Punjab News: ज्ञानी हरप्रीत बोले- मुझे राघव चड्ढा की सगाई में शामिल होने की वजह से नहीं हटाया गया
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा है कि शिअद नेता विरसा सिंह वल्टोहा ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की नियुक्ति के संबंध में जो शब्द कहे हैं, उसके अनुसार एसजीपीसी को चाहिए कि वल्टोहा को ही श्री अकाल तख्त साहिब का जत्थेदार नियुक्त कर देना चाहिए, क्योंकि वह बहुत निडर और दिलेर हैं।
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श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने गुरुवार को नए जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह को उनकी ताजपोशी पर शुभकामनाएं दीं। वह नए जत्थेदार रघबीर सिंह की ताजपोशी के लिए आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। उन्होंने पत्रकारों के एक सवाल पर कहा कि मेरे पद से हटने को राघव चड्ढा की सगाई में शामिल होने के मामले के साथ जोड़ा जा रहा है, जो सही नहीं है। एसजीपीसी ने जो किया वह ठीक है। मुझे इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब वे ऑस्ट्रेलिया गए थे तो उन्होंने एसजीपीसी के मुख्य सचिव को फोन कर कहा कि वे श्री अकाल तख्त साहिब की सेवा से मुक्त होना चाहते हैं। उन्होंने एसजीपीसी से दोनों तख्तों की सेवा वापस लेने और किसी अन्य योग्य व्यक्ति को सौंपने की बात कही थी लेकिन एसजीपीसी ने उनको तख्त श्री दमदमा साहिब से मुक्त नहीं किया। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार गुरबाणी प्रसारण के मामले में कानूनी तौर पर हस्तक्षेप कर सकती है या नहीं यह तो कानूनी विशेषज्ञ ही बता सकते है लेकिन सरकार को सिखों के धार्मिक मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
वल्टोहा इतने दिलेर हैं तो उन्हें बना दें जत्थेदारः ज्ञानी हरप्रीत सिंह
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा है कि शिअद नेता विरसा सिंह वल्टोहा ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की नियुक्ति के संबंध में जो शब्द कहे हैं, उसके अनुसार एसजीपीसी को चाहिए कि वल्टोहा को ही श्री अकाल तख्त साहिब का जत्थेदार नियुक्त कर देना चाहिए, क्योंकि वह बहुत निडर और दिलेर हैं।
वल्टोहा को जत्थेदार नियुक्त करके जो काम करवाना चाहते हैं करवा लेने चाहिए। उल्लेखनीय है कि श्री अकाल तख्त साहिब के नवनियुक्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह की नियुक्ति पर विरसा सिंह वल्टोहा ने कहा था कि जत्थेदार को विद्वान, रागी, कथावाचक नहीं, बल्कि साहसी, निडर व दिलेर होना चाहिए। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरुद्वारों पर जबरन कब्जा कर लिया है। इस मामले को एसजीपीसी को सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। पंजाब सरकार को गुरुद्वारा एक्ट में नेहरू-मास्टर तारा सिंह समझौते का सम्मान करना चाहिए।