फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Positive News : People donating Organs to help others in Lockdown in Chandigarh  

लॉकडाउन में मिली नई जिंदगी, किसी में लगा दूसरे का लिवर, किसी के सीने में धड़क रहा 'पराया' दिल

Thu, 10 Dec 2020 05:19 PM IST
निवेदिता शर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता शर्मा Updated Thu, 10 Dec 2020 05:19 PM IST
विज्ञापन
Positive News : People donating Organs to help others in Lockdown in Chandigarh  
चंडीगढ़ में अपने परिवार के साथ कृष्णा। - फोटो : अमर उजाला
ऐसे लोग, जिन्हें अंगदान से दूसरा जीवन मिला है, वे अब दूसरों को इसके लिए जागरूक करने में जुटे हैं। किसी अजनबी से मिले अनमोल उपहार को पाकर उस मरीज के साथ ही उसका परिवार ईश्वर और अंगदाता परिवार का हर पल धन्यवाद कर रहा है। इन परिवारों का कहना है कि लोगों को दुनिया से जाने के बाद भी कुछ ऐसा करके जाना चाहिए जिससे वे हमेशा के लिए अमर हो जाए और इसके लिए अंगदान से बड़ा कुछ नहीं है। 
विज्ञापन


13 साल के कृष्णा के सीने में धड़कता है एक अजनबी का दिल
चंडीगढ़ निवासी कृष्णा ने 8 दिसंबर को अपना 13वां जन्मदिन मनाया। उसके सीने में दिल तो धड़क रहा था, लेकिन दिल किसका है, यह न तो उसे पता है, न ही उसके माता-पिता को। कृष्णा को अंगदान से मिले दिल से नवजीवन मिला है। कृष्णा के पिता भूपेंद्र का कहना है कि किसी अजनबी ने अपने परिजन का अंगदान कर उनके बेटे को नव जीवन दिया है। इसलिए वह और उनका परिवार भी अंगदान कर दुनिया से जाने के बाद भी किसी की अंधेरी दुनिया में रोशनी फैलाने का काम करेंगे। भूपेंद्र ने बताया कि कृष्णा को जनवरी 2020 में परेशानी शुरू हुई। डॉक्टर को दिखाने पर पता चला कि उसका दिल बहुत कमजोर है। ट्रांसप्लांट से उसे बचाया जा सकता है। कोविड के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उसे पीजीआई में भर्ती करवाना पड़ा। लॉकडाउन के दौरान 24 जुलाई को उसका सफल हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ। 
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन


लिवर ट्रांसप्लांट से 56 साल के अंजन मेहता को मिला नया जीवन

हिमाचल निवासी 56 साल के अंजन मेहता की पीजीआई में लिवर ट्रांसप्लांट के बाद जान बचाई गई। अंजन मेहता के बेटे डॉक्टर निखिल ने बताया कि अचानक उनके पिता की तबीयत खराब हुई तो हिमाचल में डॉक्टर को दिखाया गया। डॉक्टर ने बताया कि उनका लिवर खराब हो चुका है, तत्काल ट्रांसप्लांट कराना होगा। इसके बाद उन्होंने पीजीआई में डॉक्टर को दिखाने के बाद अंगदान की प्रतीक्षा सूची में अपने पिता का पंजीकरण कराया।  डॉक्टर निखिल ने बताया कि ब्रेन डेड मरीज के लिवर को उनके पिता को 26 जून 2016 में ट्रांसप्लांट किया गया। इसके बाद उन्हें नया जीवन मिला और उनके पिता पूरी तरह ठीक है। डॉ. निखिल मौजूदा समय में पीजीआई के ही फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि अंगदान से जुड़ी हुई रूढ़िवादी बातों को दरकिनार कर लोगों को इसे सफल बनाने के लिए आगे आने की जरूरत है। 

मौत के बाद ये अंग किए जा सकते हैं दान

डॉक्टरों के मुताबिक मौत के बाद अंगदान करके एक व्यक्ति कम से कम आठ लोगों की जान बचा सकता है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सभी अंग डोनेट किए जा सकते हैं। इसके लिए परिजनों की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। ब्रेन डेड मरीज की किडनी, लीवर, फेफड़ा, पैंक्रियाज, छोटी आंत, वॉयस बॉक्स, हाथ, यूट्रस, ओवरी, फेस, आंखें, मिडिल ईयर बोन, स्किन, बोन, कार्टिलेज, तंतु, धमनी व शिराएं, कॉर्निया, हार्ट वाल्व, नर्व्स, अंगुलियां और अंगूठे दान किए जा सकते हैं। 

कौन कर सकता है अंगदान
डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति भी अंगदान कर सकता है। कैंसर और एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति, सेप्सिस या इन्ट्रावेनस दवाओं का इस्तेमाल करने वाले अंगदान नहीं कर सकते।

अंगदान में बाधाएं
  • सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौत के मामले में नियम के अनुसार, केवल उन्हीं के अंग निकाले जा सकते हैं, जिनकी मृत्यु अस्पताल में होती है। इसके परिणामस्वरूप मौके पर मरने वाले व्यक्ति के परिजन अंगों को दान करने में असमर्थ हैं।
  • एक अन्य प्रमुख कारण यह है कि बहुत से लोग अपने जीवनकाल में अपने अंगों को दान करने की इच्छा (निधन होने पर अंगों को दान करने के लिए पंजीकृत कराना) ही नहीं करते हैं।
  • जागरूकता की कमी।
  • धार्मिक मान्यताओं के प्रति विश्वास और गलत धारणाएं भी व्यक्तियों को अंगदान करने से बाधित करती हैं।
  • जीवित रहते हुए दान किए जाने वाले अंग
  • यकृत (लीवर), गुर्दा (किडनी), फेफड़े, अग्नाशय, आंत।

इनको है अंगदान का इंतजार
  • अंग       मरीजों की वेटिंग लिस्ट
  • किडनी         1980
  • लिवर             52
  • पैंक्रियाज        21
  • हृदय              1
  • कॉर्निया         2654

ऐसे बन सकते हैं अंगदाता
इसके लिए नोटो और रोटो की वेबसाइट पर दिए गए फॉर्म नंबर 7 को ऑनलाइन भरके अपना पंजीकरण कराया जा सकता है । इसके अलावा पीजीआई में बनाए गए रोटो के ऑफिस से भी फॉर्म नंबर 7 प्राप्त कर उसे भरा जा सकता है। फॉर्म भर के जमा करने के बाद पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। जिसके बाद पंजीकरण कार्ड प्राप्त किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed