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चार माह में अपग्रेड हो जाएगा कचरा निस्तारण प्लांट, 400 एमटी कचरे के निस्तारण का दावा
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चंडीगढ़। सेक्टर-25 स्थित कचरा निस्तारण प्लांट 4 महीने में अपग्रेड हो जाएगा। इसके बाद इसमें 400 मीट्रिक टन कचरा निस्तारित हो सकेगा। शुक्रवार को प्लांट को अपग्रेड करने के लिए लगाए गए टेंडर को खोला गया। इसमें एक कंपनी योग्य मिली है। निगम हर माह कंपनी को 6 करोड़ 20 लाख रुपये देगा। कचरा निस्तारण करने के बाद निकलने वाले कंपोस्ट और आरडीएफ का निस्तारण भी कंपनी को ही करना होगा।
आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि वर्तमान में प्लांट के अंदर सूखा कचरा न के बराबर निस्तारित हो रहा है। वहीं, गीला कचरा 120 टन प्रतिदिन निस्तारित हो रहा है। कंपनी को एक नई मशीन लगानी होगी, वहीं एक मशीन को अपग्रेड करना होगा। मशीन 2.52 करोड़ मशीनरी लगाने और 3.63 करोड़ अन्य कार्यों पर खर्च करेगी। यह टेंडर एक साल के लिए दिया गया है। काम की स्थिति को देखते हुए दो साल आगे कंपनी से अनुबंध बढ़ाया जा सकता है।
आयुक्त ने बताया कि इस प्लांट के लिए तीन कंपनियों ने आवेदन किया था। इनमें से एक कंपनी योग्य मिली। इसके लिए निगम ने 6.35 लाख हर साल के लिए निगम ने टेंडर लगाया था जिसके एवज में यह कंपनी तय की गई है। आयुक्त ने कहा कि 27 जून को बागवानी का कचरा निस्तारित करने वाला प्लांट लगाने के लिए टेंडर खुलने वाला है। इससे पहले हम अपने गीले व सूखे कचरे का भी अंदाजा लगा लेंगे।
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अभी हर दो से तीन घंटे में रोकनी पड़ती है मशीन
मशीनों की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर दो से तीन घंटे में मशीन गर्म हो जाती है। इसके बाद मशीन को रोकना पड़ता है। न रोकने की स्थिति में कई बार पट्टे में आग भी लग जाती है। पहले भी प्लांट में कचरे में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में मशीन पर बहुत ज्यादा बोझ नहीं डाला जा सकता है। दिनभर में लगभग 5 घंटे का ब्रेकडाउन होता ही है।
रुड़की आईआईटी ने मशीनें बदलने का दिया था सुझाव
जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की रिपोर्ट नगर निगम को देते हुए रुड़की आईआईटी ने कहा था कि प्लांट की मशीनों को हर हाल में बदलना ही होगा। हालांकि, कचरा निस्तारण की कुछ क्षमता बढ़ाने के लिए निगम को गीला-सूखा कचरा अलग-अलग लेना होगा। रिपोर्ट के अनुसार 2008 में मशीनों को म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के दिशा-निर्देशों के अनुसार लगाया गया था। इसके बाद अब म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 2016 के दिशा-निर्देश लागू हो चुके हैं। निगम को उसके अनुसार ही कचरे का निस्तारण कराना होगा। इसी तरह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर (एनआईटीटीटीआर) ने भी जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की सभी मशीनों को बदलने के लिए कहा था।
14 साल पुरानी हैं मशीनें, अब रिपेयरिंग की भी स्थिति नहीं
एनआईटीटीटीआर की रिपोर्ट में बताया गया था कि मशीनें 14 साल पुरानी टेक्नोलॉजी पर चल रही हैं। इस टेक्नोलॉजी की मशीनों को रिपेयर कराया जाएगा तब भी शत-प्रतिशत कचरा प्रोसेस नहीं कराया जा सकता है इसलिए मशीनों की रिपेयरिंग पर खर्चा करना ठीक नहीं। पुरानी मशीन होने के कारण बिजली की खपत भी ज्यादा है और कचरा प्रोसेस भी ठीक से नहीं हो रहा है।
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आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि वर्तमान में प्लांट के अंदर सूखा कचरा न के बराबर निस्तारित हो रहा है। वहीं, गीला कचरा 120 टन प्रतिदिन निस्तारित हो रहा है। कंपनी को एक नई मशीन लगानी होगी, वहीं एक मशीन को अपग्रेड करना होगा। मशीन 2.52 करोड़ मशीनरी लगाने और 3.63 करोड़ अन्य कार्यों पर खर्च करेगी। यह टेंडर एक साल के लिए दिया गया है। काम की स्थिति को देखते हुए दो साल आगे कंपनी से अनुबंध बढ़ाया जा सकता है।
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आयुक्त ने बताया कि इस प्लांट के लिए तीन कंपनियों ने आवेदन किया था। इनमें से एक कंपनी योग्य मिली। इसके लिए निगम ने 6.35 लाख हर साल के लिए निगम ने टेंडर लगाया था जिसके एवज में यह कंपनी तय की गई है। आयुक्त ने कहा कि 27 जून को बागवानी का कचरा निस्तारित करने वाला प्लांट लगाने के लिए टेंडर खुलने वाला है। इससे पहले हम अपने गीले व सूखे कचरे का भी अंदाजा लगा लेंगे।
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अभी हर दो से तीन घंटे में रोकनी पड़ती है मशीन
मशीनों की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर दो से तीन घंटे में मशीन गर्म हो जाती है। इसके बाद मशीन को रोकना पड़ता है। न रोकने की स्थिति में कई बार पट्टे में आग भी लग जाती है। पहले भी प्लांट में कचरे में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में मशीन पर बहुत ज्यादा बोझ नहीं डाला जा सकता है। दिनभर में लगभग 5 घंटे का ब्रेकडाउन होता ही है।
रुड़की आईआईटी ने मशीनें बदलने का दिया था सुझाव
जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की रिपोर्ट नगर निगम को देते हुए रुड़की आईआईटी ने कहा था कि प्लांट की मशीनों को हर हाल में बदलना ही होगा। हालांकि, कचरा निस्तारण की कुछ क्षमता बढ़ाने के लिए निगम को गीला-सूखा कचरा अलग-अलग लेना होगा। रिपोर्ट के अनुसार 2008 में मशीनों को म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के दिशा-निर्देशों के अनुसार लगाया गया था। इसके बाद अब म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 2016 के दिशा-निर्देश लागू हो चुके हैं। निगम को उसके अनुसार ही कचरे का निस्तारण कराना होगा। इसी तरह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर (एनआईटीटीटीआर) ने भी जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की सभी मशीनों को बदलने के लिए कहा था।
14 साल पुरानी हैं मशीनें, अब रिपेयरिंग की भी स्थिति नहीं
एनआईटीटीटीआर की रिपोर्ट में बताया गया था कि मशीनें 14 साल पुरानी टेक्नोलॉजी पर चल रही हैं। इस टेक्नोलॉजी की मशीनों को रिपेयर कराया जाएगा तब भी शत-प्रतिशत कचरा प्रोसेस नहीं कराया जा सकता है इसलिए मशीनों की रिपेयरिंग पर खर्चा करना ठीक नहीं। पुरानी मशीन होने के कारण बिजली की खपत भी ज्यादा है और कचरा प्रोसेस भी ठीक से नहीं हो रहा है।