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आरटीआई में खुलासा: सरकार के पास भारत-पाक विभाजन में मृतकों और विस्थापितों का ब्यौरा नहीं

Wed, 20 Oct 2021 07:46 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 20 Oct 2021 07:46 PM IST
सार

पानीपत के आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने तीन साल पहले एक आरटीआई लगाई थी। आठ सूत्री आरटीआई में उन्होंने विभाजन के दौरान मृतकों और विस्थापितों सहित कुछ अहम जानकारियां मांगी थी। लेकिन उन्हें केंद्र की ओर से यह जानकारियां नहीं मिल सकी।
 

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Government does not have details of dead and displaced in Indo-Pak partition
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

1947 में भारत-पाक के हुए विभाजन में मृतकों और विस्थापितों का केंद्र सरकार के पास कोई ब्यौरा नहीं है। मृतकों के आश्रितों को क्या आर्थिक सहायता दी गई व विभाजन के फैसले पर हस्ताक्षर करने वाले तत्कालीन भारतीय व ब्रिटिश नेताओं के नामों व संबंधित दस्तावेजों की भी कोई जानकारी नहीं है। यह खुलासा पानीपत के आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर द्वारा लगाई गई एक आरटीआई में हुआ है।

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कपूर ने बताया कि विभाजन के वक्त उनके परिजनों को इसाखेल, जिला मियांवाली (पाकिस्तान) से पानीपत आना पड़ा। विभाजन की इस पीड़ा के सच को जानने के लिए उन्होंने तीन वर्ष पूर्व 29 अक्टूबर, 2018 को केंद्रीय गृह मंत्रालय में आठ सूत्री आरटीआई लगाई थी। इस पर गृह मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के जन सूचना अधिकारी व प्रथम अपीलीय अधिकारी ने अपने जवाबों में कोई भी जानकारी होने से मना कर दिया।
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कपूर ने 15 मई 2019 को केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील भेज कर सूचनाएं दिलवाने की गुहार लगाई। इस पर केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त वाईके सिन्हा ने 18 अक्टूबर 2021 को इस केस का निपटारा करते हुए फैसला दिया कि सरकार के पास ऐसी कोई सूचना न होने के बारे में जन सूचना अधिकारी सूचित कर चुके हैं।
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आयोग इस केस में आगे कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कपूर ने विभाजन के शिकार हुए दोनों ओर के सभी लोगों का ब्यौरा रखने, मृतकों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने की मांग की है।

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