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हाईकोर्ट का आदेश: दूसरी शादी कर चुके पिता को बच्चा देना उसके हितों के विपरीत, आस्ट्रेलियाई मां को सौंपा जाए
Mon, 02 Jun 2025 08:22 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Jun 2025 08:22 PM IST
सार
ऑस्ट्रेलिया के नागरिक बच्चे के नाना ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर बच्चे को वापस दिलवाने की गुहार लगाई थी। दंपती के बीच वैवाहिक विवाद के चलते तलाक हो चुका है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नाबालिग बेटे को उसकी आस्ट्रेलियाई मां को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे का पिता दूसरा विवाह कर चुका है और ऐसे में यदि बच्चे की कस्टडी उस पिता के पास रहना अनुचित है। यह विदेशी कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है, जो भारत में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मर्यादा के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है और बच्चे के हित में नहीं है।
ऑस्ट्रेलिया के नागरिक बच्चे के नाना ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर बच्चे को वापस दिलवाने की गुहार लगाई थी। दंपती के बीच वैवाहिक विवाद के चलते तलाक हो चुका है। ऑस्ट्रेलिया की फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति से बेटे और बेटी की कस्टडी मां को दी थी, जबकि पिता को केवल मिलने के अधिकार प्रदान किए गए थे।
ऑस्ट्रेलिया की फैमिली कोर्ट ने पिता को 8 जनवरी-2025 से 2 फरवरी-2025 तक बेटे को भारत लाने की अनुमति दी थी, लेकिन इस अवधि के बाद बेटे को वापस नहीं भेजा गया, जबकि बेटी को भेज दिया गया। मां ने इस पर ऑस्ट्रेलिया की फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसके बाद 3 मार्च-2025 को एक रिकवरी ऑर्डर पारित किया गया, जिसमें भारत सरकार और संबंधित पुलिस अधिकारियों से सहयोग करने को कहा गया, ताकि बच्चे को वापस ऑस्ट्रेलिया भेजा जा सके।
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पिता ने कोर्ट में तर्क दिया कि भारत हेग कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है और इसलिए ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट का आदेश भारत में लागू नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे को पिता के साथ भारत लाने की अनुमति सीमित अवधि के लिए थी और वह अवधि समाप्त हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे का वर्तमान भारत में अच्छा हो सकता है, पर उसका भविष्य वहां सुरक्षित रहेगा, जहां उसकी परवरिश व्यवस्थित और पूर्ण हो और वह जगह ऑस्ट्रेलिया है।
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ऑस्ट्रेलिया के नागरिक बच्चे के नाना ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर बच्चे को वापस दिलवाने की गुहार लगाई थी। दंपती के बीच वैवाहिक विवाद के चलते तलाक हो चुका है। ऑस्ट्रेलिया की फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति से बेटे और बेटी की कस्टडी मां को दी थी, जबकि पिता को केवल मिलने के अधिकार प्रदान किए गए थे।
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ऑस्ट्रेलिया की फैमिली कोर्ट ने पिता को 8 जनवरी-2025 से 2 फरवरी-2025 तक बेटे को भारत लाने की अनुमति दी थी, लेकिन इस अवधि के बाद बेटे को वापस नहीं भेजा गया, जबकि बेटी को भेज दिया गया। मां ने इस पर ऑस्ट्रेलिया की फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसके बाद 3 मार्च-2025 को एक रिकवरी ऑर्डर पारित किया गया, जिसमें भारत सरकार और संबंधित पुलिस अधिकारियों से सहयोग करने को कहा गया, ताकि बच्चे को वापस ऑस्ट्रेलिया भेजा जा सके।
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पिता ने कोर्ट में तर्क दिया कि भारत हेग कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है और इसलिए ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट का आदेश भारत में लागू नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे को पिता के साथ भारत लाने की अनुमति सीमित अवधि के लिए थी और वह अवधि समाप्त हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे का वर्तमान भारत में अच्छा हो सकता है, पर उसका भविष्य वहां सुरक्षित रहेगा, जहां उसकी परवरिश व्यवस्थित और पूर्ण हो और वह जगह ऑस्ट्रेलिया है।