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खबर का असरः कैंसर के मरीजों को बड़ी राहत, 85 फीसदी तक कम होंगे दवाओं के रेट

Sat, 02 Mar 2019 04:59 PM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 02 Mar 2019 04:59 PM IST
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Good news for cancer patients, 42 cancer drugs to be cheaper by 85 percent
सांकेतिक तस्वीर

सरकार ने आखिरकार कैंसर मरीजों की सुध ले ली है। बीते जनवरी माह में अमर उजाला ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। जिसमें बताया गया था कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं की कीमत लागत से कई गुना ज्यादा प्रिंट होती है। कई दवाओं की एमआरपी तो (अधिकतम खुदरा मूल्य) लागत से 90 फीसदी ज्यादा है।

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ऐसे में ग्राहकों को लूटा जा रहा है। इस खबर के साथ दस दवाओं की एक लिस्ट भी प्रकाशित की गई थी। जिसमें उसकी एमआरपी और बाजार में जिस कीमत पर वह दवा मिल रही, उसकी भी सूची शामिल की गई थी। अब करीब एक महीने बाद सरकार ने कैंसर की कुल 42 नॉन शेड्यूल्ड दवाओं को प्राइस कंट्रोल के तहत लाने का फैसला लिया है। 
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सरकार ने इन दवाओं के ट्रेड मार्जिन 30 पर्सेंट तक सीमित कर दिए हैं। जिसके बाद ये दवाएं 85 प्रतिशत तक सस्ती हो जाएंगी। डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स ने इसके लिए 27 फरवरी को एक नोटिफिकेशन भी जारी किया है। इन 42 दवाओं में वह चार दवाएं भी शामिल हैं, जिन्हें अमर उजाला की ओर से प्रकाशित किया गया था। 
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इससे मरीजों को बड़ी राहत मिल जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि नोटिफिकेशन लागू होने के बाद करीब 105 ब्रांड के दवाओं के रेट 85 प्रतिशत तक घट जाएंगे। नई कीमतें आठ मार्च से लागू हो जाएंगी।

ऐसे समझिए कैंसर की दवाओं में एमआरपी का खेल

Good news for cancer patients, 42 cancer drugs to be cheaper by 85 percent
सांकेतिक तस्वीर

कीमोथैरेपी के दौरान इस्तेमाल होने वाली एंटी कैंसर ड्रग बोटीजोमिब पर एमआरपी 12 हजार प्रिंट है, जबकि बाजार में यह दवा मात्र 1500 से तीन हजार में उपलब्ध है। पीजीआई के आसपास दुकानों में तो फिलहाल इस रेट पर दवा मिल जाती है, लेकिन जो मरीज प्राइवेट हास्पिटल में इलाज कराते हैं या किसी दूसरे शहर में उन्हें एमआरपी पर ही दवा मिलती है। 

यानि जो दवा 1500 से तीन हजार में मिल जानी चाहिए थी, वह मरीजों को कई गुना महंगी मिलती है। इसी तरह से ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में उपयोग आने वाली दवा ट्रस्ट्यूज्यूमेब की 440 एमजी की डोज का एमआरपी 60 हजार है, लेकिन जब मरीज खरीदते हैं तो उन्हें यह दवा अलग-अलग ब्रांड की 20-30 हजार में मिलती है।

 कीमोथैरेपी में इस्तेमाल की जाने वाली फिलग्रेस्टिम की एमआरपी 12 सौ से 1500 रुपये है, जबकि बाजार में इसका मूल्य 300 रुपये है। जब इतना अंतर होगा तो घपलेबाजी तो तय है।

पीएमओ और एनपीपीए तक पहुंची थी बात

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सांकेतिक तस्वीर

अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद भाजपा के मेडिकल सेल के प्रेसिडेंट प्रिंस भंढुला ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय दवा मूल्य नियात्मक (एनपीपीए) दफ्तर में पत्र भेजा। वहां से करीब दस दिन बाद जवाब आया कि इस संबंध में विचार चल रहा है।

जल्द ही कई दवाओं के रेट नियंत्रित किए जाएंगे। इस लेटर के करीब 20 दिन बाद सरकार ने 42 दवाओं के रेट नियंत्रित कर दिए हैं। इस संबंध में प्रिंस भंढुला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनपीपीए को धन्यवाद दिया है कि उन्होंने गरीब मरीजों की बात सुनी।

इन दवाओं की लिस्ट प्रकाशित की गई थी 23 जनवरी को
क्रमांक       दवा                                 एमआरपी             बाजार में
1.          पैक्लीटैक्सेल   (260 एमजी)      9 हजार              दो से ढाई हजार 
2.         डोकिटैक्सेल   (120 एमजी)      12 हजार            ढाई से तीन हजार
3.         जेमीसेटाबाइन  (एक ग्राम)         छह हजार            छह सौ से ढाई हजार
4.         बोटीजोमिब    (दो एमजी)         12 हजार            1500 से तीन हजार 
5.         ट्रस्ट्यूज्यूमेब   (440 एमजी)       60 हजार            20-28 हजार 
6.         बीवेकिजूमेब   (400एमजी)        40 हजार            20-25 हजार
7.         पेगफिलग्रास्टिम     --             12-17 हजार       दो से तीन हजार
8.         फिलग्रास्टिम       --              12 से 1500        तीन सौ रुपये
9.         कैप्सिटाबाइन      --              1250 रुपये        300 से 500 रुपये
10.       जोलेड्रोनिक एसिड                2000-2800        600 रुपये

नोट : इनमें एक नंबर, चार नंबर, छह नंबर और सात नंबर वाली दवाइयों के रेट आठ मार्च से करीब 85 फीसदी तक कम हो जाएंगे। 

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