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जीएमएमएच-16 की नर्सिंग ऑफिसर इक्षिता मार्च से लगातार कर रही हैं ड्यूटी, बोली- आप घर में सुरक्षित रहें, इसलिए हम आपकी हिफाजत के लिए उतरे हैं जंग में

Thu, 06 Aug 2020 12:42 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2020 12:42 AM IST
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GMMH-16 Nursing Officer Ikshita duty continuously since March You should be safe at home, so we have landed battle protection
चंडीगढ़। जीएमएसएच- 16 की नर्सिंग ऑफिसर इक्षिता मार्च से लगातार अस्पताल के कोविड आइसोलेशन और ट्रॉमा सेंटर में ड्यूटी कर रही हैं। उनका कहना है कि महामारी के इस दौर में जब डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ जान जोखिम में डालकर संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे हैं तब जरूरी है कि बाकी लोग अपने घरों में सुरक्षित रहें ताकि संक्रमण न बढ़े। इक्षिता को कई बार लगातार कई दिनों तक अपने परिवार से दूर अस्पताल के हॉस्टल में रहना पड़ा। इशिता अपने पति अक्षित और बेटे रुद्राक्ष से दूर रहकर कोरोना के मरीजों की देखभाल में जुटी हुई है।
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6 घंटे की ड्यूटी में एक एक पल होता है भारी
ईक्षिता ने बताया कि कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर में जब मार्च में उनकी ड्यूटी कोविड- लेबर रूम में लगाई गई तब वह काफी डर गई थीं। पूरी दुनिया में इस बिमारी का खौफ तेजी से बढ़ रहा था। ऐसी स्थिति में चंडीगढ़ में भी पॉजिटिव केस आने शुरू हो गए थे। उस दौरान संक्रमित मरीजों के बीच ड्यूटी करना बहुत ही कठिन साबित हुआ। लेकिन फिर धीरे-धीरे डर दूर होता गया। अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोरोना से बचाव के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। स्टाफ की सुरक्षा को हर स्तर पर मजबूती दी गई। इसके बाद हमारे लिए ड्यूटी करना आसान हो गया। ईक्षिता ने बताया कि ड्यूटी के दौरान 6 घंटे तक पीपीई किट पहन कर काम करना बहुत ही मुश्किल होता है। किट पहनने के बाद कोई भी काम करने में काफी परेशानी होती है। उस दौरान न तो हम पानी पी सकते हैं, नहीं बैठ सकते हैं, लगातार खड़े-खड़े काम करते रहने से काफी थकान हो जाती है। लेकिन ठीक होते मरीजों को देखकर सारा तनाव और थकान मिनटों में दूर हो जाता है।
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पति के साथ बेटे का प्यार बना ताकत महामारी के इस दौर में ड्यूटी करने के दौरान ईक्षिता के प्रति अक्षित और उनके 4 साल के बेटे रुद्राक्ष का प्यार और साथ उनका ढाल बना हुवा है। ईक्षिता ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उनके पति कई बार कॉल करके उनका हाल चाल लेते हैं। वही बेटा भी फोन पर बात करता है। घर जाने पर वह उन्हें देखकर खुश होता है और कहता है मम्मी ने आज भी कोरोना को मार गिराया। उसकी बातें सुनकर मेरा आत्मविश्वास और बढ़ जाता है। ईक्षिता का कहना है कि परिवार और अस्पताल में सीनियर्स के सहयोग के बल पर कोरोना से इस जंग में लगातार डटी हुई हूं।
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