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ज्वैलर के पास जा रहे हैं तो गोल्ड किटी से बचें
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 16 Jul 2014 01:55 PM IST
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कोई भी ज्वेलर आपको गोल्ड किटी के लिए कहे तो उसके झांसे में न आएं। कहीं ऐसा न हो जाए कि आपका पैसा फंस जाए और कानून भी कोई मदद न कर सके।
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नए कंपनी एक्ट के तहत ज्वेलरी पर्चेज स्कीम पब्लिक डिपॉजिट के तहत हो गई है। इस पर कंपनियों को 12 फीसदी रिटर्न देना होगा। ज्वेलरी कंपनियों को पब्लिक डिपाजिट के अंतर्गत 12 फीसदी तक रिटर्न देना मुमकिन नहीं होगा।
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कोई भी कंपनी इसमें नेटवर्थ से पच्चीस फीसदी से ज्यादा कलेक्शन भी नहीं कर पाएगी। ऐसा इसलिए किया गया है कि जिससे कोई चिट फंड कंपनी की तर्ज पर फ्राड न कर सके।
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इसी वजह से चंडीगढ़ के नामी गिरामी ज्वेलर्स ने किटी से पूरी तरह कटआफ कर लिया है। एक अप्रैल के बाद नामी ब्रांड ने किटी बंद कर दी है। जिनका पैसा किटी में लगा है उनका पैसा वापस कर दिया गया है और ग्राहकों को गोल्ड खरीदने का आफर भी दे दिया गया है।
हालांकि स्थानीय ज्वेलर्स में से कई ऐसे हैं जो किटी अभी चला रहे हैं। चंडीगढ़ में तनिष्क और पीसी ज्वेलर्स ने एक अप्रैल के बाद किटी बंद कर दी है। इस संदर्भ में चंडीगढ़ ज्वेलर्स एसोसिएशन ने अपने ग्राहकों के लिए नोटिफिकेशन भी जारी किया है।
चंडीगढ़ में हैं दो सौ ज्वेलर्स
चंडीगढ़ में करीब दो सौ ज्वेलर्स हैं, जिनमें से साठ फीसदी ज्वेलर्स गोल्ड किटी चला रहे हैं। इनमें से कई ज्वेलर्स ने मिनिस्ट्री आफ कारपोरेट अफेयर्स के नोटिफिकेशन के बाद भी किटी बंद नहीं की है।
सरकारी फरमान के बाद एक अप्रैल से किटी स्कीम बंद कर दी गई है। नब्बे फीसदी लोगों का पैसा वापस कर दिया गया है। उपभोक्ता ध्यान दें कि किसी ज्वेलर के पास किटी के लिए न जाएं।
मनोज अग्रवाल, फ्रेंचाइजी, पीसी ज्वेलर्स सेक्टर-22
ट्राइसिटी की महिलाओं में किटी के लिए काफी क्रेज था। इसकी वजह यह है कि वह किटी के माध्यम से गहने सहेज लेती थीं। ऐसी महिलाओं से अपील है कि वह अब किटी में रुपया इनवेस्ट न करें। क्योंकि यह अवैध है।
दीप कृष्ण चौहान, अध्यक्ष, पंचकूला ज्वेलर एसोसिएशन
पुराना पैसा आर्डर में बदला जाएगा
नए नियमों के अनुसार कंपनी के पास स्कीमों के तहत जो पुराना पैसा है उसे ऑर्डर में बदला जाएगा। कंपनी ने 20 अप्रैल से नए एडवांस लेने बंद किए हैं। नई स्कीम जल्द लॉन्च होगी। कंपनी को नई स्कीम लांच करने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी लेनी होगी।
यह होगी सजा :
प्राइज चिट एंड मनी सर्कुलेशन एक्ट 1978 के तहत ऐसा करने वाले ज्वेलर को तीन साल की कैद और तीन हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है। जुर्माने की राशि पांच हजार रुपये तक बढ़ाई जा सकती है।