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जेपी का गारबेज प्लांट बंद, 250 टन कूड़ा नहीं हुआ प्रोसेस
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 12 Jul 2016 10:00 AM IST
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मोहाली में कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में डडूमाजरा स्थित गारबेज प्लांट बंद हो गया है। ऐसे में सोमवार को शहरवासियों का 250 टन कूड़ा प्रोसेस नहीं हुआ। जेपी कंपनी ने नगर निगम द्वारा टिपिंग फीस न देने के कारण यह प्लांट बंद कर दिया है। निगम जेपी कंपनी की टिपिंग फीस देने की मांग यह कह कर खारिज कर चुका है कि पहले कंपनी प्लांट को अपग्रेड करे। ऐसे में प्रोसेस न होने पर निगम सीधा डपिंग ग्राउंड में कूड़ा गिरा रहा है। जबकि आगे मानसून सक्रिय होने पर दुर्गंध की दिक्कत बढ़ जाएगी। साथ ही हिमाचल से चंडीगढ़ आने वाले कूड़े पर भी प्लांट ने पिछले सप्ताह पाबंदी लगा दी थी। जिस कारण शिमला निगम ने प्लांट के खिलाफ एनजीटी में आदेशों के अवमानना की भी अर्जी दाखिल कर दी है। मामले में चंडीगढ़ निगम भी शिमला निगम का साथ देते हुए 14 जुलाई को सिविल मिसलेनियस केस दाखिल करने जा रहा है। मालूम हो कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर हिमाचल (शिमला, सोलन और बद्दी) का गारबेज प्रोसेस के लिए अक्तूबर से चंडीगढ़ आना शुरू हो गया था। इस फैसले के खिलाफ ही चंडीगढ़ नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी भी दाखिल की थी जो खारिज हो गई है।
हाईकोर्ट में आज अर्जी दाखिल करेगा निगम
प्लांट बंद करने के मामले को नगर निगम ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया है। निगम मंगलवार को अर्जी दाखिल करेगा। अधिकारियों के अनुसार एमओयू के अनुसार कंपनी प्लांट बीच में छोड़कर नहीं जा सकती है।
हालात बिगड़ जाएंगे
अगर जल्द ही नगर निगम की ओर से कोई समाधान न निकाला गया तो शहर के हालात बिगड़ जाएंगे। क्योंकि निगम रोज डंपिंग ग्राउंड में कूड़ा नहीं डाल सकता। पहले ही डंपिंग ग्राउंड से आ रही दुर्गंध से लोग परेशान हैं। साथ ही शहर के डस्टबिन भी फुल हो जाएंगे।
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कई बार कंपनी दे चुकी है धमकी
जेपी प्लांट 2008 से डड्डूमाजरा में निशुल्क कूड़ा प्रोसेस कर रहा है। लेकिन अब कंपनी 300 प्रति टन कूड़ा प्रोसेस करने की टिपिंग फीस मांग रही थी। कंपनी नगर निगम को इससे पहले भी तीन बार प्लांट बंद करने का नोटिस दे चुकी है। लेकिन अधिकारी कंपनी पर दबाव डालकर मना लेते थे। कंपनी अधिकारियों के अनुसार हर माह 50 लाख का घाटा हो रहा था। कंपनी की वित्तीय स्थिति भी ठीक नहीं है। निगम टिपिंग फीस देने को तैयार नहीं थी, जिस कारण प्लांट बंद कर दिया गया है।
ढाई लाख रुपये का बोझ बढ़ेगा
इस समय डड्डूमाजरा का गारबेज प्लांट रोजाना चंडीगढ़ का 250 टन कूड़ा प्रोसेस कर रहा है। अगर निगम को रोजाना एक टन कूड़े के लिए एक हजार रुपये प्रोसेसिंग फीस का भुगतान करना पड़ा तो शहर पर ढाई लाख रुपये का बोझ बढ़ जाएगा। ऐसे में निगम शहर में सेनिटेशन एवं गारबेज कलैक्शन सेस लगा सकता है। जिसका बोझ शहरवासियों पर पड़ेगा। शहरवासी पहले ही हाउस और प्रॉपर्टी टैक्स से जूझ रहे हैं।
कोट
जल्द ही कोई न कोई हल निकाल लिया जाएगा। प्लांट बेशक बंद हो गया है लेकिन पहले भी प्लांट कौन सा चल रहा था। नई तकनीकी का प्लांट लगाने के लिए नगर निगम अलग से भी काम कर रहा है, जिससे बिजली बनाई जाएगी। फिलहाल मंगलवार को हाईकोर्ट में हम कंपनी के खिलाफ अर्जी दाखिल करेंगे।
-अरुण सूद, मेयर।
कोट
जेपी कंपनी ने 11 जुलाई से प्लांट बद करने का नोटिस दिया था। जबकि नियमों के अनुसार कंपनी ऐसा नहीं कर सकती है। जेपी प्लांट और निगम के बीच जो समझौता हुआ है उसके अनुसार प्लांट को शहर का कूड़ा निशुल्क ही प्रोसेस करना है।
-राजीव गुप्ता, नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर एवं एमओएच
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हाईकोर्ट में आज अर्जी दाखिल करेगा निगम
प्लांट बंद करने के मामले को नगर निगम ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया है। निगम मंगलवार को अर्जी दाखिल करेगा। अधिकारियों के अनुसार एमओयू के अनुसार कंपनी प्लांट बीच में छोड़कर नहीं जा सकती है।
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हालात बिगड़ जाएंगे
अगर जल्द ही नगर निगम की ओर से कोई समाधान न निकाला गया तो शहर के हालात बिगड़ जाएंगे। क्योंकि निगम रोज डंपिंग ग्राउंड में कूड़ा नहीं डाल सकता। पहले ही डंपिंग ग्राउंड से आ रही दुर्गंध से लोग परेशान हैं। साथ ही शहर के डस्टबिन भी फुल हो जाएंगे।
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कई बार कंपनी दे चुकी है धमकी
जेपी प्लांट 2008 से डड्डूमाजरा में निशुल्क कूड़ा प्रोसेस कर रहा है। लेकिन अब कंपनी 300 प्रति टन कूड़ा प्रोसेस करने की टिपिंग फीस मांग रही थी। कंपनी नगर निगम को इससे पहले भी तीन बार प्लांट बंद करने का नोटिस दे चुकी है। लेकिन अधिकारी कंपनी पर दबाव डालकर मना लेते थे। कंपनी अधिकारियों के अनुसार हर माह 50 लाख का घाटा हो रहा था। कंपनी की वित्तीय स्थिति भी ठीक नहीं है। निगम टिपिंग फीस देने को तैयार नहीं थी, जिस कारण प्लांट बंद कर दिया गया है।
ढाई लाख रुपये का बोझ बढ़ेगा
इस समय डड्डूमाजरा का गारबेज प्लांट रोजाना चंडीगढ़ का 250 टन कूड़ा प्रोसेस कर रहा है। अगर निगम को रोजाना एक टन कूड़े के लिए एक हजार रुपये प्रोसेसिंग फीस का भुगतान करना पड़ा तो शहर पर ढाई लाख रुपये का बोझ बढ़ जाएगा। ऐसे में निगम शहर में सेनिटेशन एवं गारबेज कलैक्शन सेस लगा सकता है। जिसका बोझ शहरवासियों पर पड़ेगा। शहरवासी पहले ही हाउस और प्रॉपर्टी टैक्स से जूझ रहे हैं।
कोट
जल्द ही कोई न कोई हल निकाल लिया जाएगा। प्लांट बेशक बंद हो गया है लेकिन पहले भी प्लांट कौन सा चल रहा था। नई तकनीकी का प्लांट लगाने के लिए नगर निगम अलग से भी काम कर रहा है, जिससे बिजली बनाई जाएगी। फिलहाल मंगलवार को हाईकोर्ट में हम कंपनी के खिलाफ अर्जी दाखिल करेंगे।
-अरुण सूद, मेयर।
कोट
जेपी कंपनी ने 11 जुलाई से प्लांट बद करने का नोटिस दिया था। जबकि नियमों के अनुसार कंपनी ऐसा नहीं कर सकती है। जेपी प्लांट और निगम के बीच जो समझौता हुआ है उसके अनुसार प्लांट को शहर का कूड़ा निशुल्क ही प्रोसेस करना है।
-राजीव गुप्ता, नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर एवं एमओएच