‘गंगापुत्र’ हुड्डा अब यमुना के मैदान पर आजमाएंगे भाग्य
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प्रदेश के मुख्यमंत्री व ‘गंगापुत्र’ भूपेंद्र सिंह हुड्डा अब यमुना की धरती पर अपना भाग्य आजमाने की तैयारी कर रहे हैं। गंगा को अपने लिए वरदान मानने वाले हुड्डा को यकीन है कि गंगा मैया की तरह ही यमुना की धरती भी उन्हें जीत का वरदान देगी।
इस बार विधानसभा चुनाव में सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने गढ़ किलोई के साथ साथ करनाल के हलके इंद्री से ताल ठोक सकते हैं। खुद हुड्डा के साथ-साथ सांसद दीपेंद्र व उनके अन्य समर्थकों ने इस बात पर मुहर लगा दी है। अब केवल कांग्रेस पार्टी की तरफ से घोषणा मात्र बाकी है।
दो स्थानों से चुनाव लड़ने की इच्छा
हुड्डा अपने गढ़ किलोई को अभेद्य मानते हैं और इस बार वे दो स्थानों से चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं। इनमें सीएम के लिए सबसे सेफ इंद्री विधानसभा क्षेत्र बताया जा रहा है। सीएम हुड्डा के इंद्री विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर एक तीर से कई निशाने साधना चाहते हैं। पहला वे यहां से चुनाव लड़कर खुद को उत्तरी हरियाणा का बताने की कोशिश करेंगे और यहां भेदभाव के आरोपों मिटाना चाहते हैं। दूसरा, आसपास की सीटों को भी प्रभावित करने की रणनीति बना रहे हैं।
पिछले दस साल से भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर क्षेत्रवाद के आरोप लगते रहे हैं। खासकर उत्तरी हरियाणा के नेताओं ने उन पर खूब हमले किए हैं। इनमें पूर्व सांसद अरविंद शर्मा, बीरेंद्र सिंह, वीरेंद्र मराठा, विनोद शर्मा समेत अन्य नेता उत्तरी हरियाणा की अनदेखी के आरोप लगाते रहे हैं। तीसरी बार सत्ता में आने के लिए सीएम अपने क्षेत्र रोहतक के साथ साथ जीटी रोड बेल्ट को अपने साथ जोड़ने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
असंध विधानसभा क्षेत्र भी सेफ
हालांकि, गुप्तचर विभाग द्वारा इंद्री के साथ साथ असंध विधानसभा क्षेत्र को भी सीएम के लिए सेफ बताया जा रहा है। सीएम की एक टीम इंद्री सर्वे भी कर चुकी है और रिपोर्ट ओके दी है। रिपोर्ट के बाद खुद सीएम इंद्री विधानसभा से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। हालांकि, हुड्डा का विरोधी गुट इसका विरोध कर रहा है।
अगर सीएम यहां से चुनाव लड़ते हैं तो इंद्री विधानसभा से संभावित कांग्रेस प्रत्याशी व पूर्व विधायक भीम सेन मेहता को यह सीट छोड़नी पड़ेगी, इसलिए यहां पर मतदाताओं व समर्थकों में जरूर बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा उठ सकता है।
उधर, एक पक्ष असंध में जाट मतदाताओं की संख्या ज्यादा होने के कारण इस सीट को भी सीएम के लिए आप्शन के तौर पर रखा गया है। इस बारे में सीएम के नजदीकी कांग्रेसी नेता ने पुष्टी करते हुए बताया कि संभावना है कि सीएम इंद्री से चुनाव लड़ने को तैयार हैं, बस घोषणा का इंतजार है।
जाट नेताओं को नहीं भाता इंद्री
इंद्री विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा कांबोज बिरादरी है। जाट समुदाय के लोग यहां पर इतनी संख्या में नहीं है कि यहां पर किसी प्रत्याशी के भाग्य का फैसला कर सकें। इसके साथ ही यहां पर कोई भी बिरादरी हावी नहीं है, यहां पर सभी जातियों के मतदाता बराबर की संख्या में हैं।
आंकड़े इस बात के भी गवाह हैं कि यहां से केवल एक मात्र जाट उम्मीदवार प्रसन्नी देवी विधायक बनी हैं, उसके बाद किसी भी जाट नेता की यहां से तकदीर नहीं खुली। फिलहाल यहां से इनेलो के डा. अशोक कश्यप विधायक हैं। बावजूद इसके सीएम हुड्डा से रोहतक के बाद उत्तरी हरियाणा की राजनीति को प्रभावित करने को आतुर हैं।
बाहरी लोगों को गले लगाती है करनाल की धरती
बाहरी लोगों को गले लगाने की करनाल की धरती की फितरत को देखते हुए सीएम भी यहीं पर दांव खेलना चाह रहे हैं।
लोकसभा में बाहरी होते हुए भी अश्वनी चोपड़ा को मिली साढ़े तीन लाख मतों की जीत को देखते हुए जहां भाजपा करनाल से मनोहरलाल खट्टर को विधानसभा मैदान में उतार सकती है।
इससे पहले, बाहरी होते हुए करनाल ने अरविंद शर्मा को दो बार संसद में भेजा। इससे पहले की बात करें तो चिरंजीलाल शर्मा को चार बार विजयी बनाया। लोगों को नम्र स्वभाव को देखते हुए ही यमुना की धरती से जीत का सपना देख रहे हैं।
इसलिए हुड्डा को कहते हैं गंगा पुत्र
जुलाई 2003 में हुड्डा अपने चचेरे भाई राजेंद्र हुड्डा और कुछ अन्य सहयोगियों के साथ हरिद्वार से जा रहे थे तभी एक छोटी नदी में बाढ़ आ गई, जिसकी चपेट में उनका काफिला आ गया।
उसमें सभी लोग बहका गंगा नदी में पहुंच गए। इस हादसे में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तो बच गए लेकिन उनके भाई का पता नहीं चला। तब से हुड्डा अपने आप को गंगा मैया का पुत्र भी कहते हैं।