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'साहब! आरोपियों को फांसी दो नहीं तो मैं सजा दूंगा', दुष्कर्म पीड़िता बच्ची के पिता का दर्द छलका
Sun, 03 Feb 2019 03:32 PM IST
खुशबू गोयल
नीरज वर्मा, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
नीरज वर्मा, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 03 Feb 2019 03:32 PM IST
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मासूम बेटी से दुष्कर्म से आहत पिता आरोपियों को फांसी की सजा चाहता है। उसका कहना है कि या तो पुलिस आरोपियों को फांसी दे, नहीं तो वह खुद उन्हें सजा देगा। जब राज्य महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रतिभा सुमन के साथ चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) चेयरमैन पीजीआई पहुंचे तो बच्ची के पिता ने कहा- साहब, आरोपियों को फांसी की सजा दो, नहीं तो सजा मैं दूंगा। आहत पिता के इन शब्दों को सुनकर चेयरमैन ने तत्काल उसकी काउंसलिंग करने के लिए कहा ताकि वह कोई गलत कदम नहीं उठा सके।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के साथ सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन डॉ. राज सिंह सांगवान सामूहिक दुष्कर्म की शिकार बच्ची से मिलने पीजीआई के वार्ड नंबर दो पहुंचे। दोनों ने करीब डेढ़ घंटे तक पीड़ित बच्ची, उसके पिता के साथ-साथ उपचार करने वाली महिला डाक्टरों से बातचीत की। वार्ड से बाहर आकर सीडब्ल्यूसी चेयरमैन ने बताया कि बच्ची सदमे से उबर रही है और उसके स्वास्थ्य में भी सुधार हो रहा है। मगर बच्ची के साथ हुई वारदात की वजह से उसका पिता गहरे सदमे में है।
बेटी के पास बैठे पिता ने कहा कि साहब, आरोपियों को फांसी की सजा दो। यदि उन्हें फांसी की सजा नहीं मिली तो सजा फिर मैं दूंगा। मेरी बच्ची के साथ उन्होंने जो किया, उसकी सजा मैं अपनी जान गवांकर भी देने के लिए तैयार हूं। इसके बाद डॉ. राज सिंह सांगवान ने उसे समझाते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और आरोपियों को सजा जरूर मिलेगी। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। डॉ. सांगवान ने पिता को शांत करवाने के लिए डाक्टरों को तत्काल उसकी भी काउंसलिंग करने के लिए कहा ताकि वह भविष्य में किसी भी गलत तरह का कदम नहीं उठाए।
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वहीं, बच्ची का उपचार करने वाली महिला डाक्टरों ने बताया कि गंभीर हालत होने की वजह से बच्ची को सिविल अस्पताल से पीजीआई रेफर किया गया था। जिस समय बच्ची पीजीआई में आई थी, उस समय वह गहरे सदमे में थी। बच्ची के साथ डाक्टरों ने घुल मिलकर बातें कीं ताकि वह अपने साथ हुई घटना को धीरे-धीरे भूल सके। जिसका असर हुआ कि बच्ची अब सदमे से उबरने लगी है और उसके स्वास्थ्य में भी सुधार हो रहा है। डाक्टरों ने कहा कि यदि इसी तरह से सुधार हुआ तो बच्ची को जल्द घर भेज दिया जाएगा।
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राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के साथ सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन डॉ. राज सिंह सांगवान सामूहिक दुष्कर्म की शिकार बच्ची से मिलने पीजीआई के वार्ड नंबर दो पहुंचे। दोनों ने करीब डेढ़ घंटे तक पीड़ित बच्ची, उसके पिता के साथ-साथ उपचार करने वाली महिला डाक्टरों से बातचीत की। वार्ड से बाहर आकर सीडब्ल्यूसी चेयरमैन ने बताया कि बच्ची सदमे से उबर रही है और उसके स्वास्थ्य में भी सुधार हो रहा है। मगर बच्ची के साथ हुई वारदात की वजह से उसका पिता गहरे सदमे में है।
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बेटी के पास बैठे पिता ने कहा कि साहब, आरोपियों को फांसी की सजा दो। यदि उन्हें फांसी की सजा नहीं मिली तो सजा फिर मैं दूंगा। मेरी बच्ची के साथ उन्होंने जो किया, उसकी सजा मैं अपनी जान गवांकर भी देने के लिए तैयार हूं। इसके बाद डॉ. राज सिंह सांगवान ने उसे समझाते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और आरोपियों को सजा जरूर मिलेगी। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। डॉ. सांगवान ने पिता को शांत करवाने के लिए डाक्टरों को तत्काल उसकी भी काउंसलिंग करने के लिए कहा ताकि वह भविष्य में किसी भी गलत तरह का कदम नहीं उठाए।
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वहीं, बच्ची का उपचार करने वाली महिला डाक्टरों ने बताया कि गंभीर हालत होने की वजह से बच्ची को सिविल अस्पताल से पीजीआई रेफर किया गया था। जिस समय बच्ची पीजीआई में आई थी, उस समय वह गहरे सदमे में थी। बच्ची के साथ डाक्टरों ने घुल मिलकर बातें कीं ताकि वह अपने साथ हुई घटना को धीरे-धीरे भूल सके। जिसका असर हुआ कि बच्ची अब सदमे से उबरने लगी है और उसके स्वास्थ्य में भी सुधार हो रहा है। डाक्टरों ने कहा कि यदि इसी तरह से सुधार हुआ तो बच्ची को जल्द घर भेज दिया जाएगा।