चंडीगढ़: एस्टेट ऑफिस की कार्यप्रणाली से लोग परेशान, लगातार चक्कर लगाने के बाद भी नहीं होता काम
एस्टेट ऑफिस में लीज मनी और दूसरे चार्जेस के लिए गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) इनवॉयस जारी करने का सिस्टम नहीं है। जीएसटी रूल्स के तहत यह अलॉटी या प्रॉपर्टी होल्डर से जीएसटी अमाउंट क्लेम करने के लिए अनिवार्य है।
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कई साल गुजर गए, न जाने कितने अफसर आए और गए लेकिन चंडीगढ़ का एस्टेट ऑफिस नहीं बदला। एक छोटे काम के लिए लोगों को महीनों से सालों तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार लोग पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट जाते हैं, तब जाकर एक छोटा काम हो पाता है। डिजिटलाइजेशन का जो काम जून में पूरा होना था, अब तक पूरा नहीं हुआ है। विभाग की कार्यप्रणाली से शहर के आम नागरिक से लेकर उद्योगपति तक परेशान हैं।
एस्टेट ऑफिस में रोजाना परेशान होने वाले लोगों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है, न ही एस्टेट ऑफिस ने खुद को बदलने की कोशिश की है। हर फरियादी की यही शिकायत है कि एस्टेट ऑफिस में एक काम कराने के लिए कई साल चक्कर काटने पड़ते हैं। कोई सुनवाई नहीं होती है। कर्मचारी न तो ठीक से बात करते हैं, न ही समय पर काम करते हैं। एक बिल्डिंग प्लान को पास करने में साल लग जाते हैं। बेवजह की आपत्तियां जोड़ कर लोगों को परेशान किया जाता है और फिर उस आपत्ति को दूर करने के लिए पैसों की मांग की जाती है। आज के समय में भी शहर के उद्योगपति लीज मनी को ऑनलाइन जमा कराने की सुविधा देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जब सब कुछ ऑनलाइन है तो लीज मनी आज भी ड्राफ्ट के जरिए ली जाती है। काम की इन्हीं दिक्कतों से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस वर्ग में चंडीगढ़ लगातार पिछड़ रहा है। हर साल रैंकिंग नीचे गिर रही है।
एस्टेट ऑफिस में लीज मनी और दूसरे चार्जेस के लिए गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) इनवॉयस जारी करने का सिस्टम नहीं है। जीएसटी रूल्स के तहत यह अलॉटी या प्रॉपर्टी होल्डर से जीएसटी अमाउंट क्लेम करने के लिए अनिवार्य है। जीएसटी रूल्स की इस वायलेशन को एस्टेट ऑफिस और जीएसटी डिपार्टमेंट के संज्ञान में भी लाया गया, लेकिन किसी ने कोई कदम नहीं उठाया। चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज ने इसे लेकर कई बार एडवाइजर और एस्टेट ऑफिस को चिट्ठी लिखी है।
एस्टेट ऑफिस पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी- तुम मुझे चेहरा दिखाओ, मैं नियम दिखाऊंगा
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में चंडीगढ़ एस्टेट ऑफिस को जमकर फटकार लगाई थी। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने अपने आदेश में यहां तक लिखा कि तुम मुझे चेहरा दिखाओ, मैं नियम दिखाऊंगा, ये एस्टेट ऑफिस की कार्यप्रणाली है। आदेश में लिखा कि प्रशासन में कठिनाई यह है कि चंडीगढ़ प्रशासन में वरिष्ठ अधिकारी पंजाब या हरियाणा राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर हैं। लगभग तीन वर्ष की प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी करने के बाद अधिकारी अपने मूल कैडर में वापस आ जाते हैं।
प्रशासन ने चंडीगढ़ को सिटी ब्यूटीफुल के रूप में बनाए रखने के लिए अच्छा कार्य किया है, लेकिन एस्टेट ऑफिस अंडरबेली है, यानी अधिकारियों की कार्रवाई को प्रमाणिक नहीं कहा जा सकता है। दूसरी ओर, अधिकारी ऐसे निर्णय लेने में असमर्थ हैं, जो नागरिक हितैषी हों। यहां तक कि एस्टेट ऑफिस के कामकाज में आ रही बाधाओं को दूर करने का भी प्रयास नहीं किया जाता है। लीज होल्ड संपत्ति की बिक्री के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की मांग करते समय चंडीगढ़ के निवासियों को काफी परेशान किया जाता है क्योंकि एनओसी और अनर्जित वृद्धि जमा करने की प्रक्रिया विभिन्न अधिकारियों द्वारा अलग-अलग तरीकों से बताई जाती है, जिसे प्रशासन के अधिकारी नियंत्रित करने में विफल रहे हैं।
भ्रष्टाचार का भी बोलबाला
एस्टेट ऑफिस में भ्रष्टाचार का भी काफी बोलबाला है। हाल ही में आठ सितंबर को दोपहर 1.45 बजे लंच टाइम के दौरान जेई ने चीफ इंजीनियर दफ्तर के स्थापना शाखा (एस्टेब्लिशमेंट ब्रांच) में मोबाइल से गोपनीय दस्तावेजों की फोटो खींची। वहां तैनात अधिकारी ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। सीसीटीवी कैमरों से भी इसकी पुष्टि हुई। प्रशासन ने इसे बेहद गंभीर मामला माना और चीफ इंजीनियर ने उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। वीआईपी कोठी की फाइल जलाने का मामला भी अहम है। वहीं, जनवरी 2019 में दो प्लांट मर्ज करने के मामले में तीन अफसरों समेत 9 पर केस दर्ज किया गया था।
उद्योगपतियों से जुड़े बड़े फैसले आज तक लंबित
- अनर्जित लाभ का कोई रेट तय नहीं, कलेक्टर रेट के हिसाब से ही चल रही वसूली
- लीज मनी का बिल जारी करने की मांग, ऑनलाइन जमा कराने का प्रावधान नहीं
- साल गुजर जाते हैं, नहीं होते नक्शे पास
- जीएसटी जमा कराने पर नहीं मिलती इनवॉइस
- लीज होल्ड से फ्री होल्ड कन्वर्जन लंबित
- नीड बेस्ड चेंजेज की रेगुलराइज पॉलिसी लंबित
- इंडस्ट्रियल पॉलिसी के बिंदुओं को नहीं किया गया लागू
एस्टेट ऑफिस में डिजिटलाइजेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसके शुरू होने के बाद से काफी पारदर्शिता आएगी और लोगों को भी राहत मिलेगी। आने वाले दिनों में विभाग कई बदलाव करेगा, जिससे लोगों को कई सहूलियतें मिलेंगी। - हरजीत सिंह संधू, असिस्टेंट एस्टेट आफिसर