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RLA17 में फर्जी दस्तावेजों पर पंजीकृत हुआ चोरी का वाहन, और अब दब गया केस क्योंकि...

Thu, 15 Nov 2018 12:52 PM IST
अविनाश शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
अविनाश शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 15 Nov 2018 12:52 PM IST
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Fraud in RLA Sector 17 Chandigarh, Vehicles Ragistering on Fake Documents
चंडीगढ़ RLA ऑफिस में लगी भीड़ - फोटो : amar ujala
चंडीगढ़ के पते पर खरीदे जा रहे वाहन आरएलए-17 में रजिस्टर्ड होते हैं। लेकिन इसके अलावा चोरी हुए वाहन भी असल मालिक के नाम से किन्हीं अन्यों के नाम पर ट्रांसफर हो रहे हैं। बीते अक्टूबर महीने में ऐसा ही एक मामला सामने आने पर जांच शुरू की गई लेकिन पूर्व आरएलए राकेश पोपली के चार्ज छोड़ते ही इस चौकानें वाले मामले की जांच भी थम गई। हैरत की बात यह है कि जनवरी 2014 में एक बुलेट मोटरसाइकिल नंबर सीएच04एफ-4938 को सेक्टर-22 से चोरी किया गया। बीते अक्टूबर महीने में यह बुलेट चंडीगढ़ में दौड़ती नजर आई।
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बाइक के मालिक लखबीर सिंह ने अपनी बुलेट देखते ही सेक्टर-17 थाना पुलिस को सूचित किया। लेकिन शुरूआती एक सप्ताह लखबीर सिंह की शिकायत थाना-17 के पूर्व एसएचओ के टेबल पर पड़ी रही। लखबीर सिंह उच्चाधिकारियों के पास पहुंचे, तब जाकर उनकी शिकायत पर कार्रवाई हुई। लेकिन फिर भी पुलिस ने उस आरोपी शख्स के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार नहीं किया, जिनके नाम पर चोरी हुई बुलेट रजिस्टर्ड थी। पुलिस ने कमलजीत नामक केवल एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। जबकि कमलजीत उक्त बुलेट संजय नामक व्यक्ति को भी बेच चुका था।
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इसके बाद बुलेट सेक्टर-21 के एक नामचीन कारोबारी के नाम पर रजिस्टर्ड हुई थी। लेकिन पुलिस ने चोरों के पूरे नेटवर्क के पीछे पड़ने के बजाय केवल एक आरोपी को गिरफ्तार कर मामले को रफा-दफा कर दिया था। जबकि आरोपी से पूछताछ के दौरान पुलिस को पता लगा था कि बुलेट चोरी करने के बाद उसे मोहाली और पंजाब के अन्य जिलों में घुमाया गया था। मामले में सुनील, संजय और स्वीट्स के नामचीन कारोबारी का नाम सामने आने पर भी उनकी भूमिका की तह तक जांच नहीं की गई।
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आरएलए का चार्ज बदला, कैसे बनी आरसी नहीं लगा पता
उक्त मामले के सामने आने के समय आरएलए का चार्ज पीसीएस अधिकारी, राकेश पोपली के पास था। मामला संज्ञान में आने पर उन्होंने इसकी तह तक जांच का भरोसा दिया था। लेकिन बीते दिनों उनसे आरएलए का चार्ज लेकर उन्हें एस्टेट ऑफिसर का चार्ज दिया गया। उनसे चार्ज जाते ही मामले की जांच भी दब गई। यही कारण है कि अब तक यह पता नहीं लगा है कि आरएलए-17 में फर्जी दस्तावेजों पर वाहन कैसें और किनकी मदद से रजिस्टर्ड हो रहे हैं। मामले की तह तक जांच की गई तो ढेरों वाहन फर्जी दस्तावेजों पर रजिस्टर्ड हुए हों, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है। बहरहाल, फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह का पीछा पुलिस भले ही छोड़ चुकी हो लेकिन आरएलए के अधिकारी जांच कर उनका पता जरूर लगा सकते हैं।


मुझे बतौर आरएलए काम करने की जिम्मेदारी अभी मिली है। पूर्व में क्या मामले सामने आए ,मुझे उसकी जानकारी नहीं है लेकिन अभी आपके माध्यम से पता लगा है तो मामले की तह तक जांच की जाएगी।
- विराट सिंह, आरएलए-17
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