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गीता जयंती के खिलाफ रामपाल पहुंचे हाईकोर्ट, जानिए क्यों उठाए सवाल

Mon, 05 Dec 2016 12:20 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 05 Dec 2016 12:20 PM IST
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 Gita Jayanti celebrations reached the High Court, Rampal raised the question on expenses
गीता महोत्सव - फोटो : अमर उजाला

सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल ने हरियाणा सरकार की ओर से श्रीमद् भागवत गीता को प्रमोट करने के लिए कुरुक्षेत्र में गीता जयंती महोत्सव के आयोजन के तहत किए जा रहे करोड़ों रुपये खर्च पर सवाल उठाया है। 

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रामपाल की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस आयोजन पर रोक लगाने की मांग की गई है। जनहित याचिका में रामपाल ने कहा है कि भारत एक धर्मनिर्पेक्ष देश है। 
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ऐसे में एक धर्म विशेष की पुस्तक को प्रमोट करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किया जाना सीधे तौर पर गलत है। यह देश की धर्मनिर्पेक्षता पर सवालिया निशान खड़ा करता है। याचिका पर सुनवाई सोमवार को होगी।
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रामपाल ने अपने वकील केडीएस हुड्डा के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा है कि वह देश का नागरिक है। ऐसे में वह जनहित याचिका दाखिल करने के लिए पूरी तरह से योग्य है। 

ऐसे आयोजन के लिए सरकारी खजाने से खर्च पर उठाए सवाल 

 Gita Jayanti celebrations reached the High Court, Rampal raised the question on expenses
कोर्ट - फोटो : file photo

रामपाल ने कहा कि केंद्र और हरियाणा सरकार धार्मिक पुस्तक गीता को प्रमोट करने के लिए करोड़ों की राशि खर्च कर रही है। इसके तहत हरियाणा के कुरुक्षेत्र में गीता जयंती का आयोजन भी किया जा रहा है। जनहित याचिका पर सुनवाई सोमवार को जस्टिस एसएस सार्रों और जस्टिस गिल की खंडपीठ के समक्ष होनी है। 

रामपाल पर हाईकोर्ट में आपराधिक अवमानना का मामला चल रहा है। मामले में हाईकोर्ट के आदेशों पर उन्हें आश्रम से निकालकर हाईकोर्ट तक लाने के लिए बीते वर्ष हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी।

इस दौरान रामपाल को गिरफ्तार किया गया और उस पर देशद्रोह सहित कई मामले दर्ज किए गए, जिन पर सुनवाई चल रही है। इसी बीच हाईकोर्ट में गीता को लेकर दाखिल जनहित याचिका एक बार फिर से उन्हें चर्चा में लेकर आ गई है। 

ऐसे आयोजन के लिए सरकारी खजाने से खर्च पर उठाए सवाल 
रामपाल की याचिका में मुख्य केंद्र गीता जयंती महोत्सव है। रामपाल ने याचिका में कहा है कि इस तरह का खर्चा किसी एक धर्म की पुस्तक के लिए सरकारी खजाने से नहीं किया जा सकता है । ऐसे में गीता जयंती पर रोक लगा दी जानी चाहिए। गीता जयंती महोत्सव 6 दिसंबर से औपचारिक रूप से आरंभ होने वाला है।

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