जानिए, क्या है 'आप' की गुल का आगे का एजेंडा
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आम आदमी पार्टी की नेता गुलकीरत कौर पनाग (गुल पनाग) चुनाव नतीजों से निराश नहीं हैं। परिणाम के बाद भी उनमें उतना ही आत्मविश्वास है, जितना चुनाव के दौरान देखने को मिलता था।
वे कहती हैं कि उनका यह पहला प्रयास था। पहली बार में ही चंडीगढ़ ने जता दिया है कि इस लड़ाई में वे उनके साथ हैं। लड़ाई काफी लंबी है। कभी हार तो कभी जीत का सामना करना पड़ेगा।
वे कहती हैं कि वे पॉलिटिक्स से अपनी रोजी-रोटी नहीं चलाने आईं हूं। जिस दिन मेरी रोजी-रोटी पॉलिटिक्स पर निर्भर हो गई, उस दिन से ही भ्रष्टाचार की शुरुआत हो जाएगी।
चुनाव नतीजों के बाद वे राजनीति में रहेंगी या नहीं। यदि रहेंगी तो क्या करेंगी। इन सभी मुद्दों पर गुल पनाग ने अमर उजाला के चंडीगढ़ के संवाददाता आशीष वर्मा से विस्तार से बातचीत की।
चुनाव में कहां चूक हो गई?
- न तो कोई चूक हुई और न ही कोई कमी रही। हमारे साथ जो भी जुड़ा, पूरे दिल से जुड़ा। वालंटियरों ने दिन रात एक कर दिया था। शायद जनता एक बार मोदी को मौका देना चाह रह थी। फिर भी चार में से एक व्यक्ति ने मुझे वोट दिया है। मैं उसका सम्मान करती हूं।
जो जनाधार बन चुका है, उसे कैसे संभालेंगी?
- मेरे सभी वालंटियर ईमानदार और जिम्मेदार हैं। हार से कोई भी हताश नहीं है। खुद वालंटियरों ने मेरा हौसला बढ़ाया है। सभी अपने काम को अच्छी तरह से समझते हैं।
पिछले दिनों नेहरू कालोनी को गिराए जाने का विरोध सिर्फ आम आदमी पार्टी ने किया था। कालोनी के लोगों के साथ मिलकर उनकी काफी मदद भी की थी। पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही बैठक होगी।
विधानसभा चुनावों क्या अपनी किस्मत आजमाना चाहेंगी?
- पंजाब में चुनाव के दौरान हमें काफी अच्छी सफलता मिली। फतेहगढ़ साहिब में मेरे माता-पिता का घर है। मैंने खुद वहां चुनाव प्रचार भी किया था। यहां से पार्टी की जीत भी हुई है।
यदि पार्टी कोई जिम्मेदारी देती है तो मैं उसे निभाने के लिए तैयार हूं। पार्टी ही जिम्मेदारी तय करती है। पहले प्रचार के लिए मुझे पंजाब भेजा गया और फिर वाराणसी। इसलिए सब कुछ पार्टी ही फैसला लेगी।
चंडीगढ़ नगर निगम के चुनावों में पार्टी हिस्सा लेगी?
- हमें वोट मिले हैं, इसका मतलब साफ है कि लोग पार्टी को चाहते हैं। नगर निगम चुनाव में पार्टी जरूर हिस्सा लेगी और मैं अपने वालंटियर की मेहनत के दम पर दावा कर सकती हूं कि पार्टी दस से 15 सीट जरूर जीतेगी। फिलहाल नगर निगम के चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन पार्टी की भूमिका एक दमदार विपक्ष के तौर पर जरूर रहेगी।
क्या अब भी लोग आपको अपनी समस्याएं बता सकते हैं?
- बिल्कुल बता सकते हैं। ये उनकी जिम्मेदारी भी है। भले ही जीत न मिली हो, लेकिन मेरी सोच में कोई परिवर्तन नहीं आया है। मैं आपके अखबार के माध्यम से बताना चाहती हूं कि महीने के दस दिन मैं चंडीगढ़ में रहूंगी। पार्टी और अपनी एनजीओ के लिए काम करूंगी। लोगों के वोट संकेत दे रहे हैं कि वे बदलाव चाहते हैं, इसलिए मैं उनकी भावना को ठेस नहीं पहुंचा सकती है।