, लेकिन पंजाब की जनता उसे अपने इरादों में कामयाब नहीं होने देगी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस तरह के आतंकियों से निपटने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
पूर्व सरपंच गुरदर्शन सिंह और समाज सेवक सुभाष सहगल ने बताया कि आतंकी गुरपतवंत सिंह के जाल में पंजाब के युवा किसी कीमत पर नहीं फंसेंगे। वह छोटे-छोटे लालच देकर युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहा है, लेकिन पंजाब की जनता उसे अपने इरादों में कामयाब नहीं होने देगी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस तरह के आतंकियों से निपटने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।