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Chandigarh News: पीजीआई में ढाई साल बाद भी नहीं शुरू हुई जिनोम सिक्वेंसिंग लैब

Tue, 26 Dec 2023 02:20 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 26 Dec 2023 02:20 AM IST
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Genome sequencing lab not started in PGI even after two and a half years
चंडीगढ़। देश में कोरोना के नए वेरिएंट जेएन-1 के मामले सामने आने के बाद चंडीगढ़ में भी एहतियात बढ़ा दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि संक्रमित मिलने वाले मरीजों की जिनोम सिक्वेंसिंग कराई जाएगी ताकि वायरस के वेरिएंट का समय रहते पता चल सके और बचाव के उपाय किए जा सकें। खास बात यह है कि पीजीआई के दावे के ढाई साल बाद भी चंडीगढ़ में जिनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। कोरोना की लहर के साथ ही इसे लेकर तैयारी जोर पकड़ती है और संक्रमण दर नीचे आने के साथ ही मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इस बार भी यही स्थिति है। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान शहर में कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वेरिएंट के मरीजों के मिलने पर प्रशासक ने पीजीआई को शीघ्र जिनोम सिक्वेंसिंग लैब स्थापित करने का निर्देश दिया था क्योंकि तब नमूने जांच के लिए दिल्ली भेजे जा रहे थे और रिपोर्ट आने में डेढ़ महीने का समय लग रहा था। लेकिन ढाई साल गुजरने के बाद भी स्थिति जस की तस है। अब भी जांच के लिए संदिग्ध मरीजों के नमूने दिल्ली स्थित नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल में भेजने पड़ेंगे।
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जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए 12 तरह की अलग-अलग रीजेंट की जरूरत पड़ती है, जिनमें से कुछ भारत जबकि अन्य विदेश से मंगानी पड़तीं हैं। पीजीआई की ओर से 17 अगस्त 2021 को वॉर रूम बैठक में 40 नमूनों के जीनोम सिक्वेंसिंग करने के दावे भी किए गए थे लेकिन कोविड का संक्रमण दर कम पड़ने के साथ ही सारे दावे ठंडे पड़ गए।
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देश में कहां-कहां होती है यहां है जीनोम सीक्वेंसिंग
देश में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (नई दिल्ली), सीएसआईआर-आर्कियोलॉज फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (हैदराबाद), इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (भुवनेश्वर), एनसीबीएस (बंगलूरू), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (कल्याणी, पश्चिम बंगाल), आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (पुणे) में उपलब्ध है।
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जिनोम सिक्वेंसिंग करना पीजीआई के लिए अनिवार्य नहीं है। वैसे भी पीजीआई कोविड जांच लैब के लिए मेंटरशिप की जिम्मेदारी संभाल रहा है।
-डॉ. मीनी पी सिंह, वायरोलॉजी विभाग, पीजीआई
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