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पीजीआई से चंडीगढ़ एयरपोर्ट तक बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर, 4 जिंदगियां बची
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 21 Mar 2017 09:42 AM IST
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पीजीआई, एम्स और मेदांता के सहयोग से चार को मिली नई जिंदगी
- फोटो : अमर उजाला
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पीजीआई, एम्स और मेदांता के जबरदस्त समन्वय से चार मरीजों को नया जीवन मिला है। पीजीआई ने ब्रेन डेड पेशेंट के लिवर, किडनी और दिल को सुरक्षित निकाला। इसके बाद विशेष विमान की मदद से पहले दिल को गुड़गांव भेजा गया। फिर लिवर को भी विमान से एम्स भेजा गया। पीजीआई की ओर से बताया गया है कि दोनों अंग जरूरतमंद लोगों में ट्रांसप्लांट कर दिया गया है।
पीजीआई के मुताबिक हिमाचल के कांगड़ा जिले का रहने वाला 40 वर्षीय प्रदीप 17 मार्च को खाई में गिर गया था। सिर में गहरी चोट के बाद वह कोमा में चला गया। उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। 18 मार्च को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर ने आर्गन डोनेशन के लिए प्रदीप की पत्नी से बात की और वह राजी हो गईं। उसके बाद पीजीआई ने उन मरीजों को ढूंढना शुरू किया, जिसकी मैचिंग प्रदीप के अंगों से मिल जाए। यहां लिवर और हार्ट की मैचिंग का कोई भी मरीज नहीं मिला। हालांकि किडनी के मरीज पीजीआई में ही मिल गए।
पीजीआई स्थित रीजनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (रोटो) ने हार्ट और लिवर की मैचिंग के पैरामीटर की सूचना नई दिल्ली स्थित नोटो (नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन) को दी। नोटो ने तलाश की तो मेदांता में हार्ट और एम्स में लिवर का पेशेंट मिल गया। मरीज मिलते ही पीजीआई में तैयारी शुरू कर दी गई। मेदांता ने सूचना दी कि वे सुबह अपना विशेष विमान लेकर पहुंच जाएंगे।
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पीजीआई के मुताबिक हिमाचल के कांगड़ा जिले का रहने वाला 40 वर्षीय प्रदीप 17 मार्च को खाई में गिर गया था। सिर में गहरी चोट के बाद वह कोमा में चला गया। उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। 18 मार्च को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर ने आर्गन डोनेशन के लिए प्रदीप की पत्नी से बात की और वह राजी हो गईं। उसके बाद पीजीआई ने उन मरीजों को ढूंढना शुरू किया, जिसकी मैचिंग प्रदीप के अंगों से मिल जाए। यहां लिवर और हार्ट की मैचिंग का कोई भी मरीज नहीं मिला। हालांकि किडनी के मरीज पीजीआई में ही मिल गए।
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पीजीआई स्थित रीजनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (रोटो) ने हार्ट और लिवर की मैचिंग के पैरामीटर की सूचना नई दिल्ली स्थित नोटो (नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन) को दी। नोटो ने तलाश की तो मेदांता में हार्ट और एम्स में लिवर का पेशेंट मिल गया। मरीज मिलते ही पीजीआई में तैयारी शुरू कर दी गई। मेदांता ने सूचना दी कि वे सुबह अपना विशेष विमान लेकर पहुंच जाएंगे।
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20 मिनट में पहुंचे एयरपोर्ट
मेदांता का विमान सुबह करीब छह बजे चंडीगढ़ पहुंच गया और हार्ट को लेकर नई दिल्ली के लिए रवाना हो गया। सुबह के वक्त कोई फ्लाइट नहीं थी, इसलिए मेदांता प्रशासन ने अपना विशेष विमान भेजा था। करीब 11 बजे मेदांता ने हार्ट ट्रांसप्लांट कर दिया।
20 मिनट में पहुंचे एयरपोर्ट
हार्ट को निकालने के बाद लिवर को सुरक्षित निकाला और पीजीआई से लेकर एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। मात्र 20 मिनट में लिवर एयरपोर्ट पहुंच गया और विमान से नई दिल्ली और वहां से एम्स लाया गया। पीजीआई का दावा है कि एम्स ने अपने मरीज में लिवर ट्रांसप्लांट कर दिया है। ग्रीन कॉरिडोर बनाने में चंडीगढ़ प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस ने अहम रोल निभाया।
कई एजेंसियों के मिलजुल कर काम करने से ये सब संभव हो पाया है। प्रदीप के परिजनों की बदौलत चार लोगों को नया जीवन मिल गया है। नोटा, मेदांता और एम्स का भी अहम रोल है, जिन्होंने तुरंत रिस्पांस किया।
- डॉ. विपिन कौशल, नोडल आफिसर रोटो, पीजीआई
20 मिनट में पहुंचे एयरपोर्ट
हार्ट को निकालने के बाद लिवर को सुरक्षित निकाला और पीजीआई से लेकर एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। मात्र 20 मिनट में लिवर एयरपोर्ट पहुंच गया और विमान से नई दिल्ली और वहां से एम्स लाया गया। पीजीआई का दावा है कि एम्स ने अपने मरीज में लिवर ट्रांसप्लांट कर दिया है। ग्रीन कॉरिडोर बनाने में चंडीगढ़ प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस ने अहम रोल निभाया।
कई एजेंसियों के मिलजुल कर काम करने से ये सब संभव हो पाया है। प्रदीप के परिजनों की बदौलत चार लोगों को नया जीवन मिल गया है। नोटा, मेदांता और एम्स का भी अहम रोल है, जिन्होंने तुरंत रिस्पांस किया।
- डॉ. विपिन कौशल, नोडल आफिसर रोटो, पीजीआई