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जीएसटी घोटालाः पंजाब व हिमाचल से जुड़े तार, जांच करेगा एक्साइज विभाग
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चंडीगढ़। जीएसटी रिटर्न नहीं भरने वाली फर्मों पर मारे गए छापे के मामले में जांच के बाद इसके तार पंजाब और हिमाचल प्रदेश से भी जुड़ रहे हैं। एक्साइज व टैक्सटेशन विभाग की जांच में सामने आया है कि 61 करोड़ की बिक्री में ज्यादातर का लेनदेन इन्हीं दोनों राज्यों से था, इसलिए अब एक्साइज व टैक्सटेशन विभाग दोनों राज्यों से जानकारी मांगने की तैयारी कर रहा है।
बीतें महीने जीएसटी रिटर्न नहीं भरने वाली फर्मों के खिलाफ एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की थी। विभाग ने शहर के 6 फर्मों पर अलग-अलग छापा मारा। इन फर्मों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए थे। विभाग का कहना है कि फर्में फर्जी तरीके से काम कर रही थीं। इसके अलावा नियमित रूप से जीएसटी नहीं भरा जा रहा था। विभाग की तरफ से कंपनियों के मालिकों को समन भी भेजे गए थे, जिसके बाद ही उन्होंने विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखा है और अपने दस्तावेज जमा किए हैं। कंपनियों की ओर से जमा किए दस्तावेजों की भी विभाग जांच कर रहा है।
असिस्टेंट एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर आरके चौधरी ने बताया कि जांच में सामने आया है कि कंपनियों ने ज्यादातर लेन-देन पंजाब और हिमाचल प्रदेश में की है, जिसके चलते उन्होंने वहां के एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग से जानकारी मांगी जाएगी। उन्होंने बताया कि कंपनियों के मालिकों को समन भी भेजे गए हैं, लेकिन एक कंपनी के प्रोपराइटर ने अपना पक्ष नहीं रखा है, जिन्हें दोबारा समन भेजा गया है।
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इन फर्मों पर मारा गया था छापा
विभाग की ओर से एमएस एसआर एजेंसीज गोबिंदपुरा मनीमाजरा, एमएस ग्लोबल होम साल्यूशंस गोबिंदपुरा मनीमाजरा, एमएम रजत इंटरप्राइजेज ठाकुरद्वारा मनीमाजरा, एमएस पॉलिटेक गोबिंदपुरा मनीमाजरा, एमएस यूरो सेल्स गोबिंदपुरा मनीमाजरा और एमएस अम्बा एजेंसीज गोबिंदपुरा मनीमाजरा पर छापे की कार्रवाई की गई है। ये सभी फर्में पाइप्स और टाइल्स की डील करती हैं। उन्होंने बताया कि राजेश बहल एमएस एसआर एजेंसीज में पार्टनर और एमएस ग्लोबल होम साल्यूशंस का प्रोपराइटर हैं। वहीं, रजत बहल रजत इंटरप्राइजेज, एमएस पॉलिटेक और यूरो सेल्स के प्रोपराइटर हैं, जबकि मोनिका गर्ग अम्बा एजेंसीज की प्रोपराइटर हैं।
एक-दूसरे से जुड़ी हैं फर्में
एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों के अनुसार ये सभी आपस में रिश्तेदार हैं और सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए अवैध रूप से गुड्स एंड सर्विस क्रेडिट लेने में एक-दूसरे के साथ जुड़े हैं। सभी छह फर्मों ने जीएसटी पीरियड के अंदर 61 करोड़ की सेल की, लेकिन सरकार को सिंगल अमाउंट भी टैक्स नहीं दिया, जबकि इनपुट टैक्स क्रेडिट में एडजस्ट किया गया। इसके अलावा सभी फर्में जीएसटीआर-थ्रीबी मंथली टैक्स रिटर्न भी फरवरी 2020 से फाइल नहीं कर रही हैं।
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बीतें महीने जीएसटी रिटर्न नहीं भरने वाली फर्मों के खिलाफ एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की थी। विभाग ने शहर के 6 फर्मों पर अलग-अलग छापा मारा। इन फर्मों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए थे। विभाग का कहना है कि फर्में फर्जी तरीके से काम कर रही थीं। इसके अलावा नियमित रूप से जीएसटी नहीं भरा जा रहा था। विभाग की तरफ से कंपनियों के मालिकों को समन भी भेजे गए थे, जिसके बाद ही उन्होंने विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखा है और अपने दस्तावेज जमा किए हैं। कंपनियों की ओर से जमा किए दस्तावेजों की भी विभाग जांच कर रहा है।
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असिस्टेंट एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर आरके चौधरी ने बताया कि जांच में सामने आया है कि कंपनियों ने ज्यादातर लेन-देन पंजाब और हिमाचल प्रदेश में की है, जिसके चलते उन्होंने वहां के एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग से जानकारी मांगी जाएगी। उन्होंने बताया कि कंपनियों के मालिकों को समन भी भेजे गए हैं, लेकिन एक कंपनी के प्रोपराइटर ने अपना पक्ष नहीं रखा है, जिन्हें दोबारा समन भेजा गया है।
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इन फर्मों पर मारा गया था छापा
विभाग की ओर से एमएस एसआर एजेंसीज गोबिंदपुरा मनीमाजरा, एमएस ग्लोबल होम साल्यूशंस गोबिंदपुरा मनीमाजरा, एमएम रजत इंटरप्राइजेज ठाकुरद्वारा मनीमाजरा, एमएस पॉलिटेक गोबिंदपुरा मनीमाजरा, एमएस यूरो सेल्स गोबिंदपुरा मनीमाजरा और एमएस अम्बा एजेंसीज गोबिंदपुरा मनीमाजरा पर छापे की कार्रवाई की गई है। ये सभी फर्में पाइप्स और टाइल्स की डील करती हैं। उन्होंने बताया कि राजेश बहल एमएस एसआर एजेंसीज में पार्टनर और एमएस ग्लोबल होम साल्यूशंस का प्रोपराइटर हैं। वहीं, रजत बहल रजत इंटरप्राइजेज, एमएस पॉलिटेक और यूरो सेल्स के प्रोपराइटर हैं, जबकि मोनिका गर्ग अम्बा एजेंसीज की प्रोपराइटर हैं।
एक-दूसरे से जुड़ी हैं फर्में
एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों के अनुसार ये सभी आपस में रिश्तेदार हैं और सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए अवैध रूप से गुड्स एंड सर्विस क्रेडिट लेने में एक-दूसरे के साथ जुड़े हैं। सभी छह फर्मों ने जीएसटी पीरियड के अंदर 61 करोड़ की सेल की, लेकिन सरकार को सिंगल अमाउंट भी टैक्स नहीं दिया, जबकि इनपुट टैक्स क्रेडिट में एडजस्ट किया गया। इसके अलावा सभी फर्में जीएसटीआर-थ्रीबी मंथली टैक्स रिटर्न भी फरवरी 2020 से फाइल नहीं कर रही हैं।