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गुरुद्वारा शाहपुर: दूसरे विश्वयुद्ध में शामिल सैनिकों ने करवाया था निर्माण, बखूबी निभा रहा सामाजिक दायित्व
Fri, 28 Oct 2022 11:25 AM IST
निवेदिता वर्मा
नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 28 Oct 2022 11:25 AM IST
सार
इस गुरुद्वारा साहिब का निर्माण दूसरे विश्वयुद्ध में शामिल इसी गांव के सैनिकों ने गांव के लोगों के सहयोग से करवाया था। सैनिकों की बहादुरी को देखकर अंग्रेज अधिकारी ने श्री गुरुग्रंथ साहिब का स्वरूप भेंट किया था। इसे मर्यादा के साथ शाहपुर की धर्मशाला में स्थापित किया गया।
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गुरुद्वारा शाहपुर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
चंडीगढ़ के गुरुद्वारा शाहपुर सेक्टर-38बी धार्मिक कार्यक्रम ही नहीं, सामाजिक दायित्वों का भी बखूबी निर्वहन कर रहा है। गुरुद्वारे ने इस साल गढ़शंकर और होशियारपुर के 20 स्कूलों के डेढ़ हजार से अधिक बच्चों में स्वेटर बांटने का फैसला लिया है। प्रधान जत्थेदार तारा सिंह ने बताया कि जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए हर महीने 35 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
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बीमार लोगों की दवाइयों के अलावा जरूरतमंद बच्चों की स्कूल व कॉलेज की फीस भी गुरुद्वारा साहिब की ओर से दी जा रही है। तारा सिंह ने बताया कि मदद का यह सिलसिला 2007 से चल रहा है। उन्होंने वर्ष 2007 का जिक्र करते हुए कहा कि सरहिंद के पास गांव हरपाल खेड़ी और गढ़शंकर के पास चांदपुर रुड़की गांव के स्कूलों की हालत खराब देखी। वहां न टाट थी, न विद्यार्थियों के तन पर गर्म वर्दी। मन बहुत दुखी हुआ। उसी वक्त विद्यार्थियों को गर्म स्कूल वर्दी देने का काम शुरू किया। तब से यह सिलसिला जारी है।
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इन गांवों की मदद की जा रही
मोहाली के गांव कुडरी, नंडियाली, सभीपुर, कंडाला, स्यायू माटरा, टंगोरी, दैड़ी, दड़ाली, सोहाना, गिरदपुर, चंडियाला, स्वारा, सैदपुर, गोविंदगढ़, शामपुर, मजात, मजातड़ी, सायेमाजरा, मछली, मोटे माजरा, भबात, कौर कौर, बरौली, अमलाला, लालड़ू, चंडयाला, दप्पर सहित अन्य गांव में जरूरतमंद विद्यार्थियों को किताबेें, जूते और वर्दियों का लंगर लगाया जा रहा है।
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गुरुद्वारा साहिब में चल रहीं दो डिस्पेंसरियां, इलाज होता है मुफ्त
गुरुद्वारा साहिब में हर रोज दो डिस्पेंसरियां संगत की सेवा में लगी हुई हैं। होम्योपैथी और आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी मुफ्त में चलती हैं। संगत को हर रोज मुफ्त दवाइयां भी प्रदान की जाती हैं।
विदेश भेजी पंजाबी का कायदा वाली किताब
जत्थेदार तारा सिंह ने बताया कि पंजाबी भाषा में विदेश में कायदा की किताब भेजी गई है। इस वर्ष 52 हजार कायदा भेजी गई है। इनमें ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न, सिडनी और पर्थ में, अमेरिका के कैलिफोर्निया, विकरफील्ड, संजोस और न्यूयॉर्क के अलावा इंग्लैंड के लंदन में कायदा भेजा गया है।
1946 में बना था गुरुद्वारा साहिब
इस गुरुद्वारा साहिब का निर्माण दूसरे विश्वयुद्ध में शामिल इसी गांव के सैनिकों ने गांव के लोगों के सहयोग से करवाया था। सैनिकों की बहादुरी को देखकर अंग्रेज अधिकारी ने श्री गुरुग्रंथ साहिब का स्वरूप भेंट किया था। इसे मर्यादा के साथ शाहपुर की धर्मशाला में स्थापित किया गया। गांव के सैनिकों ने लोगों से मिलकर वर्ष 1946 में गुरुद्वारा साहिब का निर्माण करवाया था। इस गुरुद्वारा साहिब का संचालन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गुरुद्वारा साहिब शाहपुर करती है। चंडीगढ़ बनने के बाद दो हजार बीघा जमीन का रकबा प्रशासन ने एक्वायर कर लिया। वर्ष 1973 में गुरुद्वारा साहिब को छोड़कर गांव का पूरा जमीन प्रशासन ने एक्वायर कर लिया था।