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जन्म से ही वेंटीलेटर पर थी यह बच्ची, कमांड हॉस्पिटल ने दी नई जिंदगी

Thu, 16 Mar 2017 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 16 Mar 2017 09:23 AM IST
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girl was on ventilator from birth, Command Hospital gave her new life
दो माह की बच्ची के जुड़े सांसों के तार - फोटो : अमर उजाला
गंभीर बीमारी से जूझ रहे प्रीमिच्योर नवजात को कमांड हास्पिटल के डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। नवजात का वजन एक किलोग्राम था और उसका जन्म 28वें हफ्ते में हुआ था। बच्चा पीडीए (पेटेंट डाक्टस अर्टीरियोसस) से पीड़ित था। पीडीए एक ऐसी स्थिति है, जिसमें महाधमनी (पूरे शरीर को रक्त प्रवाह करने वाली धमनी) और पल्मोनेरी धमनी (फेफड़े को रक्त प्रवाह करने वाली धमनी) के बीच की नली खुली रह जाती है।
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आमतौर पर जन्म के बाद यह नलिका खुद ब खुद बंद हो जाती है, लेकिन इस नवजात की खुली रह गई। इसी वजह से आक्सीजन रहित और आक्सीजन युक्त रक्त मिश्रित होने लगा है। इससे दो माह की बच्ची को सांस लेने में कठिनाई आ रही थी। इससे बच्ची का वजन नहीं बढ़ रहा था और वेंटीलेटर पर निर्भर हो गई थी। दिन पर दिन हालत बिगड़ती जा रही थी।
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नीकू में की गई सर्जरी
तय समय से पहले जन्मे नवजात की सर्जरी करना आसान नहीं था। सबसे ज्यादा मुश्किल उसे ऑपरेशन थियेटर तक ले जाने में थी। इसके लिए विशेष तौर पर नई दिल्ली स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हास्पिटल से पीडियाट्रिक कार्डियोलाजिस्ट, कार्डियक सर्जन की टीम और पीडियाट्रिक एनेस्थिस्यिोलाजिस्ट की टीम आई। करीब डेढ़ घंटे तक कमांड हास्पिटल की कमांडेंट मेजर जनरल मुक्ति शर्मा के नेतृत्व में टीम ने सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद उसके वजन में बढ़ोतरी शुरू हो गई और उसे वेंटीलेटर से भी हटा दिया गया है।
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इसलिए जटिल थी सर्जरी
बच्ची प्रीमिच्योर थी। 28वें हफ्ते में ही उसका जन्म हो गया था। वजन एक किलोग्राम था। बच्ची को सांस लेने में दिक्कत आ रही थी, जिससे उसे वेंटीलेटर से हटाना मुश्किल था। नीकू में ही बच्ची की सर्जरी करना कमांड हास्पिटल के लिए किसी चुनौती से कम नहीं थी। यह पहली बार था, जब कमांड हास्पिटल ने नीकू में सर्जरी की थी। पीजीआई में भी इस तरह जटिल सर्जरी बहुत कम होती है। यह बच्चा भारतीय सेना के एक फौजी का था। दो जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ था। एक अपनी मां के पास था, जबकि दूसरा अस्पताल के वेंटीलेटर में था।
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