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सरकार ने पीजीआईएमएस की खरीद शक्ति को छीना
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Mon, 14 Nov 2016 03:39 PM IST
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प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) की खरीद-फरोख्त की शक्ति को छीन लिया है। अब पीजीआईएमएस के अधिकारी एक साथ किसी भी विभाग की करोड़ों रुपये की दवा और मशीनरी अपने स्तर पर नहीं खरीद सकेंगे।
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दवाओं और मशीनरी की खरीद का अधिकार हरियाणा मेडिकल सर्विस कारपोरेशन लिमिटेड को देने की घोषणा हो सकती है। यदि किसी वजह से यह अधिकार हेल्थ यूनिवर्सिटी को मिलता भी है तो इसका अलग-अलग विभागों में बंटना भी तय है।
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सूत्रों के अनुसार पीजीआईएमएस अब तक तकरीबन 400 करोड़ रुपये के अपने सालाना बजट का प्रयोग अपने स्तर पर करता था। इसमें उसे 20 लाख रुपये तक खरीद की पावर एसी और ईसी की बैठक में प्रस्ताव पास करने के बाद फाइनेंस विभाग की मंजूरी के बाद पीजीआईएमएस के पास थी।
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कांग्रेस के शासन काल में इससे ऊपर की खरीद के लिए एचएलएल से मशीन मंगाई जाती थी। मामले में संस्थान के कुछ चयनित अधिकारी ही सीधे जुड़ते थे। कई विभागों का आरोप था कि पूरी प्रक्रिया में उन्हें नजरअंदाज किया जाता है। यह भी आरोप लगता था कि अधिकारी साठगांठ न होने तक खरीद नहीं होने देते थे।
जिन विभागों के अधिकारी शीर्ष पदों पर होते थे, उन्हीं की अधिक मशीनें आती थीं। चर्चा यह भी है कि हेल्थ विवि, मेडिकल कालेज, एसआईएमएच और पीजीआईडीएस का अलग-अलग बजट आएगा। इसमें कोई शाखा दूसरी शाखा के बजट में हस्तक्षेप नहीं कर सकेगी।
जबकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि अब तक स्वास्थ्य विभाग के लिए दवाओं और मशीनरी की खरीद करने वाला हरियाणा मेडिकल सर्विस कारपोरेशन लिमिटेड ही पीजीआईएमएस की भी जरूरतों को पूरा करेगा।
इसकी कमान स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और एमडी डॉ. अमित अग्रवाल के पास रहेगी। माना जा रहा है कि विभिन्न खरीदों में उठ रहे सवालों के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है। इस तरह स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीजीआईएमएस के डॉक्टरों को सिर्फ डाक्टरी करने तक ही सीमित कर दिया है।