उपलब्धि: लुधियाना में लगे सोलर ट्री को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फार्म मशीनरी में है स्थापित
लुधियाना के सोलर ट्री ने पैनल की सतह के मामले में पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। यह प्रति दिन 160-200 यूनिट बिजली का उत्पादन कर सकता है।
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लुधियाना के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फार्म मशीनरी में स्थापित सोलर ट्री को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिली है। इसे दुनिया के सबसे बड़े सोलर ट्री के रूप में प्रमाणित किया गया है। इसने पैनल की सतह के मामले में पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। सीनियर प्रिंसिपल वैज्ञानिक अश्विनी कुमार ने बताया कि यह प्रति दिन 160-200 यूनिट बिजली का उत्पादन कर सकता है।
काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर), सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमईआरआई) और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फार्म मशीनरी गिल रोड ने 309.83 वर्ग मीटर में सोलर ट्री तैयार किया है। इससे सालाना करीब 60 हजार यूनिट क्लीन और ग्रीन एनर्जी तैयार की जा सकती है। इसको ऐसे डिजाइन किया गया है जिससे इसके प्रत्येक सोलर फोटोवोल्टिक (पीवी) पैनल को सूरज की अधिक से अधिक रोशनी मिल सके।
नौ माह में तैयार किया गया सोलर ट्री
सीएसआईआर, सीएमईआरआई दुर्गापुर के डायरेक्टर प्रोफेसर हरीश हिरानी के नेतृत्व में सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट अश्वनी कुमार कुशवाहा, डॉ. मलाया करमाकर और प्रिंसिपल साइंटिस्ट एचपी इक्कुर्ति की टीम ने इसे विकसित किया है। प्रोफेसर हरीश हिरानी ने बताया कि इस सोलर ट्री को तैयार करने में उन्हें नौ माह लगे हैं। इसकी क्षमता 53.7 किलोवाट हैं यानी रह रोज करीब 160-200 यूनिट और साल में करीब 60 हजार यूनिट ग्रीन एनर्जी पैदा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि इसे अपनी आवश्यकता के अनुसार सेट किया जा सकता है। इसकी ऊंचाई इतनी है कि नीचे फसल लगाई जा सकती है।
स्टील से तैयार किया गया है स्ट्रक्चर
सोलर ट्री ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने में सहायक होगा। इस सोलर ट्री की खासियत है कि जिन स्थानों पर बिजली नहीं है यह वहां पर ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। प्रोफेसर हरीश हिरानी का कहना है कि इसका स्ट्रक्चर स्टील से तैयार किया गया है। सोलर ट्री किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। बिजली की इससे बचत होगी। इसके नीचे कोल्ड स्टोर बना सकते है। सोलर एग्रीकल्चर पंप लगा सकते है।