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पीयू का अच्छा फैसला.. क्रिक कॉरिडोर में निजी शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ाने की तैयारी
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी क्रिक कॉरिडोर के जरिए और निजी शिक्षण संस्थानों को जोड़ने की तैयारी कर रहा है। नए साल में 25 से अधिक शिक्षण संस्थान और जुड़ेंगे और इन संस्थानों के 20 हजार से अधिक विद्यार्थी दूसरे शिक्षण संस्थानों में जाकर संसाधनों का प्रयोग कर सकेंगे। पीयू की इस पहल की प्रशंसा हो रही है, क्योंकि हर शिक्षण संस्थान में हर सुविधा नहीं है। इस प्रयास के जरिए संसाधनों का प्रयोग हो सकेगा।
लाइब्रेरी, प्रयोगशालाएं व उपकरणों का लाभ उठा पाएंगे
क्रिक कॉरिडोर से लगभग 30 शिक्षण संस्थान जुड़े हैं। इसमें कुछ निजी संस्थान भी शामिल हैं। अब इन संस्थानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। जुड़ने वाले शिक्षण संस्थानों से कुछ शुल्क लिया जा सकता है, लेकिन वह न के बराबर ही होगा। विद्यार्थी जैसे ही जुड़ेंगे तो वह एक-दूसरे शिक्षण संस्थानों में जाकर पुस्तकालय, प्रयोगशाला, उपकरणों को लाभ उठा पाएंगे। रिसर्च पेपर भी वह पढ़ सकेंगे। गाइड आदि भी शिक्षकों के जरिये मिल सकेगी।
बढ़ाई जा सकती है बसों की भी संख्या
क्रिक कॉरिडोर की स्थापना के समय ही एक बस खरीदी गई थी। उस बस के जरिए विद्यार्थी दूसरे शिक्षण संस्थानों में जाते थे। एक बस पर्याप्त नहीं होने के कारण अब इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा संसाधनों के प्रयोग के लिए जाने वाले शुल्क पर भी विचार किया जा रहा है। यह शुल्क शिक्षण संस्थानों से ही लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि क्रिक के संचालन के लिए नई व्यवस्था भी लागू हो सकती है। इस पर जनवरी में विचार किया जाएगा।
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ऐसे रखी थी क्रिक की नींव
चंडीगढ़ रीजन इनोवेशन एंड नॉलेज क्लस्टर यानी क्रिक कॉरिडोर की स्थापना पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर के समय में हुई थी। पीयू ने बड़े-बड़े शिक्षण संस्थानों को इस कॉरिडोर में शामिल किया। उसका लाभ भी मिल रहा है। इन शिक्षण संस्थानों के 60 हजार से अधिक विद्यार्थी एक-दूसरे कॉलेजों में जाकर ज्ञान लेते रहे हैं। साथ ही संसाधनों का प्रयोग भी किए हैं। इस कॉरिडोर का उद्देश्य है कि जिन संस्थानों में कम संसाधन हैं, वहां के विद्यार्थी भी दूसरे कॉलेजों में जाकर संसाधनों का प्रयोग करें और नया ज्ञान ग्रहण करेंगे। अब शिक्षण संस्थान इस कॉरिडोर से और जोड़े जा रहे हैं। अब और निजी क्षेत्र के संस्थानों को बुलावा दिया जाएगा।
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लाइब्रेरी, प्रयोगशालाएं व उपकरणों का लाभ उठा पाएंगे
क्रिक कॉरिडोर से लगभग 30 शिक्षण संस्थान जुड़े हैं। इसमें कुछ निजी संस्थान भी शामिल हैं। अब इन संस्थानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। जुड़ने वाले शिक्षण संस्थानों से कुछ शुल्क लिया जा सकता है, लेकिन वह न के बराबर ही होगा। विद्यार्थी जैसे ही जुड़ेंगे तो वह एक-दूसरे शिक्षण संस्थानों में जाकर पुस्तकालय, प्रयोगशाला, उपकरणों को लाभ उठा पाएंगे। रिसर्च पेपर भी वह पढ़ सकेंगे। गाइड आदि भी शिक्षकों के जरिये मिल सकेगी।
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बढ़ाई जा सकती है बसों की भी संख्या
क्रिक कॉरिडोर की स्थापना के समय ही एक बस खरीदी गई थी। उस बस के जरिए विद्यार्थी दूसरे शिक्षण संस्थानों में जाते थे। एक बस पर्याप्त नहीं होने के कारण अब इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा संसाधनों के प्रयोग के लिए जाने वाले शुल्क पर भी विचार किया जा रहा है। यह शुल्क शिक्षण संस्थानों से ही लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि क्रिक के संचालन के लिए नई व्यवस्था भी लागू हो सकती है। इस पर जनवरी में विचार किया जाएगा।
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ऐसे रखी थी क्रिक की नींव
चंडीगढ़ रीजन इनोवेशन एंड नॉलेज क्लस्टर यानी क्रिक कॉरिडोर की स्थापना पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर के समय में हुई थी। पीयू ने बड़े-बड़े शिक्षण संस्थानों को इस कॉरिडोर में शामिल किया। उसका लाभ भी मिल रहा है। इन शिक्षण संस्थानों के 60 हजार से अधिक विद्यार्थी एक-दूसरे कॉलेजों में जाकर ज्ञान लेते रहे हैं। साथ ही संसाधनों का प्रयोग भी किए हैं। इस कॉरिडोर का उद्देश्य है कि जिन संस्थानों में कम संसाधन हैं, वहां के विद्यार्थी भी दूसरे कॉलेजों में जाकर संसाधनों का प्रयोग करें और नया ज्ञान ग्रहण करेंगे। अब शिक्षण संस्थान इस कॉरिडोर से और जोड़े जा रहे हैं। अब और निजी क्षेत्र के संस्थानों को बुलावा दिया जाएगा।