जेल में बंद कैदियों को दीवाली का तोहफा, घरवालों से बातें फ्री
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बुड़ैल जेल के कैदी यहां के लैंडलाइन से अपने परिजनों से एक हफ्ते में दस मिनट तक बात कर सकेंगे। पहले पांच मिनट फ्री व फिर पांच मिनट चार्जेबल कॉलिंग होगी। इससे पहले एक सप्ताह में प्रति कैदी पांच मिनट चार्जेबल कॉलिंग मिलती थी। यह पुष्टि आईजी जेल एएस चीमा ने की है।
प्रति कैदी दो नंबर रजिस्टर्ड
बुड़ैल जेल में परिजनों के बातचीत करने के लिए कैदियों की एक लिस्ट बनाई गई है। प्रत्येक कैदी के दो नंबर वेरिफिकेशन करके पुलिस रजिस्टर्ड करती है। कैदी इन्हीं दो रजिस्टर्ड नंबरों पर परिजनों से बातचीत कर सकते हैं। सिर्फ पोस्टपोड नंबर ही पुलिस रजिस्टर्ड करती है।
लैंडलाइन की संख्या हुई चार
बुडै़ल जेल में यूटी पुलिस ने कैदियों की परिजनों से बातचीत करवाने के लिए दो लैंडलाइन लगाए थे। इन पर लंबी लाइन लग जाती थी। इस दिवाली पर विभाग ने दो और नए लैंडलाइन लगवा दिए हैं।
साढ़े आठ लाख की लागत से बैरकों में लगी एलसीडी
जेल में कैदियों के नाम के अल्फावेट से लैंडलाइन पर बात करने का समय निर्धारित किया जाता है। नाम के आधार पर कैदियों का नंबर आता है।
इससे पहले कैदियों के बैरक में छोटे साइज यानी 22 इंच के टेलीविजन लगे थे। बैरक बड़ा होने की वजह से पीछे के कैदियों को टेलीविजन दिखाई नहीं देता था।
इस वजह से कैदियों में आपसी मनमुटाव भी हो जाता था। उनकी समस्याओं को देखते हुए यूटी पुलिस ने दीवाली पर साढ़े आठ लाख की लागत में कुल 13 एलसीडी टेलीविजन बैरकों में लगवा दिए। ये एलसीडी बैरकों की साइज के हिसाब से अलग-अलग साइज के हैं।
एएस चीमा, आईजी, जेल ने बताया कि बुड़ैल जेल के कैदियों को दीपावली का तोहफा उनके परिजनों के बातचीत का टाइमिंग बढ़ाकर दिया गया है। इसके अलावा साढ़े आठ लाख की लागत से उनके बैरकों के टेलीविजन को चेंज करवा दिया गया है।