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GMCH 16 Live: अस्पताल सरकारी, 16-16 घंटे बाद बारी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 26 Feb 2014 02:39 PM IST
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सेक्टर-38 के लाल बहादुर की पत्नी शुगर से पीड़ित हैं। वे अपनी पत्नी का चेकअप कराने मंगलवार को सेक्टर 16 जनरल हास्पिटल की मेडिसिन ओपीडी पहुंचे। साढ़े नौ बजे उनका रजिस्ट्रेशन हो गया। उनका 170वां नंबर था।
उमा बगैर कुछ खाए ही अस्पताल पहुंच गई थीं। अपने नंबर का इंतजार करते-करते ढाई बज गए। तब जाकर उनका नंबर आया।
उमा की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि जब कोई बीमार हो और उसे अपने नंबर का इंतजार करना पड़े। उमा जैसे कई ऐसे मरीज थे, जिन्हें जरूरत से ज्यादा देरी का सामना करना पड़ा।
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उमा बगैर कुछ खाए ही अस्पताल पहुंच गई थीं। अपने नंबर का इंतजार करते-करते ढाई बज गए। तब जाकर उनका नंबर आया।
उमा की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि जब कोई बीमार हो और उसे अपने नंबर का इंतजार करना पड़े। उमा जैसे कई ऐसे मरीज थे, जिन्हें जरूरत से ज्यादा देरी का सामना करना पड़ा।
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ओपीडी में दो डाक्टर, एक को इमरजेंसी की भी जिम्मेदारी
मेडिसिन विभाग में कुल सात डाक्टर हैं। इनमें से दो डाक्टरों की ड्यूटी अलग-अलग विभागों में लगा दी गई है। एक डाक्टर की ड्यूटी हाईकोर्ट की डिस्पेंसरी में लगाई गई है।
दरअसल हाईकोर्ट के डाक्टर बाहर गए हुए हैं। कुछ इसी तरह से राजभवन में भी डाक्टर को तैनात किया गया है। वहां के भी डाक्टर चले गए हैं। अब अस्पताल में पांच डाक्टर बचे। इनमें से एक डाक्टर की ड्यूटी इवनिंग शिफ्ट में है।
एक डाक्टर की ड्यूटी नाइट में है। तीन डाक्टर की ड्यूटी ओपीडी में रहती है। इनमें से एक डाक्टर मेडिसिन वार्ड के 170 बेड का दौरा भी करता है। यानी ओपीडी के दौरान एक डाक्टर दौरे पर निकल गया तो कम से कम दो घंटे बाद ही वह वापस आएगा और यदि एक डाक्टर ने छुट्टी कर ली तो एक डाक्टर पर ही सभी मरीजों का बोझ आ जाएगा।
ओपीडी में दो ही डाक्टर तैनात थे। एक डाक्टर के जिम्मे इमरजेंसी की सेवाएं थी। जब भी कोई कॉल आती थी तो उन्हें इमरजेंसी की ओर रुख करना पड़ता था। इससे मरीजों का समय बढ़ गया।
दरअसल हाईकोर्ट के डाक्टर बाहर गए हुए हैं। कुछ इसी तरह से राजभवन में भी डाक्टर को तैनात किया गया है। वहां के भी डाक्टर चले गए हैं। अब अस्पताल में पांच डाक्टर बचे। इनमें से एक डाक्टर की ड्यूटी इवनिंग शिफ्ट में है।
एक डाक्टर की ड्यूटी नाइट में है। तीन डाक्टर की ड्यूटी ओपीडी में रहती है। इनमें से एक डाक्टर मेडिसिन वार्ड के 170 बेड का दौरा भी करता है। यानी ओपीडी के दौरान एक डाक्टर दौरे पर निकल गया तो कम से कम दो घंटे बाद ही वह वापस आएगा और यदि एक डाक्टर ने छुट्टी कर ली तो एक डाक्टर पर ही सभी मरीजों का बोझ आ जाएगा।
ओपीडी में दो ही डाक्टर तैनात थे। एक डाक्टर के जिम्मे इमरजेंसी की सेवाएं थी। जब भी कोई कॉल आती थी तो उन्हें इमरजेंसी की ओर रुख करना पड़ता था। इससे मरीजों का समय बढ़ गया।
मरीजों के स्ट्रेचर पर ईंटें
सेक्टर-16 जनरल हास्पिटल की मेडिसिन ओपीडी का हाल इतना बुरा है कि स्ट्रेचर पर ईंटें ढोई जाती हैं और मरीजों को धक्के खाने पड़ते हैं। लोग मरीजों को गोद में उठाकर लाते और ले जाते हैं।
ये एक सरकारी अस्पताल के हाल है कि यहां मरीजों के लिए दी गई सुविधाओं का प्रयोग अन्य कामों के लिए किया जाता है। मरीज बेचारे हालातों के मारे कुछ कर नहीं पाते।
गंभीर बीमारी की हालत में पहुंचे मरीजों को ज्यादा दिक्कत पेश आती है। डाक्टरों की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
पूछे जाने पर कार्यवाहक मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. ए तायल का कहना है कि डाक्टरों की कुछ कमी हो गई है, लेकिन इसके बावजूद वे पूरी निष्ठा से मरीजों की जांच करते हैं।
चाहे जितने नंबर हो लेकिन फिर वे पूरे मरीजों को देखते हैं। मेडिसिन ओपीडी में इस समय मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। रोजाना 350 से अधिक की ओपीडी हो रही है।
ये एक सरकारी अस्पताल के हाल है कि यहां मरीजों के लिए दी गई सुविधाओं का प्रयोग अन्य कामों के लिए किया जाता है। मरीज बेचारे हालातों के मारे कुछ कर नहीं पाते।
गंभीर बीमारी की हालत में पहुंचे मरीजों को ज्यादा दिक्कत पेश आती है। डाक्टरों की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
पूछे जाने पर कार्यवाहक मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. ए तायल का कहना है कि डाक्टरों की कुछ कमी हो गई है, लेकिन इसके बावजूद वे पूरी निष्ठा से मरीजों की जांच करते हैं।
चाहे जितने नंबर हो लेकिन फिर वे पूरे मरीजों को देखते हैं। मेडिसिन ओपीडी में इस समय मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। रोजाना 350 से अधिक की ओपीडी हो रही है।
घंटों इंतजार के बाद आती है बारी
मरीजों का कहना है कि ये कहने को तो सरकारी अस्पताल है, लेकिन यहां आने पर ये पता नहीं होता कि डॉक्टर से कब मिलना होगा। कई बार तो 16-16 घंटे इंतजार करने के बावजूद डॉक्टर से मिलना नहीं होता है।
सुबह दस बजे आया था। तुरंत रजिस्ट्रेश हो गया, लेकिन ढाई बजे अपनी मरीज को दिखा पाया। अब तक डाक्टर आ चुके हैं। देर तो लगती है।
इंद्रजीत, निवासी सैनीमाजरा
मेरी पत्नी गंभीर बीमार थी। सुबह साढ़े नौ बजे आ गया था, लेकिन खड़े-खड़े हालत और खराब हो गई। पत्नी का नंबर करीब ढाई बजे आया। बीच-बीच में डाक्टर भी जा रहे थे।
लाल बहादुर, निवासी सेक्टर 38
सुबह से अपने घर वालों के साथ आईं हूं। इतनी देर तक बैठे रहने से हालत और खराब हो गई है। यहां पर अक्सर काफी देर लगती है।
जसवंत कौर, निवासी मोहाली
सुबह दस बजे आया था। तुरंत रजिस्ट्रेश हो गया, लेकिन ढाई बजे अपनी मरीज को दिखा पाया। अब तक डाक्टर आ चुके हैं। देर तो लगती है।
इंद्रजीत, निवासी सैनीमाजरा
मेरी पत्नी गंभीर बीमार थी। सुबह साढ़े नौ बजे आ गया था, लेकिन खड़े-खड़े हालत और खराब हो गई। पत्नी का नंबर करीब ढाई बजे आया। बीच-बीच में डाक्टर भी जा रहे थे।
लाल बहादुर, निवासी सेक्टर 38
सुबह से अपने घर वालों के साथ आईं हूं। इतनी देर तक बैठे रहने से हालत और खराब हो गई है। यहां पर अक्सर काफी देर लगती है।
जसवंत कौर, निवासी मोहाली