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जगरांव में कूड़ा संकट: सफाई कर्मचारी कूड़ा उठाने से इनकार, नगर काउंसिल फेल
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अतुल मल्होत्रा
जगरांव। शहर में कूड़े का संकट विकराल रूप ले चुका है। सफाई कर्मचारी साफ शब्दों में कह चुके हैं कि जब तक कूड़ा फेंकने के लिए ठोस जगह नहीं मिलेगी, वे कूड़ा नहीं उठाएंगे। नतीजा यह है कि जगरांव धीरे-धीरे खुले में सड़ने लगा है।
नगर काउंसलि की नाकामी अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कौंसिल दफ्तर के भीतर भी कूड़ा जमा हो गया है। काउंसिल परिसर कूड़े के ढेरों से भर गया, जिससे जहरीली बदबू फैल गई और पास के अस्पताल में मरीजों और स्टाफ को परेशानी हुई। डॉक्टरों ने जबरदस्ती कचरा फेंकने पर रोक लगाई।
सफाई कर्मचारी भी खुलकर कह चुके हैं कि अगर कूड़े के लिए ठोस इंतजाम नहीं हुआ, तो घर-घर से कचरा उठाना बंद रहेगा। पंजाब सफाई सेवक यूनियन के जिला अध्यक्ष अरुण गिल ने कहा कि अधिकारी समस्या का समाधान करने के बजाय सिर्फ कचरे को परिसर में फेंकने लगे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दो-चार दिन में ठोस इंतजाम नहीं किए गए, तो सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी।
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वैज्ञानिक निपटारा जरूरी
स्वच्छता संघ के सचिव राजिंदर कुमार, अध्यक्ष सनी सुंदर, प्रदीप कुमार, संदीप कुमार, सुरजीत सिंह, बिक्रम गिल सिंह समेत बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी मौजूद रहे। पूर्व काउंसिल प्रधान जतिंदरपाल राणा ने कहा कि अगर कचरे का वैज्ञानिक निपटारा और रीसाइक्लिंग की व्यवस्था होती, तो जगरांव कब का कचरा-मुक्त शहर बन चुका होता। अफसरों की लापरवाही और अनियमितता ने शहर को बदबू, बीमारी और बेहाल जीवन का दंश दिया है। नगर काउंसिल की यह विफलता शहरवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे प्रभावित कर रही है। संवाद
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जगरांव। शहर में कूड़े का संकट विकराल रूप ले चुका है। सफाई कर्मचारी साफ शब्दों में कह चुके हैं कि जब तक कूड़ा फेंकने के लिए ठोस जगह नहीं मिलेगी, वे कूड़ा नहीं उठाएंगे। नतीजा यह है कि जगरांव धीरे-धीरे खुले में सड़ने लगा है।
नगर काउंसलि की नाकामी अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कौंसिल दफ्तर के भीतर भी कूड़ा जमा हो गया है। काउंसिल परिसर कूड़े के ढेरों से भर गया, जिससे जहरीली बदबू फैल गई और पास के अस्पताल में मरीजों और स्टाफ को परेशानी हुई। डॉक्टरों ने जबरदस्ती कचरा फेंकने पर रोक लगाई।
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सफाई कर्मचारी भी खुलकर कह चुके हैं कि अगर कूड़े के लिए ठोस इंतजाम नहीं हुआ, तो घर-घर से कचरा उठाना बंद रहेगा। पंजाब सफाई सेवक यूनियन के जिला अध्यक्ष अरुण गिल ने कहा कि अधिकारी समस्या का समाधान करने के बजाय सिर्फ कचरे को परिसर में फेंकने लगे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दो-चार दिन में ठोस इंतजाम नहीं किए गए, तो सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी।
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वैज्ञानिक निपटारा जरूरी
स्वच्छता संघ के सचिव राजिंदर कुमार, अध्यक्ष सनी सुंदर, प्रदीप कुमार, संदीप कुमार, सुरजीत सिंह, बिक्रम गिल सिंह समेत बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी मौजूद रहे। पूर्व काउंसिल प्रधान जतिंदरपाल राणा ने कहा कि अगर कचरे का वैज्ञानिक निपटारा और रीसाइक्लिंग की व्यवस्था होती, तो जगरांव कब का कचरा-मुक्त शहर बन चुका होता। अफसरों की लापरवाही और अनियमितता ने शहर को बदबू, बीमारी और बेहाल जीवन का दंश दिया है। नगर काउंसिल की यह विफलता शहरवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे प्रभावित कर रही है। संवाद