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Hindi News ›   Chandigarh ›   Ganesh Chaturthi, Ganesh Utsav, Ganpati statue creation by clay in Zirakpur

कोरोना का असर: अबकी बार बड़ी नहीं छोटी बनाई जाएंगी गणपति मूर्तियां, घरों में विसर्जन की तैयारी

Thu, 23 Jul 2020 03:49 PM IST
ajay kumar अरविंद बाजपेयी, अमर उजाला, जीरकपुर (पंजाब)
अरविंद बाजपेयी, अमर उजाला, जीरकपुर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Thu, 23 Jul 2020 03:49 PM IST
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Ganesh Chaturthi, Ganesh Utsav, Ganpati statue creation by clay in Zirakpur
फाइल फोटो

अबकी बार गणेश उत्सव के दौरान पीओपी की जगह मिट्टी से बनाए गए गणपति ही घर में विराजेंगे। इस बार शहर में न तो बड़े आकार की मूर्तियां बनाई जाएंगी, और न ही प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां। घर में स्थापित होने वाले गणेश जी की मूर्ति विशुद्ध मिट्टी की होगी। इसका उद्देश्य है कि अगर कोई चाहे तो गणेश जी का विसर्जन घर में ही कर सकें।

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कोविड-19 के चलते इस बार गणेश जी की स्थापना सिर्फ घरों में ही होगी। यहीं वजह है कि गणपति की मूर्तियां बनाने वाले कलाकारों ने तैयारी तो शुरू कर दी है, पर यह कलाकार मूर्तियां सिर्फ तीन फुट तक ही बना रहे हैं। ज्यादातर मूर्तिकार प्रतिमाओं की लंबाई तीन फुट तक ही रख रहे हैं। वहीं, मूर्तिकारों की मानें तो गणेश उत्सव के दौरान बड़ी प्रतिमाओं की स्थापना अबकी बार नहीं की जाएगी। इसी वजह से सभी जगह सिर्फ तीन फुट की मूर्तियां बनाई जा रही हैं।
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जीरकपुर में गणेश जी की मूर्तियां बनाने वाले राजस्थान के मूर्तिकार फूलचंद ने बताया कि उन्होंने अपने नियमित ग्राहकों से प्रतिमाओं के लिए जब बात की तो ज्यादातर ने मिट्टी की मूर्तियां बनाने को ही कहा। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के कारण ऐसा हुआ है। गणेश उत्सव 22 अगस्त से होगा। पिछले साल 22 जुलाई तक उनके पास करीब एक हजार से ज्यादा मूर्तियां बनाने के ऑर्डर आ चुके थे लेकिन अबकी बार ऑर्डर अभी नहीं लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 5 अगस्त से बुकिंग की शुरुआत की जाएगी। 
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फूलचंद ने बताया कि पहले ज्यादातर मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस की बनाई जाती थीं। अबकी बार यह ट्रेंड चेंज किया गया है। उन्होंने कहा कि इसकी वजह है कि कुछ लोग गणपति विसर्जन घर पर ही करना चाहते हैं। इसी वजह से वह मिट्टी की मूर्तियों की मांग कर रहे हैं।


इस बार होगा मूर्तिकारों का नुकसान
मूर्तिकार फूलचंद ने बताया कि अबकी बार मूर्तिकारों का लाखों रुपये का नुकसान होना तय है। इसकी वजह है कि बड़ी मूर्तियों की स्थापना नहीं होगी। छोटी मूर्तियों की भी कितनी मांग होगी है यह अभी तय नहीं है। इसी वजह से अबकी बार उन्होंने तीन हजार मूर्तियां ही बनवाई हैं। उन्होंने बताया कि यहां से हिमाचल, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के साथ जीरकपुर के लोग भी मूर्तियां लेकर जाते थे। इस बार इसकी उम्मीद कम ही नजर आ रही है।

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