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सरकार का दावा: खेती-किसानी में पंजाब से आगे हरियाणा, कृषि विकास दर तिगुनी, किसानों को सुविधाएं भी अधिक

Fri, 03 Sep 2021 09:55 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 03 Sep 2021 09:55 AM IST
सार

हरियाणा सरकार का दावा है कि प्रदेश पंजाब के मुकाबले खेती-किसानी में बहुत आगे है। कृषि से जुड़ी सरकारी योजनाओं के मामले में भी पड़ोसी राज्य पिछड़ चुका है। हरियाणा सकार 11 फसलों को एमएसपी पर खरीदती है, जबकि पंजाब सरकार महज तीन फसलों को ही खरीद रही है। 

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Government claims Haryana ahead of Punjab in agriculture sector
सीएम मनोहर लाल - फोटो : फाइल

विस्तार

हरियाणा बीते सात सालों में किसानी और सरकारी योजनाओं के क्षेत्र में पड़ोसी राज्य पंजाब से कहीं आगे है। हरियाणा की कृषि विकास दर पंजाब से तिगुनी है। मनोहर लाल सरकार ने अपने सात साल के कार्यकाल में फल-सब्जियों और 11 फसलों को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाकर खरीदा है। प्रदेश सरकार ने गुरुवार को आंकड़े जारी करते हुए यह दावा किया है।

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प्रदेश के कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा के कृषि के मामले में प्रगति का बड़ा आधार राज्य सरकार की कृषि नीतियां हैं। पंजाब का कुल क्षेत्रफल व कृषि योग्य भूमि बेशक हरियाणा से कहीं ज्यादा है। हरियाणा के एमएसपी पर फसलें खरीदने के मुकाबले पंजाब नजदीक भी नहीं ठहरता। 
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कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में गहन जानकारी रखने वालों के अनुसार सात वर्षों के दौरान पंजाब से किसानी-व्यवसाय के क्षेत्र में प्रदेश चार कदम आगे जा चुका है। हरियाणा का कुल क्षेत्रफल जहां 44,212 वर्ग किलोमीटर है, वहीं पंजाब का क्षेत्रफल 50,362 वर्ग किलोमीटर है। हरियाणा की कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल 37.41 लाख हेक्टेयर व पंजाब का 42 लाख हेक्टेयर है।
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कृषि विकास दर हरियाणा की 6.3 फीसदी व पंजाब की मात्र 2.1 फीसदी है। गन्ना उत्पादक किसानों के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश में 11 चीनी-मिलें स्थापित की हैं, दूसरी तरफ पंजाब में कहने को तो चीनी-मिलों की कुल संख्या 15 है लेकिन चालू हालत में मात्र नौ मिल हैं। 

हरियाणा में 11 फसलें गेहूं, जौ, चना, सूरजमुखी, सरसों, धान, मूंग, मक्का, बाजरा, कपास व मूंगफली को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है, पंजाब में मात्र तीन फसलें गेहूं, धान व सूरजमुखी ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाती है। प्रदेश में 21 प्रकार के फलों व सब्जियों के संरक्षित भाव निर्धारित करने के लिए ‘भावांतर भरपाई योजना’ है। पंजाब में ऐसी कोई योजना नहीं। मनोहर लाल ने फल व सब्जियों के उत्पादकों के लिए ‘मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना’ की शुरुआत की है, पंजाब में ऐसी कोई योजना आज तक शुरू नहीं हो पाई है।


हरियाणा का दावा पंजाब इन योजनाओं में भी पीछे

  • प्रदेश की 81 मंडियों को ई-नाम पोर्टल से जोड़ा, पंजाब की मात्र 37 मंडियों इस पोर्टल से जुड़ी
  • प्रदेश में 76 जल एवं मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं, पंजाब में मात्र 61 प्रयोगशालाएं ही शुरू
  • मंडियों में आने वाले किसान, कार्य करने वाले आढ़तियों को 10 लाख रुपये का बीमा कवर, पंजाब में ऐसी कोई योजना नहीं
  • मंडियों में 10 रुपये में भरपेट भोजन के लिए कैंटीन खोली, पंजाब में ऐसी कोई सुविधा नहीं
  • पशुधन क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 58 हजार कार्ड जारी, पंजाब योजना को शुरू ही नहीं कर पाया
  • ड्रिप-सिंचाई योजना के लिए रिकॉर्ड 85 प्रतिशत तक अनुदान, पंजाब में 80 प्रतिशत तक ही अनुदान
  • करीब 17 लाख किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा के 4,000 करोड़ रुपये मिले, 34 लाख से अधिक किसानों को 7,000 करोड़ रुपये की राशि अन्य नुकसान के भरपाई के एवज में दी, पंजाब ने कोई फसल-बीमा योजना शुरू नहीं की
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