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Chandigarh: हरियाली को चूहों-दीमक से खतरा, पेड़ों की जड़ों पर हमला, चप्पड़चिड़ी के ऐतिहासिक बुर्ज भी हुआ खोखला
Sun, 23 Apr 2023 01:07 PM IST
निवेदिता वर्मा
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 23 Apr 2023 01:07 PM IST
सार
चूहे न केवल पेड़ों की जड़ों को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि इन पुराने पेड़ों के तनों को भी धीरे-धीरे खोखला कर रहे हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ के कई सेक्टरों में चूहों की समस्या इतनी बढ़ चुकी है कि लोगों की घरों की नींव तक खोखली हो रही है।
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चूहे और दीमकों ने खोखले किए पेड़
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ समेत पंचकूला और मोहाली की हरियाली को चूहों और दीमक से खतरा पैदा हो गया है। शहर की जमीन में दीमक की समस्या बहुत पुरानी है, लेकिन अब चूहों ने पेड़ों की जड़ों को खोखला करना शुरू कर दिया है। चूहों ने शहर में लगे हेरिटेज समेत अन्य पुराने पेड़ों की जड़ों में बड़े-बड़े सुराख बना दिए हैं। हालत यह है कि पार्क में लगे पेड़ों की जड़ों से होते हुए चूहे लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं। यह समस्या केवल चंडीगढ़ और पंचकूला की नहीं बल्कि मोहाली के लोग भी चूहों से परेशान हैं।
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मोहाली के ऐतिहासिक स्थल चप्पड़चिड़ी में मिट्टी के बुर्जों को चूहों ने नीचे से खोखला कर दिया है, जिससे इन पर स्थापित भारी-भरकम मूर्तियों को खतरा हो गया है। चंडीगढ़ शहर की सड़कों के किनारे और पार्कों में वर्षों पुराने पेड़ों की जड़ों में चूहों ने इतने बड़े सुराख कर दिए हैं कि तेज हवा चलने पर ये पेड़ कभी भी गिर सकते हैं। हाल ही में सेक्टर-9 स्थित मध्यमार्ग पर एक पेड़ जड़ से उखड़कर गिर गया था, जिसकी चपेट में आने से एक ऑटो चालक की मौत हो गई थी।
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चूहे न केवल पेड़ों की जड़ों को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि इन पुराने पेड़ों के तनों को भी धीरे-धीरे खोखला कर रहे हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ के कई सेक्टरों में चूहों की समस्या इतनी बढ़ चुकी है कि लोगों की घरों की नींव तक खोखली हो रही है। सेक्टर 35 में चूहे पेड़ों से होते हुए लोगों के रसोई घर तक पहुंच रहे हैं। वहीं मोहाली फेस-5 में लोग चूहों से लोग परेशान हैं। स्थानीय पूर्व पार्षद अरुण शर्मा ने बताया कि चूहों ने पेड़़ों की जड़ें खोखली कर दी हैं। इससे पेड़ों के गिरने का खतरा पैदा हो गया है।
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पेड़ों की हेल्थ मैपिंग जरूरी : प्रो. सुमन मोर
पंजाब यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विभाग की प्रोफेसर सुमन मोर का कहना है कि ट्राइसिटी के धरोहर पेड़ों का जड़ों का उखड़ना चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ की जमीन में दीमक के अलावा चूहों की समस्या बढ़ी है। पेड़ों की नियमित रूप से हेल्थ मैपिंग जरूरी है, ताकि पेस्ट नियंत्रण से इन पेड़ों को बचाया जा सके।
पेड़ गिरने से जा चुकी हैं दो जानें
चंडीगढ़ में बीते वर्ष हेरिटेज पेड़ गिरने से दसवीं की छात्रा हीराक्षी की मौत हो गई थी। वहीं हाल ही में सेक्टर-9 मध्यमार्ग पर एक बैटरी वाले ऑटो पर पेड़ गिरने से नयागांव के युवक की मौत हो गई थी। इन मामलों में पेड़ जड़ से उखड़ कर गिरे हैं। बताया जा रहा है कि इन पेड़ों की जड़ों में भी सुराख हो चुके थे। हालांकि पेड़ों का पुराना होना भी इनके अंदर से खोखला होने की बड़ी वजह है।
पेड़ों के नीचे खाद्य पदार्थ डालना भी समस्या को बढ़ा रहा
ट्राइसिटी में पेड़ों की जड़ों में चूहों की समस्या के पीछे लोगों की ओर से खाद्य पदार्थ फेंकना बड़ी वजह है। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि लोग अकसर पार्कों में खाने की चीजें ले जाते हैं और बचे हुए खाद्य पदार्थ को पेड़ों के नीचे फेंक देते हैं, जिसकी वजह से चूहे इनकी ओर आकर्षित होते हैं। यह समस्या पूरे शहर में कई जगह है। इसकी वजह से चूहे पेड़ों के नीचे घर बनाकर सुराख कर लेते हैं।
न अल्ट्रासोनिक मशीन खरीदी, न पेड़ों की सेहत जांची जा रही
चंडीगढ़ में 250 साल पुराना पेड़ गिरने से छात्रा हीराक्षी की मौत के बाद बनी एक सदस्यीय कमेटी ने भी पेड़ों की जांच और सुरक्षा को लेकर कई सुझाव दिए थे। इनमें से कुछ पर काम हुआ है, लेकिन कई पर काम होना बाकी है। पर्यावरण विभाग ने शहर के सभी हेरिटेज पेड़ों के स्वास्थ्य की जांच देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान से अल्ट्रासोनिक मशीन मंगवाकर करवाई थी लेकिन शहर के बाकी पेड़ों की स्थिति जस की तस है। इनमें चूहों और दीमक आदि के नियंत्रण के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। सड़क किनारे पेड़ों की कोई सुध नहीं ली जा रही है। ये पेड़ जहां आम आदमी की जान को भी खतरा बन सकते हैं, वहीं पेड़ों के जड़ों के खराब होने की स्थिति यही रही तो चंडीगढ़ की हरियाली को भी खतरा है।
प्रशासन की कमेटी ने दिए थे ये सुझाव
- एक ग्रीन बिग्रेड का निर्माण किया जाए
- रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी (आरडब्ल्यूए) के सदस्यों को जोड़ा जाए
- परिपक्व पेड़ों का अल्ट्रासोनिक मूल्यांकन हो
- सभी मृत और सूखे पेड़ों का व्यापक सर्वेक्षण किया जाए
- जानमाल का नुकसान बने पेड़ों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाए जाए
- हेरिटेज पेड़ों का नियमित निरीक्षण हो, यूकेलिप्टस के पेड़ों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए