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कोरोना की अनदेखी जीएमसीएच चंडीगढ़ पर पड़ी भारी, 16 डॉक्टर 6 ऑफिसर सिक्योरिटी गार्ड पॉजिटिव
Tue, 11 Aug 2020 01:45 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2020 01:45 PM IST
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जीएमसीएच में मरीज अभी भी स्ट्रेचर पर
- फोटो : अमर उजाला
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 में कोरोना संक्रमण को लेकर लापरवाही भारी पड़ने लगी है। स्थिति यह है कि एक दिन में अस्पताल के 16 डॉक्टर, 6 नर्सिंग ऑफिसर, एक सिक्योरिटी गार्ड कोरोना की चपेट में आ चुके हैं।
इसे लेकर अस्पताल के डॉक्टरों के साथ पैरा मेडिकल स्टाफ में रोष है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन कोरोना संक्रमण से बचाव के मानकों की अनदेखी कर उनकी जान जोखिम में डाल रहा है। अगर अब भी सावधानी नहीं बरती गई तो स्थिति भयावह हो सकती है।
चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही बरतते हुए कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आए 4 में से तीन सुरक्षा गार्डों को क्वारंटीन करने की बजाय ड्यूटी पर बुलाकर संक्रमण के विस्तार का रास्ता खोल दिया। इन सुरक्षा गार्डों में से एक को मुख्य द्वार पर, दूसरे को ओपीडी में और तीसरे को वार्ड के बाहर ड्यूटी पर लगाया गया था।
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ऐसे में वह लगातार 7 दिनों तक अस्पताल की ओपीडी, मेन गेट और वार्ड में आने वाले मरीजों के साथ ही उनके परिजनों, डॉक्टरों और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ के सीधे संपर्क में थे। डॉक्टरों का यहां तक कहना है कि कोरोना संक्रमण की चेन को अस्पताल में सक्रिय करने में अस्पताल प्रशासन के दिशा-निर्देशों का महत्वपूर्ण रोल है।
चाहे अस्पताल की इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर भर्ती सामान्य और गंभीर मरीज हो या अस्पताल परिसर में यहां वहां घूमते लोग, सभी संक्रमण को फैलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उन पर रोक लगाने के लिए अस्पताल प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है। अस्पताल की इमरजेंसी में कोरोना के संदिग्ध मरीजों के साथ ही अन्य गंभीर मरीजों को एक साथ भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। उस वक्त डॉक्टर और स्टाफ के साथ ही वहां भर्ती मरीज भी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं।
पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आए गार्डों को क्वारंटीन कर दिया गया है। जहां तक इमरजेंसी में सोशल डिस्टेंसिंग के पालन न होने की बात है तो वहां संक्रमण से बचाव का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
- डॉ. रवि गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमसीएच 32
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इसे लेकर अस्पताल के डॉक्टरों के साथ पैरा मेडिकल स्टाफ में रोष है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन कोरोना संक्रमण से बचाव के मानकों की अनदेखी कर उनकी जान जोखिम में डाल रहा है। अगर अब भी सावधानी नहीं बरती गई तो स्थिति भयावह हो सकती है।
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चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही बरतते हुए कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आए 4 में से तीन सुरक्षा गार्डों को क्वारंटीन करने की बजाय ड्यूटी पर बुलाकर संक्रमण के विस्तार का रास्ता खोल दिया। इन सुरक्षा गार्डों में से एक को मुख्य द्वार पर, दूसरे को ओपीडी में और तीसरे को वार्ड के बाहर ड्यूटी पर लगाया गया था।
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ऐसे में वह लगातार 7 दिनों तक अस्पताल की ओपीडी, मेन गेट और वार्ड में आने वाले मरीजों के साथ ही उनके परिजनों, डॉक्टरों और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ के सीधे संपर्क में थे। डॉक्टरों का यहां तक कहना है कि कोरोना संक्रमण की चेन को अस्पताल में सक्रिय करने में अस्पताल प्रशासन के दिशा-निर्देशों का महत्वपूर्ण रोल है।
चाहे अस्पताल की इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर भर्ती सामान्य और गंभीर मरीज हो या अस्पताल परिसर में यहां वहां घूमते लोग, सभी संक्रमण को फैलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उन पर रोक लगाने के लिए अस्पताल प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है। अस्पताल की इमरजेंसी में कोरोना के संदिग्ध मरीजों के साथ ही अन्य गंभीर मरीजों को एक साथ भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। उस वक्त डॉक्टर और स्टाफ के साथ ही वहां भर्ती मरीज भी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं।
पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आए गार्डों को क्वारंटीन कर दिया गया है। जहां तक इमरजेंसी में सोशल डिस्टेंसिंग के पालन न होने की बात है तो वहां संक्रमण से बचाव का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
- डॉ. रवि गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमसीएच 32