पुलिस सुधार आयोग की सलाह: चंडीगढ़ पुलिस को मिलें आधुनिक हथियार, पीड़ितों के साथ हो अच्छा बर्ताव
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूटी प्रशासन ने एक सितंबर 2020 को तीन महीने के लिए एक सदस्यीय पुलिस सुधार आयोग का गठन किया था। हालांकि कई बार आयोग को एक्सटेंशन दी गई। आयोग का काम ये बताना है कि पुलिस कार्यप्रणाली से लेकर सभी तरह की जांच में किस तरह के सुधार की आवश्यकता है।
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चंडीगढ़ पुलिस महकमे के कामकाज और जांच में सुधार के लिए एक साल पहले पुलिस सुधार आयोग का गठन किया गया था। शुक्रवार को आयोग के पूर्व इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजी) आईपीएस केबी सिंह ने प्रशासक को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में पुलिस की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के साथ उसे आधुनिक बनाने का भी सुझाव दिया गया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि चंडीगढ़ पुलिस के हथियार पुराने हो चुके हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों को अब आधुनिक हथियारों की जरूरत है। साथ ही शहर में पांच नए थाने और एक साइबर थाना बनाने की भी आवश्यकता है ताकि आपराधिक वारदात पर लगाम लगाई जा सके। आयोग की रिपोर्ट में थानों में आने वाले पीड़ितों के साथ होने वाले बर्ताव को ठीक करने की भी बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, थाने में आने वाले पीड़ितों को यह पता नहीं होता कि शिकायत किसे देनी है और किससे बात करनी है। ऐसे में हर थाने में अलग से एक रिसेप्शन बनना चाहिए और बाकायदा एक मुलाजिम की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए ताकि पीड़ित को अपनी शिकायत दर्ज कराने में कोई दिक्कत न झेलनी पड़े।
एक सितंबर 2020 को तीन महीने के लिए बना था आयोग
आयोग की रिपोर्ट के दस प्रमुख बिंदु
- पुलिस को दोस्ताना बर्ताव करना चाहिए
- शहर में पांच नए पुलिस थानों का निर्माण
- थानों में आने वाले पीड़ितों के लिए रिकॉर्ड रूम
- पुलिस को आधुनिक हथियारों की जरूरत
- थानों के बुनियादी ढांचे का विकास
- पुलिस और जनता के बीच बेहतर संबंध
- शहर के प्वाइंट पर कैमरों की जरूरत
- साइबर क्राइम का अलग से थाना बनाना
- पुलिस विभाग में समय-समय पर भर्तियां
- पुलिस टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क का मजबूतीकरण
मैंने अपनी रिपोर्ट पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को सौंप दी है। रिपोर्ट में कई बदलाव की बात कही गई है। इससे चंडीगढ़ पुलिस और भी मजबूत होगी। -केबी सिंह, कमिश्नर, पुलिस सुधार आयोग