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Hindi News ›   Chandigarh ›   Friendship Day: Friendship of two doctors strengthened during Corona crisis

Friendship Day: न खून का रिश्ता...न रिवाज से बंधा फिर भी जिंदगीभर का साथ जुड़ा

Sun, 01 Aug 2021 11:22 AM IST
ajay kumar वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 01 Aug 2021 11:22 AM IST
सार

डॉ. नीरज और डॉ. अनिल की दोस्ती 24 साल पुरानी है। सुख-दु:ख में दोनों साथ रहते हैं। 1997 में दोनों की दोस्ती पंजाब के रूपनगर से शुरू हुई थी। कोरोना संकट में जहां अपनों ने लोगों का साथ छोड़ना शुरू कर दिया तो वहीं डॉ नीरज और डॉ अनिल की दोस्ती और भी प्रगाढ़ हुई। 

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Friendship Day: Friendship of two doctors strengthened during Corona crisis
चंडीगढ़ के डॉ. नीरज रूपनगर में रहने वाले दोस्त डॉ. अनिल के साथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कहते हैं दोस्ती का रिश्ता सबसे गहरा और अजीज होता है। यह सही चरितार्थ किया है डॉ. नीरज गुप्ता और डॉ. अनिल दीवान ने। दोनों की पहली मुलाकात 24 साल पहले रूपनगर के सिविल अस्पताल में हुई थी। डॉ. नीरज हड्डी और डॉ. अनिल वहां बालरोग विशेषज्ञ के तौर पर तैनात थे।

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ड्यूटी के दौरान हुई चंद मुलाकातों से इन दोनों के बीच इतना अच्छा सामंजस्य बैठा कि एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त बन गए। 1997 में शुरू हुआ दोस्ती का सफर कोरोना काल में और मजबूत हुआ है। डॉ. नीरज अभी चंडीगढ़ और डॉ. अनिल रूपनगर में प्रैक्टिस करते हैं। डॉ. नीरज ने बताया कि डॉ. अनिल उनके लिए कोविड के दौरान फरिश्ता साबित हुए।
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डॉ. नीरज की पत्नी डॉ. चारू के कोरोना संक्रमित होने पर डॉ. अनिल ने अपने परिवार की चिंता किए बिना सारा कामकाज छोड़कर दिन-रात उनके इलाज की व्यवस्था करवाई। सितंबर 2020 में जब कोरोना अपने चरम पर था, उस दौरान डॉ. नीरज संक्रमित पत्नी के इलाज के लिए परेशान थे। संक्रमण का स्तर गंभीर होने के कारण उन्हें पीजीआई रेफर किया गया लेकिन बेड न मिलने के कारण वह वहां भर्ती नहीं हो पाईं। उस समय डॉ. नीरज और उनके दोनों बच्चे बेहद तनाव में थे।
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इसकी सूचना डॉ. अनिल को मिली तो वे प्रैक्टिस छोड़कर चार लाख रुपये लेकर सीधे चंडीगढ़ पहुंचे। डॉ. नीरज के पूरे परिवार को लेकर लुधियाना गए। वहां इलाज का पूरा प्रबंध कर वे डॉ. नीरज के बच्चों के साथ गेस्ट हाउस में ठहरे। स्थिति नियंत्रित होने पर उनके दोनों बच्चों को लेकर चंडीगढ़ लौट आए। उसके बाद उन्होंने डॉ. नीरज के चंडीगढ़ लौटने तक उनके घर व बच्चों की एक अभिभावक के रूप में देखभाल की। 

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