साथी सैनिक ने बताया, कैसे शहीद हुआ सतीश?
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जम्मू के कठुआ इलाके में आतंकी हमले में शहीद हुए सतीश के साथी सैनिक ने शहादत की असली वजह बताई। सतीश के पार्थिव शरीर के साथ जींद के छात्तर गांव आए सतीश के साथी सिपाही संदीप कुमार ने बताया कि आतंकी फौजी बन कर आए और पुलिस स्टेशन को शिकार बनाया। संदीप के अनुसार कुछ लोग एक गाड़ी में सवार होकर पुलिस थाने आए। इन लोगों ने पुलिस कर्मियों को कहा कि उन्होंने एक तस्कर को पकड़ा है। यह कहते हुए ये लोग थाने के अंदर घुस आए और फायरिंग शुरू कर दी।
जिस समय आतंकवादियों ने हमला किया, पुलिस थाने के ऊपर बने एक कमरे में ही सतीश व उसका दोस्त अख्तर अली ड्यूटी के लिए तैयार हो रहे थे। यहां आतंकवादियों से लोहा लेते हुए सतीश शहीद हो गया।
घर से लेकर श्मशान घाट तक लोगों की भीड़
सतीश के पार्थिव शरीर के साथ आए उनके साथियों ने बताया कि उन्हें इस बात का गर्व है कि सतीश जैसे निडर सैनिक के साथ रहने का मौका मिला है। सतीश के साथी सिपाही संदीप कुमार ने बताया कि वह बहुत ही अच्छे स्वभाव का व्यक्ति था। हर धर्म के व्यक्ति के साथ वह घुल मिलकर रहता था और उसी की बटालियन 121 में अख्तर अली उसका सबसे अच्छा दोस्त था।
सतीश की शहादत से जहां गांव के लोगों का सीना गर्व से फूले नहीं समा रहा, वहीं उनके जाने का गम पूरे क्षेत्र को है। यही कारण रहा कि उसके घर से लेकर श्मशान घाट तक लोगों की भीड़ लगी थी। क्षेत्र के लोग व रिश्तेदार सुबह से ही सतीश के घर जुटना शुरू हो गए थे, लेकिन सीआरपीएफ की गाड़ी दोपहर बाद करीब दो बजे उसके पार्थिव शरीर को लेकर आई।
सजल आंखों से शहीद को अंतिम विदाई
देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए मातृभूमि पर अपने प्राण न्यौछावर करने वाले छात्तर गांव के वीर सपूत सतीश को पूरे गांव सहित क्षेत्र के हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इस दौरान क्षेत्र की विधायक प्रेमलता, जुलाना के विधायक परमेंद्र सिंह ढुल, नरवाना के विधायक पिरथी नंबरदार, पूर्व विधायक भाग सिंह छात्तर भी मौजूद रहे। शनिवार दोपहर बाद उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।