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गुरमीत सिंह बोले- शिक्षित किसान पिछड़े लोगों को परिवर्तन को स्वीकार करने के लिए कर सकता है तैयार

Sun, 06 Nov 2022 02:06 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 06 Nov 2022 02:06 AM IST
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Gurmeet Singh said - educated farmer can prepare backward people to accept change
चंडीगढ़। भारत में जनसंख्या और विविधता दोनों के मामले में डेयरी पशुओं के लिए आनुवंशिक संसाधनों की प्रचुरता है। एक किसान शिक्षित और जानकार है तो वह उन गरीबों और पिछड़े लोगों के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगा जो परिवर्तन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। यह बात शनिवार को जूनी बायोटेक लिमिटेड के चेयरमैन गुरमीत सिंह भाटिया ने सीआईआई एग्रोटेक-2022 में स्थायी कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए डिजिटल रूपांतरण पर सत्र के दौरान कही। यह सस्टेनेबल डेयरी और लाइव स्टोक मैनेजमेंट पर आधारित थी।
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सेक्टर-17 स्थित परेड ग्राउंड आयोजित प्रदर्शनी के दूसरे दिन उन्होंने कहा कि वैश्विक कृषि उत्पादन में लाइव स्टोक का योगदान 40 फीसदी है। 70 मिलियन से अधिक किसान सीधे तौर पर डेयरी फार्मिंग से जुड़े हैं। हम यहां सस्टेनेबल डेयरी मैनेजमेंट पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए एकत्रित हुए हैं। एम्बेसेडर ऑफ द किंगडम ऑफ नीदरलैंड और एग्रीकल्चर एम्बेसेडर रिक नोबेल ने कहा कि कृषि और पशुपालन भारत के साथ डच एसोसिएशन के लिए द्विपक्षीय है। नीदरलैंड में किसानों, सरकार, खुदरा विक्रेताओं और बैंकरों के बीच निरंतर संपर्क होता है। उन्होंने कहा कि डच कंपनियां भारत में क्यूआर कोड पर काम कर रही हैं ताकि उपभोक्ताओं में इस बारे में अधिक जागरूकता पैदा की जा सके कि दूध वास्तव में कहां से आ रहा है जिससे शहर की प्रक्रिया का पालन किया जा सके और गाय का दूध उपलब्ध हो सके।
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डेयरी उद्योग में महिलाओं की भागीदारी अच्छा संकेत
आईटीसी लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट ऑपरेशंस सचिन शर्मा ने कहा कि डेयरी व्यवसाय भारत के लिए एक सफलता की कहानी है। इस उद्योग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना अच्छा संकेत है। इसमें उत्पादकता कम होना चुनौती है, लेकिन इसमें अब सुधार हो रहा है। बस एकीकृत समाधान की जरूरत है। थिसेनक्रुप लिमिटेड से प्राणथर्थिहारन नटराजन ने कहा कि दूध के पास्चुरीजेशन का विकल्प है, जिसे एचपीपी कहा जाता है। भारत में इसके कार्यान्वयन की कमी है, यह पोषक तत्वों को खत्म नहीं करता है और इसका स्वाद भी नहीं बदलता है। इससे निर्यात में भारत के प्रयासों में भी मदद मिलेगी क्योंकि यह तकनीक तरल दूध के शेल्फ लाइफ को 45 दिनों तक ले जाती है।
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गोमूत्र का फिनाइल सबसे अच्छा, इससे बेहतर होगा पशु प्रबंधन
इंडियन वेटरनरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ चिरंतन कादियान ने कहा कि हम फिनाइल बनाने के लिए गोमूत्र का उपयोग कर सकते हैं। हमें अपने लाइव स्टॉक का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने की आवश्यकता है। पशु प्रबंधन एक बहुत बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए स्थानीय निकाय बहुत कम प्रभाव के साथ संसाधनों को बर्बाद कर रहे हैं। सीआईआई के रीजनल कमेटी ऑन एग्रीकल्चर, फूड प्रोसेसिंग एंड डेयरी के चेयरमैन मयंक सिंघल ने कहा, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर वास्तव में एक चुनौती है और अच्छी बात यह है कि अगर हम इसे सही कर लेते हैं तो इसके विकास की भी बहुत बड़ी संभावना है।
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