जिसे नौकरी से निकाला, वो सौ करोड़ का 'संत'
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सौ करोड़ की संपत्ति के मालिक और 25 लाख अनुयायी होने का दावा करने वाले रामपाल अचानक सुर्खियों में नहीं आए हैं। वह पहली बार 2006 में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की पुस्तक पर विवादित टिप्पणी कर चर्चा में आए थे। इधर हाईकोर्ट अवमानना मामले में गिरफ्तारी न होने पर वह फिर 15 दिनों से सुर्खियों में हैं।
रामपाल सोनीपत जिले के धनाना में 8 सितंबर, 1951 को भगत नंदराम के घर जन्मे। इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। सिंचाई विभाग में जेई की नौकरी की। नौकरी के दौरान दबंगई करने के कारण उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया गया था। रामपाल 25 साल तक हनुमान जी के भक्त रहे। वह प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ते थे।
रामपाल जब कबीरपंथ के रामदेवानंद महाराज के संपर्क में आए तो उनके जीवन की दिशा बदल गई। उन्होंने 1999 में करौंथा में सतलोक आश्रम की स्थापना की। हर पूर्णिमा पर तीन दिन का सत्संग होने लगा। धीरे-धीरे आश्रम व रामपाल के अनुयायियों की संख्या बढ़ती चली गई।
100 करोड़ का लग्जरी संत
संत रामपाल के पास करीब 100 करोड़ की संपत्ति है। 16 एकड़ में फैले बरवाला स्थित आश्रम की कीमत करीब 20 करोड़ बताई जा रही है। आश्रम के अंदर लग्जरी सारी सुविधाएं हैं। हर कमरे में एसी है। बाबा के पास लगभग 70 लग्जरी गाड़ियां हैं। जिसमें मर्सडीज, बीएमडब्ल्यू, एसयूवी, सीआरवी शामिल हैं। इसके अलावा 20 ट्रैक्टर, दो ट्रक और करीब पांच बसें भी हैं।
उनके पास बरवाला में एक और आश्रम है जो करीब छह एकड़ में बन रहा है। इसकी कीमत तीन करोड़ है। बरवाला में ही बाबा ने 50 एकड़ जमीन और खरीदी है। इसकी कीमत 28 करोड़ है। रोहतक जिले में झज्जर रोड पर गांव करौंथा में भी चार एकड़ का एक आश्रम खाली पड़ा है। इसकी कीमत करीब पांच करोड़ है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली में भी बाबा की करोड़ों की जमीन बताई जा रही है। सतलोक आश्रम संत रामपाल के 25 लाख अनुयायी होने का दावा करता है। बाबा सूटबूट में सत्संग करते हैं।
ऐसे शुरू हुआ विवाद
2006 में स्वामी दयानंद सरस्वती की लिखी किताब सत्यार्थ प्रकाश पर विवादास्पद टिप्पणी कर संत रामपाल सुर्खियों में आए। टिप्पणी के चलते आर्यसमाजियों से विवाद बढ़ा। दोनों के समर्थकों की हिंसक झड़प में एक व्यक्ति की मौत भी हुई। इसके बाद एसडीएम ने 13 जुलाई 2006 को उनके आश्रम को कब्जे में लेकर रामपाल सहित उनके 24 समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया।
डेढ़ साल बाद रामपाल को जमानत मिली। उन्होंने आश्रम वापस लेने के लिए याचिका लगाई और 2009 में उन्हें आश्रम वापस मिल गया। इसके खिलाफ प्रदेश सरकार व आर्य समाज के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन उनकी याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी।
13 जुलाई, 2013 को एक बार फिर संत रामपाल के समर्थकों व आर्यसमाजियों में झड़प हुई, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई और 100 लोग घायल हुए। इसके बाद पुलिस ने आश्रम पर कब्जा कर लिया। बाद में रामपाल ने बरवाला (हिसार) में बनाए अपने आश्रम में सत्संग शुरू कर दिया।
अब ऐसे उठा विवाद
2006 में करौंथा में हिंसक झड़प के दौरान हुई युवक की मौत के मामले में आरोपी संत रामपाल को 14 मई 2014 को रोहतक कोर्ट में पेशी के लिए सीधे हाजिर होने में छूट दी गई और वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई की राहत दी गई। इसके बाद 14 जुलाई, 2014 को हिसार कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के लिए संत रामपाल कोर्ट पहुंचे।
तब अदालत परिसर में उनके अनुयायियों ने जमकर बवाल काटा। न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए समर्थकों ने जजों के खिलाफ किताबें और पर्चे भी बंटवाए। अभद्रता पर हरियाणा में प्रदेशभर के वकीलों ने कार्य बहिष्कार कर हाई कोर्ट में रामपाल के खिलाफ याचिका दाखिल की। बार-बार वारंट जारी होने के बावजूद रामपाल कोर्ट में पेश नहीं हुए। इसे अदालत ने अवमानना मान कर बाबा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर सरकार को हर हाल में उन्हें 21 नवंबर को कोर्ट में पेश करने को कहा है।
आश्रम है या किला
हिसार जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर बरवाला कस्बे में स्थित सतलोक आश्रम किसी किले से कम नहीं है।16 एकड़ में फैले इस आश्रम में तीस-तीस फीट ऊंची दीवारें बनाई गई है। दीवारें इतनी मोटी बनाई गई हैं ताकि इन्हें कोई आसानी से भेद न सके। यह दीवारें तीन लेयर में हैं। इसके अंदर करीब 50 हजार समर्थकों के रहने की व्यवस्था है।
सोशल मीडिया पर भी रहते हैं एक्टिव
संत रामपाल फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल साइट का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। सत्संग के दौरान प्रवचन देने के लिए वह लिफ्ट के माध्यम से अनुयायियों के सामने अवतरित होते थे, इसकी चर्चा के बाद उन्होंने यह व्यवस्था बंद कर दी।