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Ganesh Chaturthi 2022: गणेश चतुर्थी का पर्व आज, जानें- शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Wed, 31 Aug 2022 10:27 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 31 Aug 2022 10:27 AM IST
सार

आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि बुधवार सुबह 6:05 बजे से दोपहर बाद 3:32 बजे तक गणपति की मूर्ति स्थापना का समय रहेगा। इस बार बुधवार के दिन चतुर्थी पड़ने और रवि योग का होना अद्भुत संयोग है। इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

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Ganesh Chaturthi 2022: Know about Ganpati Sthapana Muhurat and Pooja Vidhi
शिव बैकुंठ धाम में भगवान गणेश की मूर्ति को अंतिम रूप देता कलाकार। - फोटो : अमर उजाला ( फोटो- अजय वर्मा)

विस्तार

10 दिवसीय गणेश उत्सव बुधवार से शुरू हो रहा है। घरों और पंडालों में प्रथम पूज्य गणपति की स्थापना के साथ विधिविधान से पूजा शुरू होगी। 10 दिन तक आराधना के बाद अनंत चतुर्दशी को भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन होगा। चंडीगढ़ में गणेशोत्सव की तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं। श्री देवालय पूजक परिषद के संरक्षक और सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि भगवान गणेश धन, ज्ञान, सुख और समृद्धि के देवता हैं। 

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वह विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य भी हैं। भगवान गणेश की आराधना के लिए गणेश चतुर्थी का पर्व महत्वपूर्ण होता है। हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन सिद्धिविनायक व्रत भी किया जाता है। आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि चतुर्थी मंगलवार दोपहर बाद 3:32 बजे से शुरू होकर बुधवार दोपहर बाद 3:22 बजे तक रहेगी। सूर्योदय व्यापिनी चतुर्थी बुधवार को होगी इसलिए इसी दिन व्रत रखा जाएगा। साथ ही गणपति की मूर्ति की स्थापना के साथ गणेश उत्सव प्रारंभ हो जाएगा। 10 दिन बाद नौ सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन मूर्तियों का विसर्जन होगा।
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ऐसे करें विघ्नहर्ता की पूजा
प्रात: काल नित्य कर्म से निवृत्त होकर पूजा घर में जाएं। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछा लें। गणेश जी की स्थापना के बाद पूजा व व्रत का संकल्प लें। सर्वप्रथम गणेशजी का ध्यान करें, फिर पूजा शुरू करें। पूजा में सर्वप्रथम गंगा जल से गणेशजी का अभिषेक करें। फिर पंचामृत व शुद्ध जल से उन्हें स्नान कराएं। इसके बाद वस्त्र, जनेऊ, तिलक, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, फूल माला, धूप, दीप, नैवेद्य प्रसाद, मोदक, पान, सुपारी, फल, दक्षिणा आदि गणपति जी को अर्पित करें। आरती उतारें। नमस्कार करें एवं पुष्पांजलि दें।

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गणपति स्थापना के लिए मुहूर्त देख लें
आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि बुधवार सुबह 6:05 बजे से दोपहर बाद 3:32 बजे तक गणपति की मूर्ति स्थापना का समय रहेगा। इस बार बुधवार के दिन चतुर्थी पड़ने और रवि योग का होना अद्भुत संयोग है। इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

  • शुभ मुहूर्त प्रात: 6:05 से 9:27 बजे तक 
  • कन्या व तुला लग्न प्रात: 9:15 से 11:00 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त व वृश्चिक लग्न प्रात: 11:05 से दोपहर 1:30 तक 
  • विजय मुहूर्त दोपहर 2:5 बजे से 2:56 बजे तक 
  • गोधूलि मुहूर्त शाम 05:38 से 06:26 तक 
  • रवि योग प्रात: 6:05 से प्रारंभ होकर पूरे दिन रहेगा


दिन का श्रेष्ठ चौघड़िया 

  • लाभ चौघड़िया, प्रात: 06:12 से 07:46 तक 
  • अमृत चौघड़िया, प्रात: 07:46 से 09:19 तक 
  • शुभ चौघड़िया, सुबह 10:53 से 12:27 तक 
  • लाभ चौघड़िया शाम को 05:08 से 06:41 तक
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