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Chandigarh News: पुराने मोबाइल-कंप्यूटर से निकलेगा सोना-चांदी, सूक्ष्मजीवों से ई-कचरे की धातुओं की होगी रिकवरी

Mon, 12 Oct 2026 03:03 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2026 03:03 AM IST
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Gold and silver to be extracted from old mobile phones and computers; metals from e-waste to be recovered using microorganisms.
जीजीडीएसडी कॉलेज और पंजाब यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताई जैविक तकनीकों की संभावनाएं, स्प्रिंगर नेचर की पुस्तक में प्रकाशित हुआ शोध-अध्याय
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बायोसॉर्प्शन, बायोलीचिंग, बायोएक्यूमुलेशन और बायोमिनरलाइजेशन से कीमती धातुएं दोबारा हासिल करने की उम्मीद
चंडीगढ़। घर में पड़ा पुराना मोबाइल, खराब कंप्यूटर या इस्तेमाल से बाहर हो चुका इलेक्ट्रॉनिक सामान अब सिर्फ कचरा नहीं, बल्कि सोना, चांदी, तांबा और पैलेडियम जैसी कीमती धातुओं का स्रोत भी बन सकता है। इन धातुओं को निकालने की पारंपरिक प्रक्रियाओं में अधिक ऊर्जा और रसायनों की जरूरत पड़ सकती है, जिससे पर्यावरण पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में सूक्ष्मजीवों और जैविक पदार्थों की मदद से ई-कचरे से धातुओं की रिकवरी की संभावनाएं सामने आ रही हैं। इससे प्रदूषण कम करने और संसाधनों का दोबारा इस्तेमाल बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सेक्टर-32 स्थित जीजीडीएसडी कॉलेज के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के डॉ. नवनीत बत्रा और डॉ. अभिनाशी सिंह सोढ़ी तथा पंजाब यूनिवर्सिटी के सोनू भाटिया ने इस विषय पर अध्ययन किया है। उनका शोध-अध्याय फ्यूचर प्रॉस्पेक्टिव ऑफ क्रिटिकल मेटल बायो रिकवरी: एडवांसिंग ग्रीन टेक्नोलॉजीज फॉर अ सर्कुलर एंड सस्टेनेबल फ्यूचर अगस्त 2026 में स्प्रिंगर नेचर की पुस्तक में प्रकाशित हुआ।
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सूक्ष्मजीवों से धातुओं की रिकवरी के चार तरीके
अध्ययन में बायोसॉर्प्शन, बायोलीचिंग, बायोएक्यूमुलेशन और बायोमिनरलाइजेशन तकनीकों की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है। बायोसॉर्प्शन में जैविक पदार्थों की सतह पर धातुएं बांधकर अलग की जाती हैं। बायोलीचिंग में सूक्ष्मजीवों की मदद से धातुओं को ई-कचरे से निकालकर घोल में लाया जाता है। बायोएक्यूमुलेशन में सूक्ष्मजीव अपनी कोशिकाओं के भीतर धातुएं जमा करते हैं, जबकि बायोमिनरलाइजेशन में जैविक गतिविधियों के जरिये धातुओं को ठोस, खनिज जैसे रूप में बदला जा सकता है।
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रसायनों और ऊर्जा की खपत घटाने की संभावना
डॉ. नवनीत बत्रा और डॉ. अभिनाशी सिंह सोढ़ी के अध्ययन के अनुसार, जैविक तकनीकों को प्रभावी और बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने योग्य बनाया जाए तो रसायनों की खपत और पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इनकी लागत, प्रभावशीलता और व्यावसायिक उपयोग की क्षमता पर अभी और काम करने की जरूरत है। प्रक्रिया के दौरान बनने वाले घोल और अवशेषों का सुरक्षित प्रबंधन भी जरूरी होगा।

ई-कचरा बनेगा उपयोगी संसाधन
इन तकनीकों से पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद कीमती धातुओं को दोबारा हासिल करने के विकल्प विकसित हो सकते हैं। इससे नए खनन पर निर्भरता घटाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ई-कचरे के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलने की संभावना है। इस तरह बेकार समझे जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में नई राह खुल सकती है।
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