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हरियाणा: आईएएस पांडुरंग चरखी दादरी के प्रभारी अधिकारी नियुक्त, 25 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर रखेंगे नजर
Thu, 10 Sep 2026 12:21 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:21 PM IST
सार
पांडुरंग जिले में 25 करोड़ रुपये या इससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखेंगे। इसके अलावा जिले की अपराध स्थिति, जघन्य अपराध, सतर्कता से जुड़े मामले और सरकारी सेवाओं की समय पर डिलीवरी की भी समीक्षा करेंगे।
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आईएएस अधिकारी के. मकरंद पांडुरंग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरियाणा सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के. मकरंद पांडुरंग को चरखी दादरी जिले का प्रभारी अधिकारी बनाया है। वह अपने मौजूदा पदों के साथ यह जिम्मेदारी संभालेंगे। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं।
पांडुरंग जिले में 25 करोड़ रुपये या इससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखेंगे। इसके अलावा जिले की अपराध स्थिति, जघन्य अपराध, सतर्कता से जुड़े मामले और सरकारी सेवाओं की समय पर डिलीवरी की भी समीक्षा करेंगे। स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में चल रहे काम भी उनकी निगरानी में रहेंगे।
सरकार की संशोधित व्यवस्था के तहत पांडुरंग को हर तीन महीने में मॉनिटरिंग एवं कोऑर्डिनेशन सेल को जिले की प्रगति की रिपोर्ट देनी होगी। इसमें प्रमुख परियोजनाओं की स्थिति, काम में आ रही अड़चन और संबंधित विभागों के प्रदर्शन की जानकारी शामिल होगी।
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जिले में कर, जीएसटी और दूसरे संबंधित मामलों में जिला आबकारी एवं कराधान अधिकारियों के सामने आ रही समस्याओं की भी वह समीक्षा करेंगे। जरूरत पड़ने पर उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सकेंगे।
प्रभारी अधिकारी के तौर पर उनके लिए स्वास्थ्य या शिक्षा विभाग से जुड़े किसी एक महत्वपूर्ण संस्थान या स्थल का दौरा करना भी व्यवस्था का हिस्सा है। इससे जिले में सरकारी योजनाओं और प्रमुख परियोजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन किया जाएगा।
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पांडुरंग जिले में 25 करोड़ रुपये या इससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखेंगे। इसके अलावा जिले की अपराध स्थिति, जघन्य अपराध, सतर्कता से जुड़े मामले और सरकारी सेवाओं की समय पर डिलीवरी की भी समीक्षा करेंगे। स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में चल रहे काम भी उनकी निगरानी में रहेंगे।
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सरकार की संशोधित व्यवस्था के तहत पांडुरंग को हर तीन महीने में मॉनिटरिंग एवं कोऑर्डिनेशन सेल को जिले की प्रगति की रिपोर्ट देनी होगी। इसमें प्रमुख परियोजनाओं की स्थिति, काम में आ रही अड़चन और संबंधित विभागों के प्रदर्शन की जानकारी शामिल होगी।
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जिले में कर, जीएसटी और दूसरे संबंधित मामलों में जिला आबकारी एवं कराधान अधिकारियों के सामने आ रही समस्याओं की भी वह समीक्षा करेंगे। जरूरत पड़ने पर उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सकेंगे।
प्रभारी अधिकारी के तौर पर उनके लिए स्वास्थ्य या शिक्षा विभाग से जुड़े किसी एक महत्वपूर्ण संस्थान या स्थल का दौरा करना भी व्यवस्था का हिस्सा है। इससे जिले में सरकारी योजनाओं और प्रमुख परियोजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन किया जाएगा।