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महान गायक मो. रफी के कब्र में दफन है मेरी कलम और घड़ी : शब्बीर कुमार
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चंडीगढ़। मेरी कलम और घड़ी महान गायक मो. रफी की कब्र में दफन है। यह बात प्रसिद्ध गायक शब्बीर कुमार ने औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित एक निजी होटल में कही। वे रविवार को सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में आयोजित होने वाली संगीत संध्या में स्टार गेस्ट के रूप में शामिल होने पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी दिल की बात कही।
कहा कि उन्होंने मो. रफी साहब के गीत गाकर अपने कॅरिअर की शुरुआत की। वह गुजरात के बड़ौदा के रहनेवाले हैं। बात 1977 की है। अहमदाबाद में रफी साहब का कार्यक्रम था। उस दिन उनके पास मात्र 40 रुपये थे। बड़ौदा से अहमदाबाद के लिए आने-जाने का किराया। शो का टिकट का हिसाब लगाकर चल दिए। 10 रुपये का टिकट लिया। उस समय वहां पर पुलिस वाले आ गए। उन्हें खड़ा होने के लिए कहा। शब्बीर कुमार के दोस्त ने उन्हें धीरे-धीरे आगे ले गए। क्योंकि आर्केस्ट्रा में काम करते हुए कुछ लोग जानने लगे थे। बाद में उस शो में रफी साहब से भी मिले। उस वक्त रफी साहब के चरण में बैठा था। वे मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुस्कुरा रहे थे। उन्होंने मुझसे कहा कि गाना गाओगे। उन्होंने शब्बीर कुमार को कहा कि सब तुम्हारी तारीफ कर रहे हैं। इस पर शब्बीर ने रफी साहब को कहा कि सर आपका गाना गाकर रोटी कमाता हूं। उस वक्त मेरे आंखों से गंगा यमुना बह रही थी।
उन्होंने कहा कि जब रफी साहब की मृत्यु हुई तो मुझे दोस्तों ने बताया। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था। उन्होंने कहा कि उनके जनाजा में शामिल होने के लिए मेरी दो बहनों और मेरे दोस्तों ने मुंबई जाने के लिए पैसे का इंतजाम किए। बारिश हो रही थी। मुंबई के जुहू कब्रिस्तान में भारी भीड़ थी। रफी साहब के जनाजे को उनके परिवार के लोगों ने घेरा बनाया हुआ था। मुझे रफी साफ को छूना था। जैसे ही जनाजे को उठाकर कब्र में डाला जाने लगा तो मैं तेजी से आगे बढ़ा। पुलिस ने डंडा चलाया तो स्टील की चैन वाली मेरी घड़ी और पॉकेट में रखा पेन कब्र में चला गया। रफी साहब एक ही थे।
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शब्बीर कुमार ने कहा कि उनके जैसा गाने वाला न हुआ है न होगा। यह तो अल्लाह का करम है और आप सबकी मोहब्बत है कि मैंने बॉलीवुड संगीत में यह मुकाम हासिल किया है। संगीत के साथ पेंटिंग का भी शौक रहा, मुझे जो आज तक है। जिंदगी ने सब कुछ दिया है, किसी चीज का कोई मलाल नहीं।
पुराने गानों में बहुत मेहनत होती थी :
उन्होंने कहा कि पुराने गानों पर रिमिक्स बनाया जा रहा है। यह ठीक नहीं है, जो मूल है उसे वैसे ही रहने दिया जाए। 10 साल में बदलाव तो होता ही है। नए गाने तुरंत बन रहे हैं। तुरंत कंपोज हुए मार्केट में आया और चल गया। पहले जैसे शायर भी नहीं रहे। कंपोजर बहुत मेहनत करते थे। गीत के समय कहां पर कितना सांस लेना है, यह सब रिकार्डिंग से पहले ही तय हो जाता था। नए कलाकारों के बारे में शब्बीर कुमार ने कहा कि मेहनत करते जाइये। हिम्मत नहीं हारना है। कोशिश करते रहना है। मुकद्दर में है तो मिलकर रहेगा। उन्होंने कहा कि पहले में आर्केस्ट्रा में काम करता था। नियमित आमदनी नहीं थी। मुंबई से कोई ताल्लुकात नहीं था। शुरुआती दौर में एक शो के 40 रुपये मिलते थे।
वाइब्रेशन समूह की ओर से होगा 14वीं वार्षिक संगीतमय शाम का आयोजन :
वाइब्रेशन ग्रुप की ओर से रविवार को आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम द लीजेंड्स का हिस्सा बनने के लिए शब्बीर कुमार चंडीगढ़ पहुंचे हैं। शहर में बीते कई सालों से सामाजिक कार्यों में अपना योगदान दे रही वाइब्रेशन संस्था रविवार को टैगोर थिएटर में 14वीं वार्षिक संगीतमयी शाम का आयोजन करेगी। इसमें शहरवासियों को पुराने जमाने के यादगार हिट फिल्मी गीतों का लुत्फ उठाने का मौका मिलेगा। वाइब्रेशन से जुड़े जगन बैंस ने बताया कि हर साल वे अपने माता-पिता गुरचरण कौर और हरि भगत बैंस की याद में यह कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इस अवसर पर गायक नरेश जैकब ने बताया कि संगीत की दुनिया में नए एवं उभरते कलाकारों को हुनर को पेश करने का मंच देने के लिए टैगोर थिएटर में कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हरविंदर कल्याण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे।
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कहा कि उन्होंने मो. रफी साहब के गीत गाकर अपने कॅरिअर की शुरुआत की। वह गुजरात के बड़ौदा के रहनेवाले हैं। बात 1977 की है। अहमदाबाद में रफी साहब का कार्यक्रम था। उस दिन उनके पास मात्र 40 रुपये थे। बड़ौदा से अहमदाबाद के लिए आने-जाने का किराया। शो का टिकट का हिसाब लगाकर चल दिए। 10 रुपये का टिकट लिया। उस समय वहां पर पुलिस वाले आ गए। उन्हें खड़ा होने के लिए कहा। शब्बीर कुमार के दोस्त ने उन्हें धीरे-धीरे आगे ले गए। क्योंकि आर्केस्ट्रा में काम करते हुए कुछ लोग जानने लगे थे। बाद में उस शो में रफी साहब से भी मिले। उस वक्त रफी साहब के चरण में बैठा था। वे मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुस्कुरा रहे थे। उन्होंने मुझसे कहा कि गाना गाओगे। उन्होंने शब्बीर कुमार को कहा कि सब तुम्हारी तारीफ कर रहे हैं। इस पर शब्बीर ने रफी साहब को कहा कि सर आपका गाना गाकर रोटी कमाता हूं। उस वक्त मेरे आंखों से गंगा यमुना बह रही थी।
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उन्होंने कहा कि जब रफी साहब की मृत्यु हुई तो मुझे दोस्तों ने बताया। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था। उन्होंने कहा कि उनके जनाजा में शामिल होने के लिए मेरी दो बहनों और मेरे दोस्तों ने मुंबई जाने के लिए पैसे का इंतजाम किए। बारिश हो रही थी। मुंबई के जुहू कब्रिस्तान में भारी भीड़ थी। रफी साहब के जनाजे को उनके परिवार के लोगों ने घेरा बनाया हुआ था। मुझे रफी साफ को छूना था। जैसे ही जनाजे को उठाकर कब्र में डाला जाने लगा तो मैं तेजी से आगे बढ़ा। पुलिस ने डंडा चलाया तो स्टील की चैन वाली मेरी घड़ी और पॉकेट में रखा पेन कब्र में चला गया। रफी साहब एक ही थे।
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शब्बीर कुमार ने कहा कि उनके जैसा गाने वाला न हुआ है न होगा। यह तो अल्लाह का करम है और आप सबकी मोहब्बत है कि मैंने बॉलीवुड संगीत में यह मुकाम हासिल किया है। संगीत के साथ पेंटिंग का भी शौक रहा, मुझे जो आज तक है। जिंदगी ने सब कुछ दिया है, किसी चीज का कोई मलाल नहीं।
पुराने गानों में बहुत मेहनत होती थी :
उन्होंने कहा कि पुराने गानों पर रिमिक्स बनाया जा रहा है। यह ठीक नहीं है, जो मूल है उसे वैसे ही रहने दिया जाए। 10 साल में बदलाव तो होता ही है। नए गाने तुरंत बन रहे हैं। तुरंत कंपोज हुए मार्केट में आया और चल गया। पहले जैसे शायर भी नहीं रहे। कंपोजर बहुत मेहनत करते थे। गीत के समय कहां पर कितना सांस लेना है, यह सब रिकार्डिंग से पहले ही तय हो जाता था। नए कलाकारों के बारे में शब्बीर कुमार ने कहा कि मेहनत करते जाइये। हिम्मत नहीं हारना है। कोशिश करते रहना है। मुकद्दर में है तो मिलकर रहेगा। उन्होंने कहा कि पहले में आर्केस्ट्रा में काम करता था। नियमित आमदनी नहीं थी। मुंबई से कोई ताल्लुकात नहीं था। शुरुआती दौर में एक शो के 40 रुपये मिलते थे।
वाइब्रेशन समूह की ओर से होगा 14वीं वार्षिक संगीतमय शाम का आयोजन :
वाइब्रेशन ग्रुप की ओर से रविवार को आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम द लीजेंड्स का हिस्सा बनने के लिए शब्बीर कुमार चंडीगढ़ पहुंचे हैं। शहर में बीते कई सालों से सामाजिक कार्यों में अपना योगदान दे रही वाइब्रेशन संस्था रविवार को टैगोर थिएटर में 14वीं वार्षिक संगीतमयी शाम का आयोजन करेगी। इसमें शहरवासियों को पुराने जमाने के यादगार हिट फिल्मी गीतों का लुत्फ उठाने का मौका मिलेगा। वाइब्रेशन से जुड़े जगन बैंस ने बताया कि हर साल वे अपने माता-पिता गुरचरण कौर और हरि भगत बैंस की याद में यह कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इस अवसर पर गायक नरेश जैकब ने बताया कि संगीत की दुनिया में नए एवं उभरते कलाकारों को हुनर को पेश करने का मंच देने के लिए टैगोर थिएटर में कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हरविंदर कल्याण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे।