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Chandigarh News: किसी भी उम्र में हो सकता है काला मोतिया, साल में दो बार जरूर कराएं आंखों की जांच
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चंडीगढ़। काला मोतिया बहुत भयानक है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसका कोई लक्षण नहीं है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है। पहले ज्यादातर यह 40 से 45 की उम्र में होता था, लेकिन अब जन्मजात बच्चों में भी हो रहा है। इसलिए साल में दो बार आंखों का चेकअप करवाना बहुत जरूरी है। पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में वीरवार को ग्लूकोमा वीक मनाने के लिए की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों ने कही। कांफ्रेंस में डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर डॉ. एसएस पांडव के साथ प्रोफेसर सृष्टि राज और डॉ. फैजल मौजूद रहे।
उन्होंने बताया कि काला मोतिया में आंख पर प्रेशर बढ़ जाता है। इससे आंखों को दिमाग से जोड़ने वाली नस सूख जाती है। काला मोतिया शुगर और जेनेटिक यानी घर में किसी अन्य सदस्य को होने पर भी हो सकता है। गर्भावस्था में इंफेक्शन होने पर भी बच्चों में काला मोतिया होने का खतरा रहता है। बचपन में आंख पर चोट लगने के बाद और आंखों में ज्यादा ड्राइनेस या सूजन होने पर भी कालिया मोतिया हो सकता है। बच्चों में इसकी पहचान आंख बड़ी होने, पुतली से पानी आने और लाइट में बच्चों के आंख बंद करने से हो सकती है। पीजीआई में 5 से 6 हजार केस बच्चे के काला मोतिया के हैं।
पीजीआई में रोजाना आ रहे 30 मरीज
पीजीआई में रोजाना 25-30 पेशेंट काला मोतिया के आ रहे हैं। डॉक्टर ने कहा कि उनके साथ आए तीमारदार को समझते हैं कि अपना चेकअप करवाएं, क्योंकि जल्दी इलाज करने पर इसे कंट्रोल किया जा सकता है। कार्यक्रम के तहत टीवी प्रोग्राम, रॉक गार्डन और सुखना लेक पर जागरूकता कार्यक्रम के अलावा एफएम रेडियो में ग्लूकोमा जागरूकता करवाई जाएगी ताकि लोगों के चेकअप करने में वृद्धि हो सके।
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उन्होंने बताया कि काला मोतिया में आंख पर प्रेशर बढ़ जाता है। इससे आंखों को दिमाग से जोड़ने वाली नस सूख जाती है। काला मोतिया शुगर और जेनेटिक यानी घर में किसी अन्य सदस्य को होने पर भी हो सकता है। गर्भावस्था में इंफेक्शन होने पर भी बच्चों में काला मोतिया होने का खतरा रहता है। बचपन में आंख पर चोट लगने के बाद और आंखों में ज्यादा ड्राइनेस या सूजन होने पर भी कालिया मोतिया हो सकता है। बच्चों में इसकी पहचान आंख बड़ी होने, पुतली से पानी आने और लाइट में बच्चों के आंख बंद करने से हो सकती है। पीजीआई में 5 से 6 हजार केस बच्चे के काला मोतिया के हैं।
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पीजीआई में रोजाना आ रहे 30 मरीज
पीजीआई में रोजाना 25-30 पेशेंट काला मोतिया के आ रहे हैं। डॉक्टर ने कहा कि उनके साथ आए तीमारदार को समझते हैं कि अपना चेकअप करवाएं, क्योंकि जल्दी इलाज करने पर इसे कंट्रोल किया जा सकता है। कार्यक्रम के तहत टीवी प्रोग्राम, रॉक गार्डन और सुखना लेक पर जागरूकता कार्यक्रम के अलावा एफएम रेडियो में ग्लूकोमा जागरूकता करवाई जाएगी ताकि लोगों के चेकअप करने में वृद्धि हो सके।
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