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मांग : गोल्डन चांस यूजीसी निर्देशों के अनुसार ही दिए जाएं
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट ने वर्ष 2012 में एक बार के लिए विद्यार्थी को डिग्री पूरी करने के लिए गोल्डन चांस का मौका दिया। यह मौका डिग्री पूरी करने के तय समय के बाद दिया गया था, इस दौरान शर्त रखी गई कि विद्यार्थी डिग्री का कहीं नौकरी के लिए इस्तेमाल नहीं करेगा। किसी कारणवश छात्र की डिग्री पूरी नहीं होने के कारण उसे शौक के तौर पर डिग्री पूरी करने का एक मौका दिया गया था। वहीं उसके बाद से पीयू में गोल्डन चांस का यह मौका बंद ही नहीं किया गया, इसे लेकर पीयू सीनेट बैठक में सवाल उठाए गए और इसे बंद करने की मांग करते कहा गया कि इस बारे में शिकायत होने पर पीयू को कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
पीयू सीनेटर दिनेश कुमार ने सीनेट बैठक में मुद्दा उठाया कि पीयू को यूजीसी के तय मानकों के अनुसार ही डिग्री पूरी करने के लिए गोल्डन चांस देने चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि विद्यार्थी के आग्रह पर तय समय के बाद भी उसे पेपर पास करने का मौका दिया जा रहा हो। जैसे कि एलएलएम एक वर्ष के कोर्स को पास करने के लिए अधिकतम तीन साल का समय मिलता है, लेकिन विद्यार्थी तीन साल के बाद भी गोल्डन चांस की मांग कर रहे हैं। ऐसे में एलएलम की डिग्री प्राप्त विद्यार्थी अगर कहीं नौकरी के लिए आवेदन करता है तो पीयू कानूनी पेच में फंस सकती है और डिग्री पर प्रश्नचिह्न लग सकता है, इसलिए इस प्रक्रिया को बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि तय समय पूरा होने के बाद डिग्री वैध नहीं रहती है।
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पीयू सीनेटर दिनेश कुमार ने सीनेट बैठक में मुद्दा उठाया कि पीयू को यूजीसी के तय मानकों के अनुसार ही डिग्री पूरी करने के लिए गोल्डन चांस देने चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि विद्यार्थी के आग्रह पर तय समय के बाद भी उसे पेपर पास करने का मौका दिया जा रहा हो। जैसे कि एलएलएम एक वर्ष के कोर्स को पास करने के लिए अधिकतम तीन साल का समय मिलता है, लेकिन विद्यार्थी तीन साल के बाद भी गोल्डन चांस की मांग कर रहे हैं। ऐसे में एलएलम की डिग्री प्राप्त विद्यार्थी अगर कहीं नौकरी के लिए आवेदन करता है तो पीयू कानूनी पेच में फंस सकती है और डिग्री पर प्रश्नचिह्न लग सकता है, इसलिए इस प्रक्रिया को बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि तय समय पूरा होने के बाद डिग्री वैध नहीं रहती है।
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